
गरीब किसान का बेटा गरीबी के चलते कभी कभी सही से दो वक्त का भोजन भी नसीब नही होता था लेकिन आज किस्मत का ऐसा चमत्कार हुआ कि गरीब बेटा IAS बन गया। एक दौर ऐसा भी था, जब घर में दो समय के भोजन के लिए अन्न भी नही होता था। गरीब किसान परिवार में उनके 2 बेटे कई बार ऐसा समय आया कि बिना भोजन के ही रात गुजरनी पड़ती थी, लेकिन आज उसी परिवार का सबसे छोटा होनहार बेटा सुरेन्द्र सिंह उत्तरप्रदेश कॉडर का IAS अफसर है।
गरीबी से गुजरने के बाद आज जिलाधिकारी बनकर अब वो हजारों गरीबों के दुख को दूर करते हैं। उसकी सफलता का परिणाम है कि आज पूरा परिवार खुश है। उनकी पत्नी भी उनका समर्थन करती है। मथुरा जिले के सैदपुर गांव के निवासी सुरेन्द्र सिंह के पिता हरी सिंह गरीब किसान थे। खेती किसानी ही परिवार की आय का मुख्य रास्ता था।
सुरेंद्र ने बताया कि पहले उनके जीवन मे बहुत परेशानियां घेरे हुए थी। उनकी परेशानी कम होने का नाम ही नही लेती थी। गांव के प्राथमिक स्कूल में मेरी प्रारंभिक पढ़ाई हुई। मैं प्रतिदिन देखता था कि मुझे स्कूल जाते देख मेरे परिवार की आंखों में एक अजीब सी खुशी झलकती थी। मेरे माता पिताब ज्यादा पढ़े-लिखे तो नहीं थे, लेकिन मेरी पढ़ाई उनके लिए काफी महत्वपूर्ण थी।
यह बात मैं बचपन से ही जानता था।की मेरे परिवार के लोग मुझे पढ़ने के लिए बहुत मेहनत करते है। तब मेरे परिवार की आय का मुख्य रास्ता खेती ही था। मैं अधिकतर स्कूल से आने के बाद खेतों में जाकर अपने पिता जी का उनके काम में मदद करता था। लेकिन वो मुझे काम करने से इंकार कर देते थे।उनका सपना था कि में पढ़ाई करके बाद आदमी बनू। इसलिए वो चाहते थे कि मेरा ध्यान कभी पढ़ाई से कही और न भटके। मैने 8वीं क्लास तक अपने गांव के ही स्कूल में पढ़ाई की।
पढ़ाई के समय ही मैं कई सरकारी जॉब के लिए Exam देता रहता था। इस मध्य मेरा चयन एयरफोर्स में हो गया। वहां जोइनिग करने से पहले ही मेरा चयन ONGC में जियोलॉजिस्ट के पद पर हो गया। मैंने ONGC में जॉब तो की लेकिन दिल में हमेशा यही बात घर करती थी कि शायद अभी पिता जी का सपना पूरा नही किया है। फिर मैंने 3 बार PCS का exam क्वालीफाई किया, लेकिन Join नहीं किया। क्योंकि दिल में IAS बनने का सपना था।
उस सपने को पूरा करना था। साल 2005 में IAS क्वालीफाई किया, देश में 21वीं रैंक प्राप्त की। 10 साल पहले सुरेन्द्र सिंह की शादी मेरठ की रहने वाली गरिमा से हुई थी। इनकी 2 बेटियों हैं। सुरेन्द्र कहते हैं, DM के पद पर बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं। जिसमे कभी-कभी परिवार और बच्चों के लिए भी समय निकालना असम्भव हो जाता है, लेकिन पत्नी का पूरा समर्थन रहता है, जिसके कारण मैं समाज के लिए अच्छे तरीके से काम कर पा रहा हूं।
सुरेन्द्र ने बताया कि गांव से निकलकर भले ही IAS बन गया हूँ, लेकिन आज भी मुझे अपने मिट्टी के चूल्हे की बनी रोटियां बहुत प्रिय है। सुरेंद्र सिंह IAS अफसर को साल 2012 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद में नियुक्ति के समय निर्वाचन आयोग द्वारा Best Election Practice के अवार्ड से नवाजा गया था। इसके अतिरिक्त मनरेगा स्किम में अच्छे कार्य करने के लिए उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा भी अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।



