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Delhi: भारत देश में राम मंदिर अयोध्या का काम शुरू हो गया है और अब भव्य राम मंदिर बनाने पर विचार हो रहा है। इसके अलावा देश में अन्न हिन्दू मंदिरों को भी न्याय दिलाने पर चर्चा जोर पकड़ चुकी है। राम मंदिर अयोध्या के पहले सोमनाथ मंदिर गुजरात पर काम हो चुका है। अब अगला नंबर कशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) बनारस और श्री कृष्णा जन्मभूमि का माना जा रहा है।
एक मीडिया रिपोर्ट और देश के इतिहास की माने तो देश के कई हज़ार मंदिर ऐसे बताये जाते है। जिन पर आज मस्जिद बना दी गई है। अयोध्या में राम जन्म भूमि मंदिर पर कोर्ट का फैसला आ ही चुका है। कोर्ट ने मन की मुग़ल आक्रमणकारियों ने राम मंदिर के स्थान पर बाबरी मस्जिद बनाई थी। अब अयोध्या का राम मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो रहा है।
Mustaid Khan writes in Maasir-i-Alamgiri that in 1670 during the month of #Ramadan , the religious-minded Emperor [Aurangzeb] ordered the demolition of the temple on the Krishna janma bhumi at #Mathura which was accomplished by his Officers in a short time. pic.twitter.com/RqJIF3GOwa
— Lost History (@Lost_History1) May 25, 2020
काशी और मथुरा मंदिर विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दाखिल की गयी है। इस PIL में एक कानून (Places of worship Act, 1991) को चुनौती दी गई है। इस PIL को दायर करने वाले हिंदु पुजारियों के संगठन के “विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ” के हवाले से मीडिया में खबर आ रही है की अब अन्न मंदिरों को भी मुक्त करवाने की दिखा में काम किया जा रहा है।
आपको बता दे की यह अधिनियम काशी और मथुरा के मामले में इसलिए जरुरी है, क्योंकि उन दोनों ही हिन्दू धार्मिक स्थानों पर विवादित मस्जिदें हैं और यह कानून किसी भी मंदिर को मस्जिद में बदलने या किसी मस्जिद को मंदिर में बदलने से रोक देता है। मतलब इस कानून के रहते हुए अन्न हिन्दू धार्मिक स्थानों और मंदिरो को न्याय नहीं मिल सकता है।
अब यह PIL विवादित धार्मिक स्थलों और हिन्दू मंदिरों के लिए कानूनी जंग जीतने के लिए डाली गयी है। इस PIL के अनुसार हिंदुओं को अपने धार्मिक स्थल वापस लेने के अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए, और देश की संसद को इस ममले में सही दिशा में कार्य किये जाने चाहिए।
आपको बता दे की इस एक्ट को पहले कभी भी चुनौती नहीं दी गई है। ऐसे में यह एक ठोस कदम हो सकता है। इस उपासना स्थल अधिनियम, 1991 कानून को 18 सितंबर, 1991 को पारित किया गया था। उस वक़्त कांग्रेस का राज़ था। इसके तहत 15 अगस्त 1947 तक के मैजूदा किसी भी धार्मिक स्थल को एक धर्म से दूसरे धर्म में चेंज नहीं किया जा सकता है।
It's time to heal the wounds festering since centuries…
The Places of Worship 1991 Act needs to be dumped.
Kashi and Mathura is asking a question that needs our answer.
True Reconciliation comes only when Truth is accepted and not by peddling Lies. pic.twitter.com/XHBJLi7vRP
— Kashmiri Pandit कश्मीरी पण्डित (@KashmiriPandit7) June 12, 2020
इसका सीधा मतलब है की देश की आज़ादी और बरवारे के बाद यदि 15 अगस्त, 1947 को एक स्थान पर मस्ज़िद थी, तो वहां पर अभी भी मस्ज़िद की ही दावेदारी मानी जावेगी। फिर भला ही इस तारीख से कितने दिन पहले या प्राचीन काल से मंदिर ही क्यों ना रहा हो।
इस कानून के तहत, मुगलो और आक्रमणकारियों द्वारा तोड़े गए किसी भी मंदिर पर जहां आज मस्जिद है, उस स्थान पर हिंदू अपना दावा नहीं कर पा रहे। इस एक तरफ़ा कानून के रहते हिंदुओं को अपना मंदिर और ज़मीन वापस नहीं मिल सकती है। अगर कोर्ट में इस तरह का कोई भी मामला चलाया गया, तो उसे निरस्त कर दिया जायेगा।
इस कानून की एक खास बात यह भी है की यह कानून देश की मान्यता प्राप्त प्राचीन स्मारकों पर लागू नहीं होता है। अब इन मान्यता प्राप्त प्राचीन स्मारकों के श्रेणी और नज़रिये भी अलग अलग है। इसके अलावा इस कानून के खिलाफ जाना अपराध कि माना गया है और इस पर जुर्माना और तीन साल तक की सज़ा का भी प्रावधान है। इस कारण से भी अनेक हिन्दू मंदिरों पर लोग आवाज़ नहीं उठा पा रहे है।
इस सबके बीच भाजपा नेता और देश के जाने माने वकील डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है की अयोध्या के बाद अब काशी विश्वनाथ मंदिर का नंबर है। सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट करते हुए कहा की काशी के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जायेगा और सिर्फ कोरोना के ख़त्म होने की प्रतीक्षा की जा रही है।
अयोध्या राम मंदिर मामले में भी भाजपा नेता और वकील सुब्रमनियन स्वामी की महत्वपूर्ण भूमिला मानी जाती है। अब स्वामी के मुताबिक़ अयोध्या राम मंदिर केस तो थोड़ा दिक्कत भरा था, परन्तु काशी और मथुरा केस बहुत आसान है। इससे पहले सुब्रमनियन स्वामी कह चुके है की काशी और मथुरा में हिन्दू मंदिर तोड़ने के बहुत बहुत साक्ष्य उपलब्ध है, काशी में जो मंदिर पर मस्जिद बनाई है, उस मंदिर की दीवार अभी भी मौजूद है, अतः काशी विश्वनाथ मंदिर केस अयोध्या केस से आसान रहने वाला है।




