अपने आप बढ़ने वाले सुप्तेश्वर गणेश मंदिर में प्राकतिक प्रतिमा का रहस्य जानें, मनोकामना होती है पूरी

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Supteshwar Ganesh Mandir Ratan Nagar, Jabalpur Madhya Pradesh is the one of the best worship place in Jabalpur MP. Supteshwar Ganesh Mandir's lord Ganesha idol is natural rock cut temple. It fulfill the wishes of bhakts and Ganesha fans. Supteshwar Ganesh Temple is Self made Hindu temple in high rock in Jabalpur City.

Image Credits: Twitter

Jabalpur/Madhya Pradesh: पूरी दुनिया से भारत की प्राचीनता छुपी नहीं है। दुनिया के कोने कोने से पुरातत्वविद और इतिहासकार भारत आते रहे है। भारत की संस्कृति और यहाँ का हिन्दू धर्म पूरी दुनिया में सबसे पुराना और प्राचीन है। भारत की प्राचीन संस्कृति की पहचान हिन्दू धर्म है और यहाँ से मंदिर। कई मंदिर तो प्राकृतिक है। आज हम आपको ऐसे ही एक प्राकृतिक मंदिर एयर भगवान् के दर्शन करवाने जा रहे है।

भारत में दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर शहर (Jabalpur City) में एक मंदिर है। इस मंदिर में भक्तो की बहुत आस्था है। इस प्राकृतिक मंदिर में भक्तों का ताँता लगा रहता है और लोगो की मनोकामनाएं भी पूरी होती है। सुप्तेश्वर गणेश मंदिर (Supteshwar Ganesh Mandir Ratan Nagar, Jabalpur) पर जबलपुर और आसपास ले लोगो की खासी मान्यता है। यह मंदिर विशाल पहाड़ी पर स्थित है। भगवान गणपति की यह प्रतिमा स्वयं-भू है।

इसकी खास बात यह है कि इस में गणेश जी (Ganesha Ji) की ये पताकृतिक प्रतिमा (Natural Idol OF Ganesha) लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 35 सालों में प्रतिमा 5 फीट से भी अधिक बढ़ गई है। जिस समय इसका प्रथम पूजन किया गया था, तब ये 20 फीट की थी और अब बढ़ कर 25 फीट हो गई है। इसके अलावा यह 120 फीट चौड़ी हो गई है।

एक किस्से ने अनुसार जबलपुर के गुप्तेश्वर क्षेत्र (Gupteshwar) के रतन नगर में भगवान गणेश सुप्त अवस्था में थे। एक महिला भक्त को भगवन ने दर्शन दिए थे। स्थानीय लोग बताते है की शहर की राइट टाउन निवासी श्रीमती सुधा राजे को साल 1985 में एक सपना आया और भगवान ने प्रतिमा स्थापना की बात कही। ऐसे सपने करीब 4 साल तक आते रहे थे। इसके बाद यह सपने वाली बात महिला ने अपने पति को बताई, परन्तु यह नहीं मालूम पढ़ रहा था की किस स्थान पर प्रतिमा है।

इसके बाद सपने में मंदिर तक जाने तक का रास्ता दिखाई दिखा। बताया जाता ही की जब श्रीमती राजे उस पहाड़ी वाले स्थान पर गई, तो वहां कोई रास्ता नहीं था। पहाड़ी पर ऊँची जगह जाने पर पत्थर पर उठा हुआ उभार दिखाई दिया। इसके बाद 4 सितंबर 1989 को भगवान गणेश को सिंदूर चढ़ा पर पूजा आरम्न्ह की गई। यह किस्सा शहर में लोगो तक पहुंचा तो यहां भक्तों का ताँता लग गया।

ऐसा कहा जाता है की भगवान गणेश सुप्त अवस्था में थे, इसीलिए इनका नाम सुप्तेश्वर गणेश (Supteshwar Ganesha) रखा गया। आपको बता दे की भगवान गणेश (Lord Ganesha) की यह प्राकृतिक प्रतिमा 25 फीट ऊंची और 100 वर्गफीट क्षेत्र में है। सबसे बड़ी बात है की भगवान् गणेश का स्थान होने के चलते यहाँ चूहें भी बहुत थे और अभी भी है। अब इस मंदिर में हर त्यौहार पर पूजा, हवन और भंडारा किया जाता है। यहां लोगो की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

लोगो में अनुसार इस विशाल पहाड़ी पर एक गुफा भी बनी हुई है। माना जाता है कि इसी गुफा से सुप्तेश्वर गणपति जी का प्राकट्य हुआ है। यहाँ तक के स्थानीय इन्हे साक्षात गणपति मानते है और दूर-दूर से लोग यहां उनके दर्शनों के लिए आते हैं। अब जब यह प्रतिमा स्वयं बड़ रही है, तो यहाँ समय समय पर स्वयं ही आँख, सूंढ़ और कान की आकृति भी उभरती देखि जा सकती है। मंदिर परिसर में गणेश चतुर्थी पर पूजन और भंडारे का कार्यक्रम होता है। तब यहाँ भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है।

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