यहाँ पर खुदाई में 4000 साल पुराना शिवलिंग और 3500 साल पुरानी हिन्दू सभ्यता मिली

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ancient statue found
Findings date back to around 3500 yrs ago and also found articles from Gupta Empire era. Excavation is being done in Babhaniyav village by a team of Banaras Hindu University's Department of Ancient History, Culture and Archaeology at two spots where idols and structures dating back to around 3500 years ago have been discovered so far.

Image And News Credits: ANI

वाराणसी: आज भारत की धरती ने एक बार फिर से प्राचीन हिन्दू सभयता के सबूत दिए हैं। UP वाराणसी के पास बभानियाव गांव (Babhaniyav village) में खुदाई के दौरान 4000 साल पुराने शिवलिंग (4000 Years Old Shivlinga Found) के मिलने के बाद खुदाई स्थल देखने के लिए लोगों का जमावड़ा लग गया। यह प्राचीन शिवलिंग तब मिला जब काशी हिन्दू विश्वविद्यालय BHU के प्राचीन इतिहास विभाग की एक टीम शहर से 18 किलोमीटर दूर बभनियाव गांव में पुरातात्विक खुदाई में जुटी थी।

मीडिया में आई खबर के अनुसार BHU के प्रोफेसर ने खुदाई के दौरान प्राचीन शिल्प ग्राम होने की संभावना जताई हैं। यह गांव 3500 वर्ष पुराना (3500 Years Old Ancient Village Found) बताया जा रहा है। BHU प्रोफेसरों ने यह दावा बभनियाव गांव (Babhaniyav village) में सर्वे के बाद मिले ताम्र पाषाण काल (Chalcolithic) के मिट्टी के बर्तनों और कुषाण काल की ब्राह्मी स्क्रिप्ट (Brahmi script) के मिलने के बाद किया है। BHU के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग की टीम बीते 26 फरवरी से बभनियाव गांव में खुदाई और सर्वेक्षण का काम कर रही है।

खबर के अनुसार वाराणसी हेरिटेज प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत पंचकोस परिक्रमा के लिए आस-पास के क्षेत्रों में सर्वे का काम शुरू किया गया। सर्वे के दौरान बभानियाव गांव में कई सौ साल पुराने अवशेष मिले। BHU के पुरातत्व विभाग ने खुदाई शुरू की तो 4000 वर्ष पुराना गुप्त कालीन शिवलिंग मिला। BHU के प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर मानते हैं यह स्थान गुप्त काल के दौरान लोगों का धार्मिक स्थान रहा होगा।


Dr Ashok Kumar Singh, Dept of Ancient History, Culture and Archaeology, BHU: Our findings date back to around 3500 yrs ago. We also found articles from Gupta Empire era. We’ve discovered a kiln, a brick wall, & a structured floor. We’ll find out when humans started living here.

खुदाई में मिट्टी के बर्तन और कई तरह की मूर्तियां मिलीं। इन मूर्तियों पर ब्राह्मी स्क्रिप्ट (Brahmi script) भी पाई गई। मिट्टी के ब्लैक एंड रेड वेयर बर्तन भी मिले हैं। इन बर्तनों का बाहरी हिस्सा काला और अंदरूनी हिस्सा लाल है। BHU के इतिहासकारों का कहना है कि ऐसे बर्तन ताम्र पाषाण काल (Tamra Pashan Kal) में यानी आज से 1500 BC (3500 वर्ष पहले) बनते थे।


Excavation is being done in Babhaniyav village by a team of Banaras Hindu University’s Department of Ancient History, Culture and Archaeology at two spots where idols and structures dating back to around 3500 years ago have been discovered so far.

इससे पहले हाल ही में मध्यप्रदेश के कटनी जिले से 15 किलोमीटर दूर पुष्पावती नगरी बिलहरी में संगम नदी में पुल बनाने के निर्माण कार्य की खुदाई के वक़्त 11वीं शताब्दी की अध्भुत मूर्तियां निकली थी। वह मूर्तिया 1000 साल पुरानी बताई जा रही है और हिन्दू भगवान् की मूर्तियां है।

इन मूर्तियों को देखने के बाद खुदाई कर रहे मजदूरों ने तत्काल खुदाई रोककर सरकारी अफसरों और पुलिस को सूचना दी। यहाँ खुदाई में निकली मूर्तियां दुर्लभ पंचमुखी शिव भगवान् और विष्णु भगवान के दशावतार स्वरूप वाली मूर्तियां है। इसके अलावा दो अन्य देवी-देवताओं सहित कुछ छोटी मूर्तियां भी पाई गई हैं। इस मूर्तियों में बहुत ही सुंदर प्राचीन कलाकारी है। शाम नदी की खुदाई में निकलीं कलचुरी काल की मूर्तियों को पुलिस चौकी में सुरक्षित रखा गया है। पुरातत्व विभाग के अफसरों के मुताबिक़ यह मूर्तियां नीले रंग के पत्थर से बनाई गई हैं।

संगम नदी घाट स्लीमनाबाद रोड पर प्रधानमंत्री सडक़ योजना के तहत नदी पर एक पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस पुल निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी, तभी वह प्राचीन मूर्तियां दिखने लगी। पुल की निर्माण कप्म्पनी ने तुरंत पुलिस और अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद इन बरामद प्राचीन भगवान् शिव और विष्णु जी की मूर्तियों को साफ कराकर बिलहरी पुलिस चौकी में सुरक्षित रखवा दिया गया।

आपको बता दें की पांच मुखी शिव व भगवान विष्णु के दस अवतारों की यह मूर्तियां काफी महाव्व रखती है। जबलपुर पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीसी श्रीवास्तव के अनुसार कटनी के बिलहरी में निकली मूर्तियां सदाशिव, भगवान विष्णु के 10 अवतारों, उनके परिकर, भगवान सूर्य सहित अन्य देवी-देवताओं की कलचुरी काल की प्रतिमाएं हैं। ये 10वीं व 11वीं शताब्दी के आसपास की हैं। अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में ऐसी प्राचीन प्रतिमाओं की कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जाती है।

इतिहास कारों के अनुसार बिलहरी का इतिहास कलचुरी काल से जुड़ा हुआ था। यह क्षेत्र इतिहास में प्राचीन पुष्पावती नगरी के नाम से जाना जाता है, इस प्राचीन नगर की स्थापना अंगराज कर्ण ने की थी। इस नगर में पहले कल्चुरी, फिर चेरी राजाओं, फिर चंदेल व अंत में गौंड राजाओं ने शासन किया। बिलहरी नगर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है। यहां विष्णुवाराह मंदिर, 13 बावली, प्राचीन मंदिर, गया कुंड, नौ देवियों के मंदिर और तपसीमठ देखने को मिलते हैं।

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