कोरोना वायरस जैसी महामारी हर 100 साल में रिपीट हुई, पहले से हुई भविष्यवाणी तबाही की: रहस्य

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Corona Virus 100 Years
That’s a strange pattern of pandemic outbreaks. Hope it’s not that serious this time. In 1720 The Great Plague, In 1820 1st Cholera Pandemic, In 1920 The Spanish Flu and now 2020 Novel Coronavirus. Every 100 years a Plague and Virus came again and again.

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भारत समेत सारी दुनिया इस समय कोरोना वायरस (Corona) से जूझ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 6 मार्च तक 32 मरीज कोरोना वायरस से पीड़ित पाए गए हैं। इनमें से केरल में शुरुआत में मिले 3 कोरोना इन्फेक्टेड लोग ठीक भी हो चुके हैं। 16 लोगों का इटालियन ग्रुप है। इस ग्रुप में 1 भारतीय है, जो ड्राइवर है। अन्न इन्फेक्टेड आगरा, हैदराबाद और दिल्ली के लोग है।

कोरोना वायरस (COVID-19) अब तक 60 देशों में पसर गया है और दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित किया है। कोरोना ने चीन में सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है। कोरोनोवायरस इस तरह का कोई पहला प्रकोप नहीं है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित हुए हैं। इतिहास में कई मौकों पर, प्रकोपों ​​ने दुनिया के कई हजारों लाखों लोगों की जान ली है।

नास्त्रेदमस और बाबा वेन्गा ऐसी महामारी की भविष्यवाणी कर चुके थे

इन घटनाएं को लेकर पहले भी कई भविष्यवाणियों में हमें सोचने पर मजबूर किया है। जिसमें दो नाम काफी चर्चित हैं। एक फ्रांस के नास्त्रेदमस (Nostradamus on Corona Virus) और बुल्गारिया के बाबा वेन्गा (Baba Vanga on COVID 19)। नास्त्रेदमस ने भी ऐसे ही भविष्यवाणी की थी और बाबा वेन्गा ने भी इस तरह की भविष्यवाणी की थी। बाबा वेन्गा ने 50 साल में लगभग 100 भविष्यवाणियां कीं थी। इनमें से ज्यादातर सच साबित हुईं। इनकी कई भविष्यवाणियां क्लाइमेट और नेचुरल डिजास्टर से संबंधित थीं।

आज दुनिया कोरोना वायरस के आगोश में हैं, तो ऐसे में बाबा वेन्गा कि भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है। कई वैज्ञानिक और कुछ धर्मग्रथों के अनुसार धरती अपना संतुलन बनाने के लिए खुद परिवर्तन करती रहती है। मतलब यह प्रकृति और घरती खुद को रिबूट करती रहती है और यह चक्र एक निश्चित अंतराल में चलता रहता है।

अगर बाबा वेन्गा (Baba Vanga) की भविष्यवार्णियों पर गौर किया जाए, तो इस वक़्त पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है। ऐसी महामारी जिसके लिए अभी तक हमारे पास कोई भी दवा नहीं है। आज हम आपको ऐसी ही बिमारी रुपी आपदाओं के बारे में बताने जा रहे है जो की कोरोना जैसी ही थी।

प्लेग (1720) ने यूरोपीय देशों में मचाई की तबाही

सन 1720 के आस पास पूरे यूरोपीय क्षेत्र में फैला था प्लेग। बुबोनिक प्लेग भी कहा जाता है। इसने फ्रांस के मार्सिले शहर में कुल 100,000 लोगों की के प्राण ले लिए थे। यह संख्या उस वक्त दुनिया की पूरी जनसंख्या का 20% हुआ थी। यह प्लेग बीमारी पर्शिया और इजिप्ट में फैली थी। एक अच्छा खासा इंसान जो रात को सोने जाता वह इंसान इस बीमारी की वजह से सुबह तक मरा पाया जाता था।

इसका खौफ इतना हावी था की लोग किसी भी चीज को छूने तक से भी डरते थे। इतिहास में प्लेग के कई बार जिक्र मिलते हैं यूरोप, अफ्रीका और एशिया में इसने 7 से 20 करोड़ लोगों के प्राण लिए थे। प्लेग को ताऊन, ब्लैक डेथ, पेस्ट आदि नाम भी दिए गए हैं। असल में यह प्लेग चूहों और पीसू से फैलता था।

सन 1820 फैला कॉलरा वायरस भी लाया तबाही

सन 1820 में दुनिया के सामने आई जानलेवा बीमारी (Cholera) ने सबसे पहले थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस को अपनी चपेट में लिया था। अकेले जावा द्वीप पर, फैलने से 100,000 लोगों अपने प्राण दे बैठे थे। इसके बाद इस कॉलेरा महामारी की वजह से मध्य पूर्व, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप व रूस में करीब 8 लाख लोग अपने प्राण गवा बैठे थे।

यह कॉलरा वायरस असल में हैज़ा था। हैजा विब्रियो कॉलेरा नाम के बैक्टीरिया से होता है। जब मानव शरीर के गंदे अवशेष पानी या खाने या फिर किसी दूसरे के हाथों तक पहुंचते हैं तो बीमारी फैलती है। इस बीमारी में दस्त और उल्टियां होती हैं, जिससे पीड़ित शरीर का सारा पानी खो देते हैं। साफ पानी न मिलने पर पीड़ित के प्राण चले जाते है। कई सालों के शोध के बाद ये पता चला कि ये बीमारी सबसे पहले बांग्लादेश से शुरू हुई थी।

1920 में फैला था स्पेनिश फ्लू

दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस ने 1920 में आया था, जिसने दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी को अपना शिकार बना लिया था। यह वायरस सबसे पहले यूरोप में आया और फिर यूनाइटेड स्टेट्स और एशिया के कुछ हिस्सों में फैला, जिसने करीब 2 करोड़ से 5 करोड़ लोगों के प्राण ले लिए थे। यह वायरस H1N1 फ्लू था, जो कि खांसी, छींकने के दौरान निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने से फैलता है।

That’s a strange pattern of pandemic outbreaks. Hope it’s not that serious this time. In 1720 The Great Plague, In 1820 1st Cholera Pandemic, In 1920 The Spanish Flu and now 2020 Novel Coronavirus.

इस स्पेनिश फ्लू वायरस ने सबसे ज्यादा स्पेन में कहर बरपाया, जिस वजह से इसे स्पेनिश फ्लू के नाम से जाना जाने लगा। यह बिमारी 1889 से पहले एच1 से मानवों में स्वाइन फ्लू का वायरस संक्रमित हुआ। इस वर्ष रूस में एच2 वायरस सामने आया और पूरी दुनिया में फैल गया। इससे 10 लाख से अधिक लोगों के प्राण चले गए थे। इसके बाद सन 1918 में स्पेनिश फ्लू से 5 करोड़ लोगों और मारे गए थे, ऐसे में दुनिया की एक-तिहाई आबादी इससे संक्रमित हुई।

कोरोना 2020 का यह दौर अभी चल रहा है

2020 में करोना वायरस दुनिया में तबाही मचाए हुए हैं। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से 3000 से भी ज्यादा लोग अपने प्राण गवा चुके है और 2 Lakh लोग इससे प्रभावित है। भारत में अभी तक 31 पॉजिटिव मामले कोरोना के आ चुके है। ऐसा सिलसिला हर 100 साल में रिपीट हो रहा है। पूरी विश्व में हर जानलेवा बीमारी 100 साल बाद ताड़व दिखाने धरती पर पहुंच रही है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में अब तक कोरोनावायरस का 93 हजार से ज्यादा मामला सामने आ चुका है। ऐसे में इस सभी बिमारी और महामारियों की टाइमिंग को देखने पर आप सोच में पड़ जाने वाले है।

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