मानव सभ्यता को मिला गया अपना असली पूर्वज, इस देश में मिले पुराने इंसान को ‘ड्रैगन मैन’ कहा गया

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Dragon Man Skull China
Massive Dragon Man Skull Found In China. It might be a new human evolutionary branch. Discovery of ‘Dragon Man’ Skull in China.

Photo Credits: Twitter

Bhopal: आप सभी बहुत अच्छे से जानते है कि हमारी उत्पत्ति बन्दरो से हुई है। हमारे पूर्वज एक बन्दर की तरह थे जिन्हें आदिमानव कहते है। वे पेड़ो के पत्ते तथा छालों से अपने वस्त्र बना कर पहनते थे। जो हमारा वास्तविक रूप है, वो कई वर्षों पूर्व एक बंदर जैसा था। हमे एक टेल मतलब पूँछ भी हुआ करती थी। परंतु जिसका उपयोग कम होने से अवशेषित हो गई।

आदिमानव ने ही आग पहिये और खेती की खोज की जिससे आज मानव दिन रात तरक्की कर रहा है। मानव ने खुद को इतना होशेयर बना लिया है कि हर दिन नई नई खोज होती जा रही है। ये तो बात हुई पुरातत्व युवा की अब हम बात करेंगे, आधुनिक युग की जिसमे एक आधुनिक युग के मानव के पूर्वजो (Human Incenters) की खोज हुई है। जिसे ड्रेगन मेन कहा गया।

क्या आप जानते है ड्रेगन मैन के बारे में। चलिए हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताते है। वैज्ञानिको के द्वारा एक चौका देने वाली खोज की गई है जो हमारे इतिहास को बदल सकता है। इस खोज में हमारे पूर्वजों से जुडी जानकारी मिली है।

यह खोज वास्तव में काफी बड़ी है हो सकता है, इससे आने वाले समय में इंसानों के विकास की धारा को ही बदल कर रख दें। दोस्तों यहाँ पर न कोई सुपर मैन है, न ही कोई स्पाइडर मैन यह तो एक ड्रैगन मैन है, जिसकी यहाँ बात हो रही है। शायद आप लोगों ने इसके बारे में कभी सुना भी न हो। इसलिए आज हम इसके बारे ने विस्तार से जानेंगे।

कोन है ये ड्रैगन मेन और कितनी सच्चाई है इन बातों में

आपको बता दें कि अब ड्रैगन मैन (Dragon-Man) की प्रजाति लुप्त हो चुकी है, जिसे इंसानी पूर्वज कहा गया है। ड्रेगन मेन की खोपड़ी (Skull) वाले भाग को चीन के ड्रैगन रिजिन से खोज कर लाया गया था। ड्रैगन रिजिन से मिली इस खोपड़ी को ड्रैगन मैन नाम दिया, क्योंकि वो ड्रेगन रिजिन से मिली थी।

यह खोपड़ी थोडी इंसानी खोपड़ी की तरह दिखती है। इस खोज से वैज्ञानिकों का तथ्य है कि यह एक इंसानों की लुप्त प्रजाति है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक दुनिया में इंसानों की केवल 3 ही प्रजाति की खोज हो सकी हैं।

हो सकता है कि इस खोज के बाद यह प्रजाति इंसानों की चौथी प्रजाति साबित हो। इसी कारण से यह खोज कोई मामूली खोज नहीं है। यह एक ऐतिहासिक खोज है। इस खोज के लिए वैज्ञानिकों को ढेर सारी शुभकामनाए।

किस तरह हुई खोज

आप लोगों को भी ड्रैगन मैन की खोज के बारे में जानने की जिज्ञासा हो रही होगी। की कैसे की गई खोज तो आपको बता दें की चीन के ड्रैगन रिजियन में निर्माण सुधार का काम चल रहा था। उसी वक्त काम कर रहे एक मजदुर को ‘ड्रैगन मैन’ की खोपड़ी मिली।

इसके बाद उस खोपड़ी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया जहाँ से जानकारी मिली की वह खोपड़ी आज से करीब 1,40,000 वर्ष पुरानी है। वैज्ञानिकों ने तो इतना भी बताया कि यह खोपड़ी एक पुरुष की है। इस खोपड़ी का आकार वर्तमान की इंसानी खोपड़ी से भी ज्यादा बडा है।

इसके साथ ही खोपड़ी के अंदर बहुत बड़े-बड़े आइ शौकेट और बहुत बड़ी भौंहें की रिजेस भी दिखी। वैज्ञानिको का मानना है कि इस पुरुष की नाक बहुत विशाल रही होगी। यह खोपड़ी एक कुएं के अंदर मिली है जो करीब 85 साल से पानी के अंदर डूबी हुई हैं।

चीन के ‘ड्रैगन रिवर’ रिजियन से मिली खोपड़ी को, वैज्ञानिकों ने “Homo Longi” कहा जो एक वैज्ञानिक नाम है। इससे पहले Neanderthals की प्रजाति को आधुनिक इंसानों की सबसे करीबी पूर्वज कहा गया था।

कुछ अचंभित करने वाली जानकारियां

“ड्रैगन मैन”की खोपड़ी ने लोगो के बीच काफी ज्यादा धूम मचा रखी है। लोगो को गुप्सप करने का एक विषय मिला है। जिससे लोग इस विषय में खूब चर्चाएँ कर रहे हैं। हर कोई इसकी अद्वितीय विशेषताओं का बखान कर रहा हैं।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको खोपड़ी के विषय में कुछ जरुरी जानकारी देना चाहते है पहली बात तो यह है कि यह खोपड़ी 9 इंच लंबी और 6 इंच चौड़ी है। इस खोपड़ी के अंदर काफी स्पेस है, जो एक इंसानी दिमाग को आसानी से रख सकता है और काफी दिलचस्प बात तो यह है की इस खोपड़ी के अंदर के भाग का आयतन करीब 1,420 ml है, जो की एक आधुनिक युग के इंसानी सिर को आसानी से अपने अंदर रख सकता है।

ड्रैगन मैन के रूप में सामने आया इंसान का नया पूर्वज

खोपड़ी की जब जांच की गई, तो वैज्ञानिकों को काफी आश्चर्य हुआ। और उन्होंने काफी सारी जानकारी जुटाई जिसमे से एक यह भी है कि जिस खोपड़ी कीखोज की गई है वह एक 50 वर्षीय पुरुष की है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस खोपड़ी के माध्यम से इंसानों में हुई प्रगति की जांच बहुत आसानी से भी की जा सकती है।

खोजी गई खोपड़ी और इंसानी खोपड़ी में कई सारी समानता है। वास्तव में इस खोपड़ी की खोज पहली बार वर्ष 1933 में एक चीनी मजदूर ने की थी। लेकिन उस वक्त यह मजदूर एक जापानी कांट्रेक्टर के अंडर में काम कर रहा था और वह मजदुर जापान को यह खोपड़ी नहीं देना चाहता था।

इसी कारण से उस मजदुर ने यह खोपड़ी एक कुएँ के अंदर फेक दी। जिससे उस वक्त इस खोपड़ी के बारे में कोई जान नहीं सका और जब वह मजदूर मौ-त के करीब आ गया, तो उसने इसकी जानकारी अपने घर के एक व्यक्ति को दे दी। जिससे आज यह बात हमारे सामने आ सकी।

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