
दुनिया मे बहुत ही कम देखने को मिलता है जब कोई दृष्टिहीन कोई अधिकारी के पद पर पदस्थ हो। आज के युग में ये सब सम्भव हो गया है दृष्टिहीन भी अपनी प्रतिभा से जाना जा सकता है। उसको अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाना होगा। किसी की भी बात सुनकर अपने सपनो को टूटने नही देना है।
दुनिया में अधिकतर लोग दिव्यांग व्यक्ति का मजाक उड़ाते है। लोग उन्हें उनकी कमियों को देखकर उनकी इज्जत नही करते है। ऐसे ही एक दृष्टिहीन आईएएस ऑफिसर हैं। जिन्हें लोग दृष्टिहीन होने के कारण उनका सम्मान नही करते थे। भारत मे जो आंकड़े है उसके मुताबिक भारत की कुल जनसंख्या के 2 प्रतिशत व्यक्ति शरीर से दिव्यांग होते है। इनमे कई दिव्यांग ऐसे हैं जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर पल कड़ी मेहनत करते है।
अपनी अपनी कमियों के कारण अपने आपको कमजोर नही समझते, हर पल अपने जीवन के लिए संघर्ष करते है। कई व्यक्ति शरीर में कमी होने के बाद भी अपने सपनो को पूरा करने में जीत हासिल करते है। ऐसे ही एक दृष्टिहीन की Story है, जो सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।नान जप्पा कर्नाटक में रहते है। जो लोग खुद को सबसे कम समझते है ये उन लोगो के लिए प्रेरणा है।
दृष्टिहीन नानजप्पा को सिविल सर्विस की परीक्षा में 340 वी रैंक हासिल हुई थी। ये 2017 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं। ये आंखों से देख नहीं सकते हैं, लेकिन फिर भी अपने सपनो को पूरा करने में सफलता हासिल की। इस परीक्षा को क्लियर करने के लिए इनकी पत्नी ने भी हमेशा इनका हौसला बढ़ाया। हर समय दोस्त बनकर इनका साथ दिया।
“But I tell this story not to jolt you – I tell it because I want to tell each one of you to never stop aspiring and never give up.”
Kempahonnaiah,IAS 2017,West Bengal
Full Story – https://t.co/VhJEIXnpiS pic.twitter.com/IPueXxdLHB
— Humans of LBSNAA (@humansoflbsnaa) August 21, 2018
दृष्टिहीन होने की वजह से उनको पढा़ई करने में बहुत मुश्किल आती थी। इसके लिए उनकी पत्नी ने उनके लिए ऑडियो नोट्स बनाये जिसे वह सुन-सुनकर अपनी पढ़ाई जारी रखे। जैसा पत्नी ने विचार किया था सब वैसा ही हुआ। पत्नी के द्वारा बनाये गए ऑडियो सुन-सुनकर इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। और आज सफलता के मुकाम को हासिल कर लिया। आईएएस बनकर उन्होंने अपने सपनो को पूरा किया।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग कम्युनिटी से जुडे़ होने पर मुझे बहुत फक्र है। मैं बहुत प्रशन्न हूं कि मैं इस कम्युनिटी में शामिल हूं। “मैंने 3rd Class में अपनी नेत्रों की रोशनी खो दी थी। एक गर्वमेंट ब्लाइंड विद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की। मैंने अपने पूरे जीवन में सरकारी विद्यालय और कॉलेजों में ही शिक्षा ग्रहण की है।
Kempahonnaiah IAS appointed OSD- Administrative Training Institute, WB – https://t.co/ERnOTaBeT4 pic.twitter.com/X9GAsPNxNd
— Indian Bureaucracy (@INDBureaucracy) July 11, 2019
उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई सी एच नानजप्पा भी दिव्यांग हैं। उन्होंने पद ग्रहण करने से पहले कहा था कि मैं हर समय में विकलांगों की सहायता करूंगा। उन्हें हर तरह की व्यवस्था प्रदान करूंगा। उन्होंने बताया जब मैं स्कूल में था तब कोई भी काम सही तरह से नही कर पाता था।
नेत्र ना होने की वजह से जिंदगी में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कपड़े भी सही नही पहन पता था। यह सब देखकर लोग मेरी हंसी उड़ाया करते थे। मुझे एक असहाय समझते थे। मैं दिव्यांगों की के लिए हर व्यवस्था उपलब्ध करूंगा जिससे कोई उनका मजाक ना उड़ा सके। उन्होंने बताया कि जिस परिस्थितियों का मैने सामना किया है उस परिस्थितियों का कोई भी सामना ना करे इसके लिए हर सम्भव प्रयास करूंगा।



