भारत का यह गांव ‘भगवान का बगीचा’ कहलाता है, एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के सामने बड़े शहर फेल हैं

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Mawlynnong Village of Meghalaya
Asia's cleanest village in Meghalaya is known as Mawlynnong. How to reach and all about Mawlynnong Village of Meghalaya.

Shillong : वैसे तो हमारे भारत की संस्कृति बहुत अनमोल है। कदम कदम पर भाषा, भोजन, परिवेश बदलता है। परंतु हमारा देश स्वच्छता के मामले में पिछले कई दशकों से पिछड़ा हुआ है। हमने ऊंची ऊंची बिल्डिंग बना ली, अच्छी सड़कें भी बनाली परंतु, यदि आसपास हम नजर घुमा कर देखें, तो हर तरफ कचरा और गंदगी नजर आती है। जिसके लिए सरकार को बकायदा स्वच्छता अभियान जैसा एक उपक्रम चलाना पड़ गया।

हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि, यदि 130 करोड़ भारतीय ठान ले की कचरा नहीं फेंकना है तो, हमारा देश कभी गंदा नहीं हो सकता। परंतु अफसोस यह है कि, कुछ लोग आज भी इसके प्रति जागरूक नहीं है। परंतु हमारे भारत देश का एक गांव ऐसा भी है, जो पूरे एशिया में सबसे स्वच्छ गांव (Asia’s cleanest village) के रूप में घोषित किया गया।

मेघालय (Meghalaya) की गोद में बसा ये मावलिननॉन्ग गांव (Mawlynnong Village) भगवान का बगीचा माना जाता है। आज आपको बताएंगे यह गांव कहां स्थित है, इसके खूबसूरत नजारे आपको मजबूर कर देंगे कुछ दिन मावलिननॉन्ग में बिताने को।

आइए जानते हैं कहां स्थित है यह खूबसूरत एवं स्वच्छ गांव

दोस्तों मावलिननॉन्ग गांव को भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यह भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के पूर्व में स्थित खूबसूरत खांसी पहाड़ियों के पूर्व क्षेत्र में स्थित है। हम सब जानते हैं कि मेघालय प्राकृतिक रूप से एक संपन्न और सुरम्य राज्य है और उसमें यह मावलिननॉन्ग गांव पूरे राज्य का सबसे सुंदर क्षेत्र माना जाता है।

यह जगह कितनी खूबसूरत और मन मोहने वाली होगी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि, यहां की लोकल भाषा में इसे “भगवान का अपना बगीचा” (Gods Garden) के नाम से जाना जाता है।

खूबसूरत सड़के हैं पेड़ों से ढकी हुई चारों तरफ पत्तियां उड़ती हुई, परंतु आपको यहां की सड़कें गलियां सब एकदम क्लीन मिलेंगे। 2003 में एक व्यापक सर्वे के बाद एशिया का सबसे स्वच्छ गांव का खिताब मावलिननॉन्ग गांव ने जीता था।

मावलिननॉन्ग की संस्कृति एवं लोग, बच्चे लगाते हैं मां का सरनेम

मावलिननॉन्ग गांव की संस्कृति की बात करें, तो यहां के लोग स्वच्छता के मामले में काफी जागरूक हैं। चाहे सड़क हो या गांव का चौपाल उसे लोग स्वयं ही साफ करते हैं। वही इस गांव में 2007 से ही हर घर शौचालय का प्रयोग करने लगा था।

प्लास्टिक का इस्तेमाल इस गांव में पूर्ण रूप से बैन है एवं हर घर के दरवाजे पर आपको लकड़ी के बने हुए डस्टबिन देखने मिलेंगे। ये इको फ्रेंडली चीजों का ही इस्तेमाल करते हैं ताकि, प्रकृति को भी नुकसान ना पहुंचे। ये जागरूक लोग खांसी समुदाय के नाम से जाने जाते हैं एवं बच्चे अपने नाम के साथ अपनी माता का सरनेम लगाते हैं।

साक्षरता के मामले में 100 प्रतिशत शिक्षित लोग

मावलिननॉन्ग में 100 प्रतिशत लोग साक्षर हो चुके हैं। अपने बुजुर्गों से शिक्षा के साथ-साथ यहां के बच्चों को स्वच्छता एवं अनुशासन का संस्कार भी गिफ्ट में मिला है। नतीजतन यह अपनी मातृभाषा में तो माहिर है, अंग्रेजी भाषा भी बहुत शुद्धता के साथ बोलते हैं और बच्चों की जागरूकता देखने मिलती है।

जब कोई टूरिस्ट गंदगी फैला दें तो वह बिना कंप्लेंट करें स्वयं उसे साफ कर देते हैं। मामले में गांव में स्थित “Dwaki” नदी का पानी इतना स्वच्छ और निर्मल है कि, जब आप इसमें नाव से सफर करेंगे तो आपको लगेगा कि आप हवा में उड़ रहे हैं।

प्रकृति ने बनाए मावलिननॉन्ग में ढेर सारे टूरिस्ट स्पॉट्स

इस गांव में प्रकृति ने खूबसूरती का खजाना खोल दिया है। यहां आपको सुंदर वन, ऊंचे पहाड़, नदियां, झरने सभी कुछ आपको देखने मिलेंगे। यहां के लोगों ने पेड़ की जड़ों का इस्तेमाल करके नदियों के ऊपर छोटे-छोटे पुल बनाए हैं, जिन पर चलकर आपको अलग ही आनंद प्राप्त होगा।

एपिफेनी नाम का एक प्रसिद्ध चर्च भी यहां आपको देखने मिलेगा। यहां उगने वाले ऑर्गेनिक फसलों से बने स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद आपको जीवन भर याद रहेगा। ये शिलांग से 90 किलोमीटर दूर है, जहां आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। मानसून के बाद जुलाई से दिसंबर के बीच का समय सबसे उत्तम रहेगा मावलिननॉन्ग गांव घूमने के लिए।

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