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Ahmedabad: समाज में महिलाओं का भी उतना ही महत्व है जितना कि पुरुषों का। महिलाएं एक प्रगतिशील राष्ट्र की रीढ़ की हड्डी होती है। घर को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखने से लेकर कार्यस्थल पर उत्कृष्ट परिणाम दिखाने तक, एक महिला यह सब कर सकती है। उनकी योग्यताओं को उनके लिंग के आधार पर कम आंकने की गलती नहीं किया जाना चाहिए।
उन्हें अपनी प्रतिभा दर्शाने का समान मौका दिया जाना चाहिए। आज की कहानी ऐसी ही एक प्रोत्साहित कर देने वाली महिला की है जिन्होंने धागों से कढ़ाई करके कई महिला कारीगरों के जिन्दगी में बदलाव लाया है।
पाबिबेन (Pabiben) कच्छ (Kutch) के अंजार तालुका (Anjar Taluka) के एक ग्राम भदरोई (Bhadroi) से आती हैं। जब वे 5 साल की थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया। उस वक़्त उनकी माँ को तीसरा बच्चा होने वाला था और एसी अवस्था में वह अपने बच्चों का पेट भरने के लिए मजदूरी भी करती थीं। पाबिबेन को अपनी माँ के परिश्रम, को समझने में अधिक समय नहीं लगा।
पाबिबेन (Pabiben Rabari) बताती है कि मेने चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई करना छोड़ दिया, क्योंकि इससे अधिक शिक्षा प्राप्त करने लायक हमारी अर्थिक स्थिति नहीं थी। जब दस वर्ष की हुई, तो मैं भी अपनी माँ के साथ लोगों के घर जाकर काम करने लगी हमे घर में पानी भरने का काम दिया जाता था, जिसके हमे एक रुपये मिलते थे।
कुछ वक़्त बाद माँ से पारंपरिक कढ़ाई (Traditional Embroidery) सीखी
पाबिबेन जब 18 साल की थीं तब उनका विवाह कर दी गया और यहीं से उनके जिंदगी में परिवर्तन प्रारंभ हुआ। कुछ विदेशी भी उनका विवाह देखने आये। उन्होंने उनके द्वारा निर्मित बैग्स देखे, उन्हें वे बेहद पसंद आये। पाबिबेन ने उन्हें भेट के तौर पर यह बैग देने का निश्चय किया।
Pabiben Rabari (centre) from Anjar Taluka of Kutch, Gujarat, India, invented a new embroidery art form called 'Hari Jari'. Rabari then formed a company employing over 60 women to make items using her work #womensart pic.twitter.com/1almWRHxVy
— #WOMENSART (@womensart1) August 16, 2020
जो बैग (Bags) वे लेकर गए उन्हें पाबी बैग (Pabi Bag) के नाम से लोकप्रिय हुए और कुछ समय बाद में यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिट हो गया। पाबिबेन ने बताया कि उनके पति भी उनके कार्य की प्रसंसा करते हैं और उन्हें ग्राम की महिलाओं के लिए अच्छा करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
Threads of innovation
It wouldn't be inaccurate to say that Pabiben Lakhman Rabari is sy… https://t.co/usYFjUschz pic.twitter.com/BcksGn35T4
— Afeef Ibn Albra (@ranaalikash) October 23, 2016
पांच वर्ष के बाद पाबिबेन ने एक और कदम उठाया। उन्होंने प्रदर्शनियों में हिस्सा लेना प्रारंभ किया और अपने कौशल को और भी निखारा। कुछ वक़्त के बाद उन्होंने ग्राम की औरतो के साथ मिलकर काम प्रारंभ किया और फिर पाबिबेन डॉट कॉम (Pabiben.com) का जन्म हुआ। उनका पहला आर्डर 70,000 रूपये का था, जो अहमदाबाद (Ahmedabad) में कहीं से मिला था। बाद में उन्हें गुजरात सरकार की ओर से भी अनुदान मिला।
Pabi Ben Rabari’s e-commerce website https://t.co/6n2jFnc4ZV , My hand came to start. I wish you all the best
We are appreciated the efforts to create a global presence for rural artisans.https://t.co/yo04wrgdrx Pabiben Rabari pic.twitter.com/jrVMgENfZo
— Geetaben Rabari (@GeetabenRabari) November 29, 2020
आज पाबिबेन की टीम में 60 महिलाएं कारीगर के तौर पर काम कर रही हैं और वे तकरीबन 25 प्रकार की डिज़ाइन बनाती हैं। उनकी वेबसाइट का कारोबार 20 लाख रूपये का है। उन्हें 2016 में ग्रामीण उधमीय के लिए जानकी देवी बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया।



