फ़िल्मी अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में कहा था की ‘भारत में बच्चों को लेकर डर लगता है’ इस बयान के बाद अभी विवाद और गहरा गया है क्योंकि अब उनका एक नया Video आ गया है और इस वीडियो ने पहले से कही ज्यादा विवाद खड़ा कर दिया है। यह वीडियो ऐमनेस्टी इंटरनैशनल के लिए शूट किया गया है और ऐमनेस्टी इंटरनैशनल ने ही इस वीडियो को ज़ारी किया हैं इस वीडियो में नसीरुद्दीन शाह यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि भारत में धर्म के नाम पर नफरत की दीवारें खड़ी की जा रही हैं।
आपको बता दे की मानव अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ऐमनेस्टी इंटरनैशनल के 2.13 मिनट के इस विडियो में नसीरुद्दीन शाह कहते हैं कि देश का माहौल ठीक नहीं है और अपने या लोगो के अधिकारों की मांग करने वाले लोगों को जेलों में लॉक किया जा रहा है और कलाकारों, एक्टिविष्टों, स्कॉलर्स और कवियों को दबाया जा रहा है। पत्रकारों को भी शांत करा दिया जा रहा है। आवाज़ उठाने वालों के दफ्तरों में रेड मारी जारी है और और उनके बैंक अकाउंट सीज़ कर दिए जा रहे हैं। धर्म के नाम पर नफरत की दीवारें बनाई जा रही हैं। निर्दोष लोगों के साथ गलत हो रहा है।
नसीरुद्दीन शाह ने इस वीडियो में 90 % उर्दू भाषा का उपयोग किया और कहा की ‘हमारा देश कहां जा रहा है? क्या हम वह देश बनने जा रहे हैं, जहां किसी को अभिव्यक्ति की आज़ादी न हो। जहां अमीर और ताकतवर लोगों को ही सुना जा सके। जहां गरीब और पीड़ित लोगों का के साथ अंन्याये हो? जहां कभी कानून था, वहां अब सिर्फ अंधेरा है।
In 2018, India witnessed a massive crackdown on freedom of expression and human rights defenders. Let's stand up for our constitutional values this new year and tell the Indian government that its crackdown must end now. #AbkiBaarManavAdhikaar pic.twitter.com/e7YSIyLAfm
— Amnesty India (@AIIndia) January 4, 2019
नसीरुद्दीन शाह का यह पूरा बयान किसी फ़िल्मी डायलॉग की तरह था जो वे अपनी फिल्मो में अनेको बार बोल चुके हैं अब यही डायलॉग शाह ने इस इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बोल दिया . किन्तु यह सब एक अजेंडे के तहत किया जा रहा है
नसीरुद्दीन शाह के इस विवाद और वीडियो पर हमने रिसर्च की तो हमें पता चला की नसीरुद्दीन शाह 2013 में हर्ष मंदार और 50 अन्न स्पोंसर के साथ मिलकर मोदी विरोध में एक डिजिटल प्रोजेक्ट शुरू कर चुके है और 2002 दंगो के ऊपर एक फिल्म फ़िराक भी बना चुके है। जिसमे मोदी जी की छवि खराव करने की कोशिश भी की गई किन्तु जब यह सभी प्रयास असफल हुए तब यह नया अथकंडा इस्तेमाल किया जा रहा है।
नसीरुद्दीन शाह ने जो वीडियो में कहा की आवाज़ उठाने वालो के दफ्तरों में रेड मारी जा रही हैं और अकाउंट सीज़ किये जा रहे है। इसका मतलब अब हम आपको बताते हैं। असल में विदेशी संस्था Amnesty International शुरू से ही मोदी विरोधी गतिविधियों में लिप्त देखि गई है और उसके विदेशी फंडिंग भी जांच के घेरे में रही है। जिस वजह से इस संस्था Amnesty Internationalके बेंगलुरु के दफ्तर में ED की रेड पिछले दिनों पड़ी थी और गलत रुप से की जा रही फंडिंग पर कार्यवाही हुई थी। तो अब आप समझ सकते हैं की नसीरुद्दीन शाह और Amnesty International और इस वीडियो ला रिश्ता क्या कहलाता हैं ?



