
Pauri Garhwal: एक महिला के लिए सफलता प्राप्त करना बहुत बड़ा चैलेंज होता है। यदि महिला विवाहित है, तो उसे अपने परिवार की नैतिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए सफलता की राह में चलना होता है। वहीं यदि महिला अविवाहित है और सफलता प्राप्त करना चाहती है, तो परिवार और रिश्तेदार कुछ मामले में सपोर्ट करते हैं, तो कुछ मामले में सपोर्ट नहीं करते।
भारत में 17-18 वर्ष की उम्र में ही लड़की का विवाह कर दिया जाता है। कई माता-पिता का मानना होता है कि लड़की पराए घर की है। उसे पराए घर जाना है इसीलिए जरूरी नहीं है कि वह नौकरी चाकरी करें। यह सोच आज से कुछ वर्ष पुरानी है, परंतु वर्तमान समय में महिलाएं पुरुषों से कई कदम आगे हैं।
महिलाओं ने अपनी काबिलियत से लोगों को जवाब दिया है कि दुनिया में नारी शक्ति से बढ़कर कोई और शक्ति नहीं है। दोस्तों हर राज्य में हर देश में महिलाएं अपनी सफलता का परचम लहरा रही है। उत्तराखंड की महिला (Uttarakhand Woman) ने भी अपनी सफलता का परचम लहराया, साथ ही 2 बच्चों की जिम्मेदारियां भी उठाएं। आइए जानते हैं उस महिला के बारे में।
जाने उत्तराखंड की इस महिला के बारे में
यह सफलता की कहानी उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाले पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) के खिर्सू ब्लॉक के बलौड़ी गांव की रहने वाली अंजली बेंजीवाल बहुगुणा (Anjali Beniwal Bahuguna) की है। इस बात को कोई नहीं नकार सकता कि परिवार की सपोर्ट से मिली इस सफलता की किताब इबारतों में लिखी जा सकती है।
आपको बता दें उत्तराखंड की अंजलि बेंजीवाल बहुगुणा का चयन अपर जज के लिए हुआ है। जी हां दोस्तों उन्होंने उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर ली है। दोस्तों यह परीक्षा भी देश की कठिन परीक्षा में से एक है, परंतु अंजलि ने अपने परिवार के सपोर्ट के कारण इस परीक्षा (Judicial Services Exam) को पास कर लिया है। उनका कहना है कि इस सफलता में महत्वपूर्ण योगदान उनके साथ ससुर का रहा है, जिन्होंने उन्हें कदम कदम पर सपोर्ट किया है।
परिवार का खूब सपोर्ट मिला
आपको बता दें अंजनी के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं जिस समय अंजलि पढ़ाई करती थी, उस समय उनके सास ससुर ने उन बच्चों का ख्याल रखते थे। अंजलि बताती है कि उनके सास ससुर ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया है। अंजलि कहती है कि उनके त्याग को समझते हुए उन्होंने अपने सास-ससुर और खुद के सपनों को उड़ान दी।

आपको बता दे अंजली के पति अतुल बहुगुणा उत्तराखंड हाईकोर्ट में केंद्र और सरकार की तरफ के वकील है और अंजलि नैनीताल हाईकोर्ट में प्रैक्टिशनर रही है। अंजलि कहते हैं कि यदि माता-पिता जैसे सास-ससुर रहे, तो बेटियों को कभी मायके और ससुराल में फर्क समझ न आए।
अंजलि का मायका
रिपोर्ट के अनुसार अंजलि का मायका रुद्रप्रयाग के अंतर्गत आने वाले बेंजी गांव का है। अंजली के पिता कात्यायनी प्रसाद बेंजवाल दिल्ली के विश्वविद्यालय में रिटायर्ड ज्वाइंट रजिस्टार है और उनकी माता एक ग्रहणी है।
अंजनी के माता पिता कहते हैं कि उनकी बेटी ठीक से पढ़ सके और उसकी शिक्षा हमेशा जारी रहे, इसके लिए उन्होंने अपने 6 वर्षीय बेटे हनु को दादा-दादी के सुपुर्द कर दिया था। वही जब अंजली इंटरव्यू के लिए जा रही थी, तब उनकी गोद में 1 महीने की बेटी थी जिसे लेकर वे इंटरव्यू देने पहुंची थी।
मेहनत ही सफलता की कुंजी
अंजलि का कहना है कि उनके माता-पिता के त्याग और उनके परिश्रम के बदौलत ही पर आज अपने सपने को साकार कर सकती हैं। अक्सर महिलाओं को कहते सुना है कि शादी हो गई घर गृहस्ती में फंसने के बाद पढ़ाई लिखाई जैसी चीजें नहीं होती है, परंतु ढेरों कहानियां ऐसी है। जिसमें महिलाओ ने शादी के बाद बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की।
दोस्तों अंजलि की सफलता की कहानी से हमें सीख मिलती है कि परिवार में वह ताकत है, जो एक अकेले इंसान में नहीं है। परिवार के स्पोर्ट के दम पर लोग दुनिया के हर असंभव काम को संभव कर सकते हैं।




