
Muzzafarpur: दोस्तों भारत एक ऐसा देश है जहां 10 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जो अशिक्षित हैं और अपने पति की मृत्यु के पश्चात अपने बच्चों का पालन पोषण मजदूरी या फिर कुछ अन्य कार्य करके करती हैं। ऐसी माताओं के बच्चे अक्सर सोचते हैं कि जिस कष्ट से उनकी माता ने उन्हें पाला है उतनी ही सुविधाजनक जीवन में अपने माता पिता को दे सकें।
गरीबी एक कटु सत्य है और कहा जाता है कि यदि व्यक्ति गरीब पैदा हुआ है, तो उसमें उस व्यक्ति का कोई फॉल्ट नहीं है, परंतु यदि वह व्यक्ति जीवन भर गरीब रहता है, तो इसमें उस व्यक्ति की गलती है। ईश्वर ने मनुष्य को ऐसा शरीर दिया है, जिसके इस्तेमाल से व्यक्ति जीवन भर अच्छा कमा और खा सकता है।
ज्यादातर युवाओं का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) है। भारत का 80 फ़ीसदी युवा चाहता है कि वह अपने जीवन का सही इस्तेमाल कर सके याने अपने जीवन का इस्तेमाल वे देश की सेवा में कर सके। देश में कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी हैं, जो कठिन संघर्षों के बाद इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।
आईएएस अधिकारी विशाल की कहानी
दोस्तों आपको बताना चाहूंगी कि यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) एक सम्मानजनक पद प्रदान करती है। इस परीक्षा में सफलता अपने आप में ही एक उपलब्धि है परंतु यह परीक्षा देश में आयोजित होने वाली सभी कठिन परीक्षाओं में से एक है। इस परीक्षा के लिए लोग सालों साल तैयारी करते हैं, कुछ लोगों को पहली ही बार में सफलता मिल जाती है, तो कुछ 4 से 5 साल तक लगातार धैर्य रखते हुए इस परीक्षा की तैयारी करते है।

यूपीएससी उम्मीदवार का सपना पूरा होता है, जब वह अपने पसंद की पोस्ट प्राप्त कर लेता है, उस समय उस व्यक्ति की मेहनत पूरी दुनिया देख रही होती है। इस लेख के माध्यम से आईएएस अधिकारी विशाल की बात करेंगे जो बिहार के रहने वाले हैं। विशाल ने 484 वी रैंक हासिल करके यह सफलता हासिल की।
पिता को खोने के बाद किया खूब संघर्ष
रिपोर्ट के अनुसार आईएएस अधिकारी विशाल (IAS Vishal Kumar) बिहार के मुजफ्फरपुर के निवासी हैं। उनके पिता मजदूरी करके अपना परिवार पालते थे, परंतु वर्ष 2008 में जब विशाल काफी छोटे थे उस समय उनके पिता का साथ छूट गया था। उनके पिता की जाने के बाद विशाल और उनका परिवार आर्थिक स्थिति की मार जलने लगाी।
ऐसे में विशाल की मां ने अपने परिवार को पालने के लिए पशुपालन प्रारंभ किया। विशाल के पिता चाहती थे कि उनका बेटा पढ़ लिख कर एक अच्छा ऑफिसर बने जो उनकी गरीबी को दूर कर सके। यही सोच विशाल की भी थी, क्योंकि उन्होंने बचपन से ही गरीबी देखी। विशाल की माता रीना देवी बकरी गाय और भैंस का पालन करती थी।
विशाल की शिक्षा
जानकारी के अनुसार विशाल की प्रारंभिक शिक्षा बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzzafarpur) से प्रारंभ हुई। कक्षा 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने साइंस स्ट्रीम से किया, इसके बाद इंजीनियरिंग की तैयारी कर वर्ष 2013 में आईआईटी कानपुर में बीटेक की डिग्री हासिल करने के लिए एडमिशन लिया।
As per new policy of Govt, IAS probationers are being attached to various ministries of Govt of India.
In this process, I met two IAS probationers of 2016 Batch Harendra Narayan(IAS, MP Cadre) & Dr. Vishal Kumar(IAS, Tripura Cadre) attached to Ministry of Railways in Dhanbad. pic.twitter.com/LxoZ4tdTWF— GM/ECR (@GM_ECRly) July 22, 2018
बीटेक की डिग्री हासिल कर उन्होंने रिलायंस कंपनी ज्वाइन कर ली, उनके जॉब करने से घर की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ, परंतु विशाल के मन में उनके पिता का सपना चलते रहता था विशाल के पिता चाहते थे कि वह एक बहुत बड़ा ऑफिसर बने इसीलिए विशाल ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का विचार बनाया और इस दिशा में कार्य करने लगे।
रणनीति बनाकर सफलता प्राप्त की
विशाल बताते हैं कि उन्होंने इस परीक्षा को पास करने के लिए एक सही रणनीति बनाई थी। उन्होंने एनसीईआरटी की किताबों के साथ-साथ अन्य स्टैंडर्ड की किताबों का भी अध्ययन किया जिससे उनसे कोई भी चीज बकाया ना रह जाए।
Dr. Vishal Kumar, IAS, Director of Tribal Welfare, Govt. of Tripura visiting the ST Girls Hostel attached to the Radhamohan Memorial Ashram School at Ambassa on assessing the requirement at ashram school. pic.twitter.com/Ua45sx2c8p
— Tribal Welfare Department, Govt. of Tripura (@twdtripura) April 16, 2022
विशाल की मेहनत और उनके पिता का सपना तब पूरा हुआ जब सिविल सेवा परीक्षा के लिए चयनित हुए। उन्हें 484 में रैंक हासिल हुआ, जिससे उन्हें एक अधिकारी का पद प्राप्त हुआ। विशाल का कहना है कि उनकी सफलता उनके अध्यापक और उनकी माता को जाता है। अध्यापक गौरीशंकर ने उन्हें पग पग पर रास्ता दिखाया और मां ने इस परीक्षा के लिए मोटिवेट किया।



