वह महिला, जिन्होंने 14वीं शताब्दी की ब्लू पॉटरी को फिरसे जीवंत किया, कई शिल्पकारों को भविष्य मिला

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Leela Bordia story
Story of Leela Bordia, founder of Neerja International, employs 1000 local artisans to create more than 500 designs in blue pottery.

Photo Credits: Neerja International

Kolkata: आप सभी देखते है कि हमारे देश में हर कोई इंसान किसी ना किसी चीज का शौकिन रहता है। कोई अपने जीवन को संवारने के लिए काम करते हैं, तो कोई अपने शौक को पुरा करने के लिए। इन सभी लोगो मे कुछ ऐसे भी लोग होते हैं। जिनके अंदर कलाकारी कूट-कूट कर भरी होती है।

आप सभी जानते है कि हमारे भारत मे लोग कलाकारो का बहुत सम्मान करते हैं। इन्हे कुछ अलग ही आदर हमारे यहां दिया जाता है। लेकिन हमारे देश मे इन कलाकारो की कलाओ का शौक अब याद बनकर ही रहने लगा है। क्योकि धीरे धीरे यह सब गायब होने लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज का हर इंसान
डिजीटलाइजेशन की ओर ज्यादा भाग रहा है।

 लोग अब मशीनो से बनाई वस्तु की ओर हो रहे हैं आकर्षित

आप सभी तो देखते ही है कि आज कल का समय डिजीटल समय हो गया है। सभी को हर काम या कोई वस्तु समय से पहले ही चाहिए। जिससे कलाकारो की कला चौपट सी हो गयी है।

उनके द्वारा बनाई गई वस्तुओं को लोग अब कम पसंद करने लगे है और मशीनों से बनाई गई चीजो की ओर अधिक आकर्षित होने लगे हैं। बस यही कारण है कि हमारे भारत देश में अब दिनो दिन सुन्दर सुन्दर हाथ से बनाने वाले वस्तुओ के कलाकारो की संख्या घटने लगी है।

लीला बोर्डिया जिन्होंने पुरानी कला को जीवित किया

बता दे कि हमारे भारत देश डिजीटलाइजेशन जमाने का हो गया है। लेकिन इसके बावजूद यहा कुछ ऐसे भी लोग हैं। जिन्होंने आज भी पुरानी कलाओ को पुरी तरह से गायब नही होने दिया है।

उन्ही लोगो मे से एक महिला जिनका नाम लीला बोर्डिया (Leela Bordia) है। उन्होने पुरानी कलाकारी को आज भी जिन्दा रखा है। आइए आज हम इन्ही के बारे में बात करते हैं कि कैसे इन्होने देश मे बचे कलाकारो की जिंदगी सवार दी।

लीला बोर्डिया को जब नजर आये 14वी शताब्दी के मंगोलो द्वारा बनाई गई कला

आपको बता दें कि लीला बोर्डिया राज्य पश्चिम बंगाल के कोलकाता (Kolkata) राजधानी से बिलान्ग करती है। यह बताती है कि जब वह घुमने के लिए कोलकाता से जयपुर गई थीं। तब उन्होने यहा की शिल्प कला को जो कि कलाकारो दवारा बनाई गयी हो उन चीजो पर इन्होंने बड़ी बारीकी से नजर डाली।

इस शिल्प कला को अच्छे से निहारने के बाद उन्हे मानो ऐसा लग रहा था जैसे मानो 14वी शताब्दी के मंगोलो के द्वारा ही बनाई गई हो। लीला बोर्डिया के अनुसार वह कलाकार अपनी कलाकृति में ब्लू पा़टरी कला (Blue Pottery Art) पर काम कर रहे थे।

ब्लू पाॅटरी कला को आगे बढ़ाने के लिए किया नीरजा इंटरनेशनल संस्था स्थापित

वह बताती है कि ब्लू पाटरी कला पर काम करने वाले की कन्डीशन जयपुर मे कुछ ठीक नहीं थी। जिसके बाद लीला बोर्डिया ने उनकी इस तरह की हालत को देखते हुए यह निर्णय लिया कि वह इन होनहार कलाकारो की जिंदगी पूरी तरह से सवार देगी।

उनकी कलाए बहुत ही खास थी। जिसके बाद इन सभी हालातो को देखते हुए उन्होने एक संस्था निरजा इंटरनेशनल की स्थापना की। उन्होने ब्लू पाटरी कला को आगे बढ़ाने के लिए यह संस्था को स्थापित किया था।

इसके बाद कलाकारो का भी हौसला बढ़ा और यह नीरजा इंटरनेशनल संस्था धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी। जिससे इसमे काम करने वाले कई शिल्प कलाकारो की लाइफ़ मे भी सुधार हो गया। बता दे कि इन सभी कलाकारो की जिंदगी को सवारने का पुरा श्रेय लीला बोर्डिया को जाता है।

इस संस्था से कालाकारो की जिंदगी मे आया सुधार

बता दे कि नीरजा इंटरनेशनल (Neerja International) को स्थापित करने वाली लीला बोर्डिया ब्लू पाटरी कला को बनाने के लिए कार्य करने वाले शिल्प कलाकारो को प्रोत्साहित करती है। वह बताती है कि इस कलाकृति लोगों को बहुत आकर्षित भी करती है।

लीला जी कलाकारो ने जो कलाकृति बनाई है, उन्हे बेचने का काम भी करती है। बता दे कि इस संस्था की स्थापना के बाद से हमारे देश के कुछ कलाकारो (Artisans) की जिंदगी मे खुशिया सी छा गई है। इनकी सभी खुशियो का पुरा श्रेय लीला बोर्डिया जी को ही जाता है। जिन्होंने इन कलाकारो को देखकर इनकी मदद की। सभी उनका आभार व्यक्त करते हैं।

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