
Karauli: आजकल की युवा पीढ़ी चाहती है कि वह अच्छी तरह पढ़ लिखकर एक बहुत बड़ी पोस्ट पर सरकारी नौकरी करें। सरकारी नौकरी के चरण में लोग सरकारी नौकरी को ही अपने जीवन की प्रमुख शैली मानते हैं। पढ़ने लिखने के पश्चात हर युवा चाहता है कि उसे एक अच्छी नौकरी मिल सके या फिर व्यापार में सफलता मिल सके जिससे उनका जीवन ठीक तरह से चल सके।
महंगाई के दौर में थोड़े से पैसों में जीवन चलाना बहुत कठिन हो गया है। इसीलिए युवा चाहता है कि कम से कम उनका जीवन सरलता से कट सके इतना धन उनके पास होना ही चाहिए। एक मिडिल क्लास फैमिली को चलने के लिए भी महीने का 60 से 70000 RS कमाना बेहद जरूरी है। वर्तमान समय में एक व्यक्ति की कमाई से एक अच्छा जीवन जीना बहुत ही कठिन हो गया है।
यदि एक परिवार में 2 सदस्य हैं और एक व्यक्ति कमा रहा है तो एक व्यक्ति से उनके परिवार का भरण पोषण बहुत मुश्किल हो जाता है इसीलिए आज के समय में पति पत्नी दोनों ही कमा कर अपने बच्चों को बेहतरीन भविष्य दे पाते हैं। महिलाएं भी आज के समय में घर परिवार को चलाने में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। वर्तमान समय में महिलाएं ही हैं, जो पुरुष से कई गुना आगे हैं और कमाई के चलते परिवार में भी अपना योगदान दे रही हैं।
राजस्थान की अंजलि ने बढ़ाया राजस्थान का मान
राजस्थान (Rajasthan) राज्य के अंतर्गत आने वाला करौली (Karauli) का हिंडौन शहर की रहने वाली अंजली शर्मा (Anjali Sharma) ने राजस्थान लोकसेवा परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल कर पूरे राज्य का नाम रोशन कर दिया है। अंजलि ने गृह विज्ञान फूड एंड न्यूट्रिशन से आरपीएससी की परीक्षा (RPSC Exam) दी थी, जिसमें उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया।

अंजलि बताती है कि इस परीक्षा को उन्होंने Self-Study के दम पर पास की है वह प्रतिदिन 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी करती थी और इस परीक्षा को अपना लक्ष्य मानकर हर दिन एक नई एनर्जी के साथ तैयारी करती थी।
अंजलि कहती है कि अक्सर लोग बड़े-बड़े इंस्टिट्यूट में जाकर इन परीक्षाओं की तैयारी करती है, परंतु उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, बल्कि उन्होंने अपनी ही पढ़ाई से इस परीक्षा में इतिहास रचने वाली सफलता प्राप्त की है। अंजलि का मानना है कि आत्मविश्वास के साथ किया गया परिश्रम हमेशा सफल होता है।
माता पिता और गुरुजनों के बदौलत पाई है यह सफलता
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ लिख कर एक ऊंचा मुकाम हासिल करें। कहते हैं एक बच्चे की पहली गुरु उसकी मां होती है। उसके बाद वह शिक्षक होते हैं जो उसे मार्ग प्रशस्त कर आते हैं। एक बच्चे की सफलता के लिए माता पिता और गुरुजनों का सपोर्ट होना बेहद जरूरी है माता-पिता गुरुजन ही होते हैं, जो बच्चे को आगे बढ़ने में मदद करते हैं गुरुजन नेक राह दिखाते हैं तो माता-पिता उनके हतोत्साहित होने पर उन्हें दोबारा उत्साह से भरते हैं।
इसी प्रकार अंजली शर्मा के माता पिता और गुरुजनों ने भी उसका बेहद साथ दिया वह कहती हैं कि उनकी सफलता का पूरा श्रेय उनके माता-पिता और गुरुजनों को जाता है। अंजली के पिता राजेश शर्मा सामाजिक न्याय और अधिकारिक विभाग में नौकरी करते हैं और उनकी मां चंद्रकला एक ग्रहणी है, जो परिवार को अच्छी तरह चलाती हैं। अंजलि की सफलता से उनके माता-पिता और गुरुजनों खुश है। वे कहते हैं कि अंजलि शुरू से ही एक होनहार छात्र नहीं है इसीलिए आज भी इस सफलता को हासिल कर सके।
यूनिवर्सिटी में प्राप्त की सेकंड रैंक
अंजलि शुरू से ही अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर नहीं हैं उन्होंने हर काम से पहले शिक्षा को ज्यादा महत्व दिया है। अंजलि ने राजस्थान की महारानी महाविद्यालय में होम साइंस विषय से अपने कॉलेज में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है और राजस्थान की सभी यूनिवर्सिटी में चौथे स्थान पर आई हैं।
अंजलि की पिता राजेश शर्मा का कहना है कि अंजलि ने अपनी पढ़ाई बिना किसी कोचिंग के की है। उनका कहना है कि अंजलि ने वर्ष 2019 से ही इस पद के लिए अपनी तैयारी प्रारंभ कर दी थी।
इसके बाद जब वर्ष 2020 में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए वैकेंसी निकली तो उन्होंने वर्ष 2021 में इस परीक्षा का प्रथम चरण याने लिखित परीक्षा दी। 11 अगस्त 2022 को उन्होंने सफलतापूर्वक अपना इंटरव्यू दिया और इस पोस्ट के लिए चयनित हुई।
अपने ही कॉलेज की प्रोफेसर बनी प्रेरणा
अंजलि का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की प्रेरणा उन्हें अपने ही कॉलेज याने महारानी कॉलेज की प्रोफेसर कविता कच्छावा से मिली है। प्रोफेसर कविता बहुत ही उम्दा और कम उम्र की प्रोफ़ेसर है, जिन्हें देखकर अंजलि के मन में भी उनकी तरह प्रोफेसर बनने का खयाल आया।
उन्होंने इस खयाल को अपना लक्ष्य बनाया और नियमित रूप से अध्ययन करती। अंजलि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहती हैं कि सबसे पहले विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेना चाहिए उसके बाद नियमित रूप से पढ़ाई करना चाहिए।



