
Gorakhpur: मजबूरी लोगों को हर वह काम करना सिखा देती है, जिससे वह कतराते हैं। अक्सर गांव की महिलाएं बेसहारा होने के बाद मजदूरी करने पर मजबूर हो जाती है। कुछ महिलाएं ऐसी होती है, जो मजदूरी के साथ-साथ अपने परिवार को भी पालती है साथ ही अपने ज्ञान को भी बढ़ाती है और कुछ महिलाएं केवल इस मजदूरी से अपने बच्चों को ही पालते हैं।
जैसा कि हम जानते हैं कि भारत कृषि प्रधान देश है, जहां पर 75 प्रतिशत लोग केवल कृषि के दम पर ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं। हम यह भी जानते हैं कि समय के साथ भूमि में लगातार रसायन पदार्थों का उपयोग होने से भूमि में बांझपन आ गया है, जिससे किसानों की लागत भी प्राप्त नहीं हो पा रही है।
कृषि के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने तरह तरह के शोध किए और पाया कि अब किसानों को जैविक खेती करने की जरूरत है वरना एक समय ऐसा भी आएगा जमीन पूरी तरह कठोर हो जाएगी और उस जमीन से 1 प्रतिशत भी अनाज नहीं उग पाएगा। इन बातों को समझते हुए UP के गोरखपुर (Gorakhpur) की रहने वाली एक महिला किसान ने खेती जगत में एक नई क्रांति लेकर आई है।
एक सफल महिला किसान कोइला देवी
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य के गोरखपुर जिले के अंतर्गत आने वाला गांव जंगल कौड़िया के राखूखोर की निवासी कोइला देवी (Koyla Devi) काफी संघर्षों के साथ अपना जीवन बता रही थी। उन्होंने ढेरों मुसीबत झेली, परंतु कभी उन मुसीबतों के सामने घुटने नहीं टेके। वे लगातार मेहनत करती रही।
वे मजदूरी करके ही अपने और अपने परिवार का पेट पाल रही थी, परंतु उनकी मेहनत और कुछ कर दिखाने के जज्बे ने उन्हें खेती (Farming) की तरफ मोड़ दिया और वह अपनी 4 डिसमिल जमीन पर सावां, मडुआ, टागुन, सब्जी, हल्दी आदि की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रही है। उनके एक फैसले ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया और आज उनकी गिनती एक सफल किसान में होती है।
वैज्ञानिकों के द्वारा सिखाई जा रही तकनीकों का इस्तेमाल करती है कोइला देवी
कोइला देवी बताती है कि वह वैज्ञानिकों के सिखाए तरीके से खेती करती हैं। उन्होंने वर्ष 2020 में गेहूं की करण वंदना नाम की एक प्रजाति को 66 वर्गमीटर जमीन पर उगाई थी। उन्हें इतनी जमीन से करीब 220 किलोग्राम गेहूं प्राप्त हुई है।
वे कहती हैं कि यह सब उन वैज्ञानिकों के तरीके से ही संभव हो पाया है। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर के एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप की मेंबरशिप ली और वहां पर जैविक खाद के निर्माण की प्रक्रिया को सीखा। प्रशिक्षण के पश्चात कोयला देवी अब मटका खाद वर्मी कंपोस्ट खाद आदि खाद बनाकर स्वयं भी उपयोग करती है, साथ ही अन्य किसानों को भी बेचती है।
पुरस्कारों से नवाजा गया है कोइला देवी को
कोइला देवी एक सफल किसान होने के नाते अन्य महिला और किसानों को भी कृषि के क्षेत्र में मदद करती है और उन्हें सुझाव देती है। उनके इस कारनामे के कारण वर्ष 2019 में उन्हें “उत्कृष्ट किसान सम्मान” (Farming Award) से भी सम्मानित किया गया था। उनके नेकी के काम यहीं खत्म नहीं होते वे डीएसटी कोर सपोर्ट परियोजना से जुड़ी और माँ वैष्णो देवी स्वयं सहायता समूह का शुभारंभ किया।
इस समूह में 13 महिलाएं जुड़ चुकी है और वह खुद को आत्मनिर्भर (Aatmanirbhar) बना रही है। यह महिलाएं आपस के बैंकिंग से एक दूसरे की आर्थिक रूप से मदद करती हैं। इसी बैंक के जरिए कोयला देवी ने किराए पर 2 बीघा जमीन कृषि के लिए लिए हैं, जिसमें वह धान सरसों मूंगफली गेहूं की फसल उगा है।
अन्य लोगों के लिए है प्रेरणा स्रोत कोइला देवी
कोइला देवी उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं, जो लोग चीजों के अभाव में कुछ करना नहीं चाहते। कोयला देवी ने खेती किसानी से संबंधित कई तरह की बारीकियों को और सावधानियों को सीखा है। इसीलिए वह अन्य किसानों को इन चीजों के लिए प्रशिक्षण देती है और उनके इस कार्य में मदद करती हैं। आज वे अपने कार्य की वजह से अपने परिवार को काफी अच्छे से चला पा रही हैं।




