एक गरीब परिवार के बेटे ने रेडियो बेचकर खर्चा निकाला, अब 30 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी बना ली

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Nilesh Mali KDM
KDM Company Founder, Nilesh Mali Success Story In Hindi. Nilesh Mali The Man Behind India's Biggest Mobile Accessory Company, KDM.

Mumbai: गरीबी कभी भी यह निश्‍चित नहीं करती कि आपका भविष्‍य क्‍या होगा। हमारी मेहनत हमारी लगन से तय होता है कि हम भविष्‍य में क्‍या होंगे। किस लेवल तक की तरक्‍की करेंगे। छोटी शुरूआत ही बडी तरक्‍की की ओर हमें लेकर जाती है।

कुछ ऐसा ही नीलेश माली (Nilesh Mali) नाम के शख्‍स के साथ हुआ है। गरीबी मे पले बढ़े नीलेश ने गई वर्षो तक गरीबी झेली। उन्‍होंने वाकमैन की तक जॉब की रोडियो पर भी काम किया। लेकिन आज वह 30 करोड़ की एक कंपनी के मालिक बन चुके है। कैसे नीलेश नाम के शख्‍स ने सफलता की ऊँचाईया छुई आइये जानते है।

नीलेश जिन्‍होंने शुरू की केडीएम कंपनी सालाना टर्नओवर 30 करोड़

नीलेश वह शख्‍स है जिन्‍होंने 2011 में एक केडीएम (KDM India) नाम की कंपनी शुरू की थी। यह कंपनी आज काफी किफायती मोबाइल की एक्‍सेसरीज तैयार करती है। यह भारत की एक्‍सेसरीज निर्माण करने वाली कंपनी में अग्रणी है।

Money
Money Demo File Photo.

इस कंपनी का आज सालाना टर्नओवर लगभग 30 करोड़ का है। नीलेश माली ने बचपन में काफी गरीबी देखी। उन्‍होंने केवल 18 साल की आयु से ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्‍होंने मारवाड़ी नस्‍ल के घोड़े के लिये राजस्‍थान के जालोर से मुंबई तक का सफर किया था। तब से नौकरी करने की शुरूआत उनकी हो गई थी।

छोटे काम से शुरूआत की फिर शुरू की कंपनी

2000 के दशक के समय में नीलेश ने काफी खुदरा दुकानों में काम किया था। उन्‍होंने अपने जीवन में कई तरह की अजीबोगरीब नौकरी की। उनका सपना कुछ बड़ा हासिल करने का शुरू से था। यही कारण था कि वह किसी भी काम से पीछे नही हटे। क्‍योंकि उनको पता था कि वह जो कुछ भी आज करेंगे इन छोटी छोटी शुरूआत से ही आगे चलकर कुछ बड़ा वह प्राप्‍त कर पाएंगे।

उन्‍होंने इलेक्‍ट्रॉनिक सामान जैसे की वॉकमेन तथा रेडियो को तक बेचने का काम किया। लगभग 20 साल तक नीलेश ने इसी तरह कई छोटे मोटे काम किये। 20 साल के बाद नीलेश ने ऐसी कंपनी खड़ी कर दी की उसका सालाना टर्नओवर 30 करोड़ रूपये पहुँच गया। नीलेश ने 2011 में इस कंपनी को शुरू किया। इस कंपनी का नाम नीलेश ने केडीएम इंडिया रखा।

दोस्‍त की सलाह ने बदली जिंदगी

नीलेश अपने विषय में बताते हुये कहते है कि वह एक छोटे शहर से ताल्‍लुक रखते थे। वह कहते है कि जब वह काम ढूँढने मुंबई आये थे, उस समय मेरे सपने काफी बड़े थे। मैने कई सालो तक संघर्ष किया कई सालों तक छोटे मोटे काम किये।

वह कहते हे कि छोटे काम करने के बीच मे ही मेरे एक दोस्‍त ने मुझे सलाह दी की मुझे मोबाइल एक्‍सेसरीज (Mobile Accessory) की ट्रेडिंग का काम करना चाहिए। ऐसा इ‍सलिए क्‍योंकि उस समय पर यह काफी ज्‍यादा चलन मे था। उनके दोस्‍त की सलाह ने उनकी जिंदगी बदल दी। आपको बता दे कि आज केडीएम इंडिया पूरे भारत में 200 स्‍टॉक कीपिंग यूनिट बनाकर वितरण करती है।

दोस्‍त की सलाह पर मोबाइल एक्‍सेसरीज का कार्य शुरू किया

कई वर्षो तक नीलेश ने छोटे छोटे काम किये। लेकिन हम जानते है कि 2000 के बाद में दुनिया ने अलग ही करवट ली। 2000 के बाद से भारत तेजी से बदलता दिखता है। नीलेश के फ्रेड ने उनको मोबाइल एक्‍सेसरीज, चार्जर्स का मुख्‍य व्‍यापार करने की बात कही। नीलेश ने उस समय ट्रेडिंग का तरीका अपनाया।

उन्‍होंने मोबाइल बैटरी को बेचना चाहा। इसके लिये उन्‍होंने कई विक्रेताओ से संपर्क भी साधा। जब उन्‍होंने यह काम किया, तो उनके काम ने सफलता की अच्‍छी उड़ान भरी। फिर उन्‍होंने कई पोर्टफोलियो का विस्‍तार करने के उद्देश्‍य से भी काम किया।

विदेशी सामान से नहीं थे संतुष्‍ट खुद से ही एक्‍सेसरीज का निर्माण किया

वह बताते है कि उन्‍होने 2 वर्ष तक एक ही तरह का काम किया। 2008 में वह पहली बार चीन भी गये। इस समय उन्‍होंने पहली बार हवाई जहाज में सफर किया। वह बताते है कि उन्‍होंने निर्माताओे से सीधे ही सामान खरीदा तथा थोक बाजार में एंट्री की।

थोक निर्मातोओ से नीलेश ने सीधे ही संपर्क किया। लेकिन नीलेश विदेश से सामान खरीदने पर कभी संतुष्‍ट नही हुये। इसका कारण यह था कि नीलेश सामान की गुणबत्‍ता ओर उसके मूल्‍य पर बिल्‍कुल भी भरोसा नही हुआ। फिर नीलेश ने अपनी कंपनी जो शुरू की उसमें इन हाउस एक्‍सेसरीज का निर्माण शुरू किया।

यह काम उन्‍होंने इंटेली कवर के साथ प्रारंभ किया। उस समय काफी मोबाइल तथा मोबाइल एक्‍सेसरीज का बाजार बढ़ चुका था। जिस कारण नीलेश ने व्‍यवसाय ने रफ्तार पकड़ ली। आज वह एक सफल बिजनेस मैन की तरह दिखते है। 30 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी आज उनकी है।

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