
Chennai: जिस तरह से बॉलीवुड के अभिनेता तथा अभिनेत्री ने हमारे दिलो मे आज तक जगह बनाई है। ठीक उसी प्रकार अब टॉलीवुड के स्टार भी हमारे दिल में जगह बनाने लगे है। अल्लू अर्जुन, प्रभास, एनटीआर, यश और रामचरण ऐसे स्टार है, जिन्होंने इस साल सभी के दिलों में अपनी छाप छोड़ी।
इन स्टारो को हमारी संस्कृति से जोड़कर भी सोशल मीडिया पर अक्सर दिखाया जाता है। अक्सर ही दक्षिण भारत के स्टारो को हमारे प्राचीन इतिहास तथा सांस्कृतिक गौरव के विषय में अपनी राय देते हुये देखा जाता है।
अभी हाल ही में एक्टर विक्रम (Actor Vikram) ने एक कार्यक्रम में कहा कि हमें अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने और भी इतिहास से जुडी बाते कही। यह वह बातें है जो आपका दिल छू लेगी। आइये जानते है विक्रम ने आखिर क्या क्या कहा इस कार्यक्रम के दौरान।
साउथ इंडियन अभिनेता विक्रम ने कही ऐसी बातें जो छू लेगी आपका दिल
विक्रम साउथ इंडियन अभिनेता है उनकी फिल्म चोल साम्राज्य से संबंधित पीएस-1 (PS-1) है। इस फिल्म से संबंधित कार्यक्रम के समय में अभिनेता ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कई बाते कही। अभिनेता ने कहा प्रत्येक व्यक्ति की रूचियॉ अलग होती है। कोई साइंस में रूचि लेता है, तो कोई फिलोसॉफी में। लेकिन वह कहते है कि हिस्टरी एक ऐसा विषय है जो हर विषय से अलग है।
विक्रम कहते है कि हम इतिहास की कहानी काफी समय से सुनते आये है। वह कहते है कि जिस प्रकार से चंदा मामा की कहानी हिंदी में है। ठीक उसी तरह से तमिल में भी यह कहानी है। वह कहते है कि हमारा इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है, वही महाराजा भी बहुत वीर योद्धा हुआ करते थे।
Komal Nahta said Vikram in Ponniyin Selvan was good not extra ordinary. Ask any Bollywood actor to do that pre interval scene like Vikram.They will sh T their pants. Taklu hutiya pic.twitter.com/B8YNpuLuii
— Mohabbatein PS 1 All time blockbster (@sidharth0800) October 12, 2022
विक्रम कहते हे कि में लोगों का ध्यान इस और आकर्षित करना चाहता हूँ कि लोग मिस्त्र के पिरामिड के बारे में तो बहुत सोचते है कि यह कैसे बने होंगे। कैसे इनका निर्माण हुआ होगा। लेकिन कभी यह नही सोचते कि भारतीय मंदिर (Indian Temple) जो इतने विशाल और सुन्दर कृतियों के धनी है। उनका निर्माण किस प्रकार हुआ होगा।
पिरामिड का जिक्र और भारतीय इतिहास की उपेक्षा इस चलन को करना होगा बंद
विक्रम कहते है कि तंजावुर (Thanjavur) में स्थित गोपुरम मंदिर (Gopuram Temple) चोल साम्राज्य (Chola Dynasty) की सांस्कृति का गढ़ माना जाता है। इस मंदिर को राजराजा चोल के द्वारा बनाया गया था। वह कहते है कि इसमे उपयोग किया गया पत्थर 80 टन वजन का है। इसे किस तरह उतनी ऊपर पहुँचाया गया होगा कैसे यह मंदिर बना होगा। इस बारे मे हमे कभी कोई नही बताता।
1) Brihadishvara Temple of Thanjavur in Tamil Nadu was built by Raja Raja Chola.
It is a Hindu Temple dedicated to Lord Shiva. pic.twitter.com/yQl3mgd7NB
— Anshul Saxena (@AskAnshul) October 6, 2022
वह कहते है कि गिरे भवनो के बारे में बात करना तो हमारे लिये आम है, लेकिन मंदिर जो की बिना प्लास्टर के बने है। उनकी बात कोई नही करता। उनका कहना है कि इन इतिहास की अमूल्य धरोहर पर हमे गर्व करना सीखना होगा। पिरामिड (Pyramid) की बात करना और इतिहास के मंदिर की उपेक्षा करना इस चलन को बंद करना होगा।
चोल साम्राज्य के इतिहास की चर्चा की राजाओ को बताया महान
उन्होंने पुराने इतिहास की बात करते हुये कहा कि राजराजा चोल साम्राज्य के समय में 6 किलोमीटर लंगे रैंप को निर्मित किया गया था। जिसका हाथी, बैल तथा मनुष्य उपयेाग करते थे।
Nandi and Shiva lingams at the Brihadeshwara Temple, Thanjavur. Sanctum has a gigantic lingam. Temple is run by a trust operated by the former Maratha king's descendants. So you have Nandi and lingams in a Shiva temple. Yet fools say Cholas weren’t Hindus. (Pics from 2017 visit) pic.twitter.com/obgsGq2l5Q
— Rakesh Krishnan Simha (@ByRakeshSimha) October 7, 2022
वह कहते है कि यह सब उस समय बिना किसी मशीन के उपयोग के बनाया गया था। इसलिए हमें अपने गोरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने बताया कि उस समय यह जो रैंप निर्मित किया गया था वह 6 भूकंप शहन करने की हिम्मत रखता था। उस समय 5000 से भी ज्यादा बॉंध बनाए गये थे।
उस समय के राजाओं की विशेषताएं बताते हुये विक्रम कहते है कि इनके द्वारा मुफ्त में अस्पताल, कर्ज देकर हर व्यक्ति की मदद करना यह सब धर्म कर्म के काम किये जाते थे। उस समय सबसे बड़ी नौसेना हुआ करती थी।
वह कहते है कि हमारा देश अन्य सभी देश से ज्यादा संपन्न था। उस समय क्या आप जानते है कि पश्चिमि देश जिसे हम महाशक्तियॉं कहते है वह क्या करती थी। वह कहते है कि यह सब नौवी शताब्दी में हमारे यहॉ होता था। उसके 500 साल बाद में कोलम्बस ने अमेरिका को खोजा। वही यूरोप मे अंधेरा छाया हुआ था।
अंत मे उन्होंने कहॉं कि हमे पूर्व पश्चिम तथा उत्त्र दक्षिण के विषय में ना सोचकर अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए और आगे की पीढ़ी को भी इसके विषय मे बताकर उनके मन में इसके प्रति सम्मान की भावना पैदा करनी चाहिए।



