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Delhi: देश और दुनिया में बेटियां अपने हुनर से माता पिता ही नहीं, बल्कि देश और अपने राज्य का नाम ऊंचा कर रही हैं। बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं और अपना नाम रोशन कर रहे हैं। शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल का मैदान हो हर जगह महिला अपनी पहुंच का प्रदर्शन कर रहे हैं।
पहले के बूढ़े बुजुर्गों से कहते हुए सुना है कि बेटा ही घर का चिराग और मां-बाप के बूढ़ी हड्डियों का सहारा होता है, परंतु इस बात को भी बेटियों ने साबित कर दिया कि बेटे ही नहीं बल्कि बेटियां भी हैं, जो बूढ़े मां बाप का सहारा बन सकती हैं। कामों में बटवारा था कि यह काम आदमी ही कर सकता है, औरत नहीं कर सकती, परंतु औरत ने उनका भी मुंह बंद करा दिया, क्योंकि एक नारी शक्ति से बढ़कर कोई शक्ति नहीं होती।
नारी हर वह काम कर सकती है, जो इस दुनिया में संभव है। सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म जहां रोजाना कुछ ना कुछ विशेष वायरल होते ही रहता है। इसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई सारी बेटियों के हैरतअंगेज कारनामे वायरल होते हैं। आज हम एक विकलांग आईएएस अधिकारी (IAS Officer) की बात करेंगे, जिन्होंने अपनी मेहनत की दम पर दिव्यांगत को भी हरा कर यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पास की।
बीमारी के चलते बचपन से ही विकलांग हो गई
ईश्वर ने मानव शरीर को एक बेहतरीन अंदाज में बनाया है। मानव शरीर का हर एक अंग उनके कार्य को आसान बना देता है। दुनिया में ढेरों ऐसे लोग हैं, जो विकलांगता (Disability) की श्रेणी में आते हैं, कई लोगों से कहते सुना है कि एक अपाहिज व्यक्ति के लिए कोई भी काम करना थोड़ा मुश्किल होता है, परंतु नामुमकिन नहीं होता।
जरा सोचिए यदि किसी व्यक्ति के पैर नहीं है या हाथ नहीं है, तो उस व्यक्ति का जीवन किसी अन्य व्यक्ति पर डिपेंड हो जाता है, वह हर काम करने में थोड़ी असमर्थ होती है, परंतु धीरे-धीरे वह अपनी आदत बना लेते हैं।
आज की कहानी भी एक ऐसी ही विकलांग आईएएस अधिकारी उम्मुल खेर (IAS Ummul Kher) की है, जो अजैले बोन डिसऑर्डर नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी के कारण एक छोटी सी चोट भी उनकी हड्डियों को फ्रैक्चर कर देती थी। इसी के कारण वे अपने शरीर के कई अंगों से अपाहिज हो गई थी।
पहली बार में ही प्राप्त की यूपीएससी परीक्षा में सफलता
गरीबी और विकलांगता कभी आईएएस अधिकारी उम्र के रास्ते में रुकावट नहीं बनी। उन्होंने बचपन से ही ठान लिया था कि वह कुछ ऐसा करेंगे, जिससे उनकी कमजोरी ही उनकी ताकत बन जाए। उम्मूल खैर ने वर्ष 2016 में यूपीएससी की परीक्षा दी थी और पहले ही प्रयास में उन्होंने 420 वी रैंक हासिल कर ली। उममुल की सफलता लोगो के लिए प्रेरणा है।

अकसर लोग सोचते है की उनके पास चीजों का अभाव है। जिसके कारण वे कुछ नही कर सकते, परंतु ऐसा नही है। क्युकी सफलता मेहनत मांगती है। भारत में ढेरों आईएएस अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने गरीबी देखी संघर्ष देखा परंतु कभी हार नहीं मानी लगातार प्रयत्नशील रहे और मेहनत करके सफलता हासिल कर ली।
उममुल का संघर्ष
एक रिपोर्ट के मुताबिक उम्र काफी गरीब परिवार से हैं, उनके पिता सड़कों पर मूंगफली बेचने का कार्य करते थे। पहले वे दिल्ली में बनी झुग्गियों में रहकर अपना समय गुजार नहीं थी, परंतु अतिक्रमण के कारण शहर से झुग्गिया हटा दी गई। जिसके कारण उम्मुल और उनके परिवार को त्रिलोकपुरी आकर रहना पड़ा।
Hon'ble CM @ArvindKejriwal, Hon'ble Chief Secretary of Delhi Vijay Kumar Dev and Hon'ble Chairperson of DCW @SwatiJaiHind awarding Ummul Kher, who was born with fragile bone disorder but went on to become an IAS officer.#DCWAwards2019 pic.twitter.com/Allmiz7Ti6
— Delhi Commission for Women – DCW (@DCWDelhi) March 8, 2019
जिस वक्त उन्होंने त्रिलोकपुरी में शिफ्ट किया। उसके कुछ समय पश्चात उम्मुल की माता का देहांत हो गया। मां के जाने से वे काफी सदमे में आ गई ऊपर से उनके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया जिसकी वजह से सौतेली मां घर में आ गई और उम्मुल के लिए परेशानियां खड़ी होने लगी। उम्मुल की सौतेली मां उन्हें जरा भी पसंद नहीं करती थी। धीरे-धीरे उम्मुल को सब नापसंद करने लगे और उसकी विकलांगता के कारण लोगों पर बोझ बन रही थी।
तानों से परेशान हो अलग रहने का किया फैसला
उम्मुल की सौतेली मां ने परिवार के सभी सदस्य को उम्मुल के खिलाफ कर दिया, जिससे परेशान होकर उम्मुल ने लोगों से अलग एक किराए के घर में रहने का फैसला किया। किराए के मकान में रहने और खर्चा चलाने के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन देना शुरू किया। साथ ही वे यूपीएससी की तैयारी करने लगी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
Meet Ummul kher IAS from Trilok puri. I proud of you Ummul. pic.twitter.com/ZKWFPBbxSd
— Sanjay Nunehra (@sanjaynunehra) June 2, 2017
इंटरव्यू के दौरान उम्मुल बताती है कि कक्षा पांचवी तक उन्होंने 1 विकलांग स्कूल में पढ़ाई की। उसके बाद कक्षा आठवीं तक एक ट्रस्ट की स्कूल में अपनी शिक्षा पूरी की। कक्षा आठवीं में उन्हें किसी विशेष कार्य के लिए स्कॉलरशिप प्रदान की गई थी।
Her Strong determination has made her an IAS Officer.
Khudos Ummul Kher pic.twitter.com/RT6wtUgtxF
— Prakash KP (@KPrakash2010) February 11, 2021
उस स्कॉलरशिप से उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई एक प्राइवेट स्कूल में की, जहां उन्हें 90 फ़ीसदी अंक प्राप्त हुए। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपना ग्रेजुएशन किया दिल्ली जेएनयू से अपना मास्टर करने लगी, इसी दौरान उन्होंने अपने यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी थी।



