
Dhanbad: जैसे कि हम जानते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) देश की सबसे जटिल परीक्षा है। इस परीक्षा में 3 चरण होते हैं। यदि दो चरण पास करने के बाद आखिरी चरण में फेल हो जाते हैं, तो इसकी शुरुआत दोबारा पहले चरण से करनी होती है, इसीलिए यह परीक्षा और भी ज्यादा जटिल हो जाती है।
इसके बावजूद भी देश के 80 फ़ीसदी युवा यूपीएससी को अपना करियर चुनते हैं, हर वर्ष लाखों युवा अपने अपने सपनों के साथ इस परीक्षा में बैठते हैं, जिनमें से कुछ ही लोग चुने जाते हैं। दोस्तों इस परीक्षा में उसी का चुनाव होता है, जो धैर्य के साथ अथक परिश्रम करने के लिए तैयार होता है। इस परीक्षा में सफलता की खास बात यह है कि इसकी उपलब्धि अपने आप में ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

भारत देश में काफी सारे ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने जीवन में काफी मुसीबतों का सामना किया। उसके बाद भी वे अपने लक्ष्य पर अडिग रहे और इस सफलता को अपने नाम किया। ज्यादातर लोगों ने आर्थिक तंगी का सामना किया है, जो एक बहुत बड़ी समस्या है।
आईएएस निरंजन कुमार की सफलता की कहानी
दोस्त हर व्यक्ति के अंदर कुछ पाने की चाहत होती है, कुछ व्यक्ति अपनी चाहत को जिद बना लेते हैं और निरंतर प्रयास में लग जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यदि कुछ पाने की चाहत यदि ज़िद बन जाए, तो उसे पानी से कोई नहीं रोक सकता।
आज हम इस लेख के माध्यम से एक ऐसे ही जिद्दी इंसान की बात करेंगे, जिसका इज्जत आईएएस अधिकारी बनना था और उनकी यह जिद पूरी भी हो गई। दोस्तों आपको बता दें आईएएस अधिकारी निरंजन कुमार बिहार राज्य के रहने वाले हैं निरंजन कुमार काफी गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता खैनी बेचकर अपना घर परिवार चलाते थे। साथ ही अपने बच्चों को शिक्षित किया।
बेटे को आईएएस बनकर किया सपना साकार
जानकारी के अनुसार निरंजन कुमार (IRS Niranjan Kumar) के पिता अरविंद कुमार एक छोटी सी खैनी की दुकान के संचालक थे। वे अपनी खाने की दुकान से ही पूरे परिवार का पालन पोषण कर रहे थे और जैसे तैसे अपने जीवन का गुजारा कर रहे थे।
इसी बीच महामारी का कहर बरपा और चारों तरफ हाहाकार मच गया, इसका असर निरंजन कुमार के घर में भी देखने को मिला। लॉकडाउन में सारे शहर के साथ निरंजन के पिता की दुकान भी बंद हो गई। इसी बीच निरंजन के पिता के स्वास्थ्य में भी गड़बड़ी आ गई जिस वजह से मैं दोबारा कभी दुकान नहीं खोल सके।
निरंजन कुमार बताते हैं कि उस दुकान से मात्र महीने का 5000 RS कमा पाते थे। उसी से उनका घर परिवार चल रहा था और जब महामारी आई, तो घर परिवार पूरी तरह पस्त हो गया। घर चलाने तक के पैसे नहीं थे।
खुद बैठने लगे खेली दुकान में
आईएएस अधिकारी निरंजन कुमार एक इंटरव्यू के दौरान बताते हैं कि जब उनके पिता की सेहत खराब हुई, तो उनके घर में और भी ज्यादा आर्थिक तंगी आ गई। इस स्थिति में सुधार के लिए वे स्वयं उस दुकान में बैठने लगे और खैनी बेचने लगे।

ढेरों ऐसे युवा है, जो कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं, परंतु राह में मुश्किलें आने के कारण वे अपनी मंजिल से भटक जाते, परंतु निरंजन कुमार के साथ ऐसा नहीं था। उनके घर पर बिगड़ती हालत को उन्होंने स्वयं काम करके संवारा जब देखा कि मैं अपनी पढ़ाई से विचलित हो रहे हैं, तो उन्होंने अपनी मेहनत को और भी ज्यादा बढ़ा दिया, जिससे वे अपने कामकाज के चलते पढ़ाई में किसी प्रकार का रोड़ा ना बन सके।
परिवार जनों ने किया सपोर्ट
बताया जा रहा है कि जब निरंजन कुमार के घर में आर्थिक मुसीबतें आई। उस समय पूरे परिवार में एकजुटता थी और वे हमेशा से चाहते थे कि निरंजन अपने सपने को पूरा करें, इसीलिए किसी ने भी धैर्य नहीं खोया। रिपोर्ट के मुताबिक निरंजन ने वर्ष 2004 में जवाहर नवोदय विद्यालय रेवर नवादा से मैट्रिक परीक्षा पास की।
उसके बाद उन्होंने 2006 में साइंस कॉलेज पटना से इंटर पास किया। फिर बैंक से चार लाख का लोन लेकर IIT-ISM धनबाद से माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। वर्ष 2011 में धनबाद (Dhanbad) के कोल इंडिया लिमिटेड में असिस्टेंट मैनेजर की जॉब की। परंतु ये उनके लिए सफीसियंट नही थी।
उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के विषय में सोचा उन्होंने पहली बार वर्ष 2017 में इस परीक्षा को दिया और 728 व रैंक हासिल किया, परंतु अभी उम्मीद थी कि वे और भी अच्छा कर सकती, इसलिए उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 535 में रैंक के साथ वे आईएएस के लिए चुने गए।



