
Delhi: एक कहावत है किसी भी किताब का ज्ञान उसके बाहरी पृष्ट से नहीं मापना चाहिए। इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति किसी से कम नहीं होता भले उसकी सफलता की शुरुआत छोटी होती है परंतु उसकी ऊंचाई और उसके भविष्य को आप उसके छोटे से काम से नहीं माप सकते।
व्यक्ति सफलता की सीढ़ी छोटे स्तर से चढना शुरू करता है और एक समय बाद वह उस ऊंचाई पर होता है, जिसकी शायद कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। दुनिया के हर व्यक्ति को अपना जीवन जीने के लिए एक रोजगार की जरूरत होती है, फिर चाहे वह रोजगार छोटा हो या बड़ा। एक पढ़ा लिखा व्यक्ति यदि मजदूरी करते हुए दिखता है, तो लोग उसका मजाक उड़ाने लगते हैं, परंतु वे यह नहीं जानते कि उसकी क्या मजबूरी होगी।
ईश्वर हर किसी को सब कुछ देकर नहीं भेजता। किसी किसी को स्वयं ही सब कुछ बनाना पड़ता है। कुछ ऐसी ही कहानी है एक आईएएस अधिकारी हिमांशु गुप्ता (IAS Himanshu Gupta) की, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत के लिए चाय बेची (Selling Tea) और आज वह सफल और नामचीन आईएएस अधिकारी हैं, तो चले आज हम हिमांशु के निजी जीवन के बारे में बात करते है।
हिमांशु गुप्ता की सक्सेस स्टोरी
हम बात कर रहे हैं आईएएस अधिकारी हिमांशु गुप्ता की जो उत्तराखंड (Uttrakhand) राज्य के निवासी हैं। हिमांशु गुप्ता काफी पढ़े लिखे और काफी इंटेलिजेंट स्टूडेंट रहे हैं। परंतु कुछ समय पहले उनकी परिस्थितियों में बदलाव आया और उनकी परिस्थितियां काफी विपरीत हो गई। उन परिस्थितियों में उन्हें मजबूरी में चाय भी बेचना पड़ा।
वे अपने दोस्तों से छुपते छुपाते चाय की दुकान लगाते थे। जिसमें वे उनके दोस्तो के सामने मजाक का पात्र ना बने। अपनी विकट परिस्थितियों में भी उन्होंने इन परेशानियों का हंस के सामने किया और उनके सामने कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने हमेशा से बड़े सपने ही देखें और आज उन्होंने एक चाय वाले से आईएएस अधिकारी (IAS Officer) बनने तक का सफर तय किया।
आईएएस बनने का सफर
वर्ष 2020 में हिमांशु गुप्ता ने यूपीएससी का एग्जाम दिया था जिसका रिजल्ट उनके हक में आया और वे आईएएस अधिकारी बने। इसके पहले भी हिमांशु ने वर्ष 2017 में यूपीएससी का एग्जाम (UPSC Exam) दिया था और उन्होंने क्वालीफाई भी किया, परंतु उनकी रैंक अच्छी नहीं थी और उन्हें उनके मन मुताबिक पोस्ट नहीं मिली।
#Bareilly – हिमांशु गुप्ता का यूपीएससी में हुआ चयन, उत्तराखंड कैडर के आईपीएस बने आईएएस, हिमांशु गुप्ता को देश में मिली 139 रैंक, हिमांशु गुप्ता के घर बधाई देने वालों की भीड़, बरेली के सिरौली निवासी है हिमांशु गुप्ता#UPSC #IAS #HimanshuGupta #News1Indiatweet pic.twitter.com/S0BG5EfMNp
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इसके बाद उन्होंने वर्ष 2019 में एक बार फिर परीक्षा दी और इस बार वे आईपीएस अधिकारी के लिए चुने गए थे। परंतु वे एक आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने वर्ष 2020 में एक बार फिर परीक्षा दी और इस बार उनका सपना पूरा हुआ। बोलने में काफी आसान होता है, परंतु उन्होंने अपना यह सफर काफी मुश्किलों से तय किया है, उनकी शुरूआत काफी कठिन रही।
बचपन में पिता के साथ बेची जाए
हिमांशु गुप्ता ने अपना बचपन काफी मुसीबतों से बताया है, उनके पिता एक टी स्टॉल लगाते थे। अपने पिता की मदद के लिए हिमांशु उनके साथ काम करते थे। हिमांशु के पिता का टी स्टॉल दिल्ली में था और हिमांशु अपने दोस्तों से छुपकर पिता के टी स्टॉल में चाय बनाते थे।
एक बार हिमांशु के दोस्त ने हिमांशु को चाय बनाते हुए देख लिया था, तब उसने पूरे स्कूल में हिमांशु का काफी ज्यादा मजाक बनाया। स्कूल में उसे चायवाला (Chaiwala) बोलकर परेशान करते थे।
एक समय में दोस्त कहते थे चायवाला, फिर कड़ी मेहनत करके बन गया IAS, कुछ ऐसी है हिमांशु गुप्ता की कहानी. September 04, 2022 at 01:40PM pic.twitter.com/908tx9MBNv
— National News (@nationalnewsin) September 4, 2022
एक रिपोर्ट में हिमांशु ने बताया कि उन्होंने बचपन में काफी मुश्किल परिस्थितियां देखी है, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। उनके परिवार में सभी लोग काम करते थे और मुश्किल से 400 Ru दिन कमा पाते थे, इतने ही पैसों में वे अपना परिवार पलते थे।
गरीब परिस्थितियों में पले बढ़े है हिमांशु
एक इंटरव्यू के दौरान हिमांशु गुप्ता ने बताया कि वह स्कूल जाने से पहले और स्कूल से आने के बाद अपने पिता के साथ टी स्टॉल पर काम करते थे। उन्होंने आगे बताया कि उनका स्कूल उनके घर से 35 किलोमीटर दूर था। आना जाना उनको 70 किलोमीटर पड़ता था।
घर चलाने के लिए कभी खुद ठेले पर बेची चाय, बिना कोचिंग के IAS अफसर बनने वाले हिमांशु गुप्ता के जीवन की प्रेरक कहानी
कहते हैं सफलता का असली स्वाद वही जानता है जिसने संघर्ष का कड़वापन चखा हो। अक्सर माना जाता है कि छोटे गांव के बच्चे बड़े सपने नहीं देखते। लेकिन सपने तो उन pic.twitter.com/n2z5WXP9ED
— Rijwan Ali (@RijwanA39728132) July 24, 2022
वह अपने दोस्तों के साथ एक स्कूल वैन की मदद से स्कूल जाया करते थे और वह स्कूल वैन हमेशा उनके पिता के टी स्टॉल के सामने से गुजरता था। वह अक्सर सबसे छुपकर जाते थे, परंतु एक दिन गलती से स्कूल के एक बच्चे ने उन्हें चाय बनाते हुए देख लिया, तब उस बच्चे ने पूरे स्कूल में उनका मजाक बनाया।
हिमांशु गुप्ता कहते हैं कि मेरे पिताजी कहते थे की बड़े सपनों को पूरा करना है, तो पढ़ाई करो फालतू बातों पर ध्यान मत दो मैंने उनकी बात मानी और पढ़ाई पर ध्यान दिया।



