पहाड़ों की बेटी ने अपनी इस कला के दम पर देश-विदेश में नाम कमाया, ऐपण गर्ल के नाम से फेमस हुई

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Meenakshi Khati Aipan Girl
Aipan Girl Meenakshi Khati Famous For Her Aipan Art. Uttarakhand Girl Revives Ancient Wall Art, Employs 30 Women and Trains 20,000 Children.

Ramnagar: दोस्तों हर राज्य में एक अलग ही कला देखने को मिलती है हर एक राज्य की पहचान उस राज्य की कला और संस्कृति से है। पहले के समय में लोग हस्तकला का उपयोग करके घर की साज-सज्जा को बनाए रखते थे परंतु आधुनिक युग में वे कलाएं जैसे कहीं छुप गई है। पहाड़ों में रहने वाले लोगों के बीच ऐपण कला पहले की बुजुर्गों में काफी ज्यादा प्रसिद्ध थी। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है वैसे वैसे इस कला का विलुप्तीकरण हो गया है।

उत्तराखंड जिसे देवभूमि भी कहा जाता है। यहां की संस्कृति और कला अन्य राज्यों से भिन्न है। प्राचीन समय में इस राज्य के लोग दिवाली और अन्य त्योहार में ऐपण कला (Aipan Art) से घर के आंगन कमरे दीवार पूजा घर को सजाते थे, इन कामों में आस-पड़ोस के लोगों का सहयोग भी प्राप्त होता था। परंतु यह संस्कृति और कला धीरे-धीरे गायब होने लगी, परंतु इस कला को एक बार फिर जीवंत कर रही हैं, पहाड़ों में रहने वाली मीनाक्षी। चलिए जाने मीनाक्षी के बारे में।

दूरदराज गांव से गायब है यह कला

आपको बता दें उत्तराखंड (Uttarakhand) के प्रसिद्ध शहरों से दूर पड़े गांव में भी इस कला का पलायन हो गया है। ऐसे गांव के लोग पेंटिंग से ज्यादा स्टीकर की सजावट को महत्व देने लगे हैं। लोगों का मानना है कि पेंटिंग में समय लगता है, परंतु स्टीकर चिपका कर भी घर को सुसज्जित किया जा सकता है, इसीलिए उत्तराखंड के राज्य काफी सारे गांव से संस्कृति गायब हो गई है।

Aipan Girl Meenakshi Khati

देवभूमि की इस कला को दोबारा जीवंत करने के लिए मीनाक्षी (Meenakshi Khati) ने बीड़ा उठाया है। उनका मानना है कि भले उनकी उम्र जो भी हो अनुभव कम हो, परंतु यदि उनके मन में कुछ कर गुजरने की क्षमता है तो वे इस कला को दोबारा जीवंत कर पाएंगे। इसी के साथ उन्होंने अपना काम शुरू किया और वे काफी जल्दी सफल भी हुई। नहीं नहीं आज लोग उन्हें ऐपण गर्ल के नाम से जानते हैं।

मीनाक्षी खाती का संक्षिप्त परिचय

ऐपण गर्ल (Aipan Girl) के नाम से मशहूर मीनाक्षी खाती उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के अंतर्गत आने वाला ताड़ीखेत इलाके के मेहलखंड गांव की रहने वाली है। गांव में उन्होंने अपना काफी समय बिताया है उसके बाद वे अपने परिवार के साथ रामनगर में रहने लगी, रामनगर से वे ग्रेजुएशन कर रही है साथ में ऐपणकला को प्रमोट कर रही हैं।

मीनाक्षी बताती है कि जब छोटी थी, तो अपनी मां और दादी को ऐपण बनाते हुए देखा करती थी। उन्हें ऐपण बनाना बेहद पसंद था। इसी लिए उनकी दादी और मां उन्हें ऐपण बनाना सिखाती थी। मीनाक्षी ने अपनी दादी और मां के कारण ऐपण कला के बारे में विस्तार से जानने को मिला और उन्होंने उसे भली-भांति सीखा भी। वे इस कला में निपुण हो गई आज भी इसी कला का प्रदर्शन कर रही हैं।

ऐपण कला को बनाए रखने के लिए किया प्रयास

मीनाक्षी बताती है कि जब राज्य से ऐपण कला का विलोपन होने लगा तो उन्होंने इस कला को बनाए रखने के लिए एक परियोजना बनाई जिसका नाम मीनाकृति था। इस परियोजना को इतनी सफलता मिली कि उनका काम काफी ज्यादा प्रसिद्ध हो गया और वे मीनाक्षी से ऐपण गर्ल के नाम से जानी जाने लगी।

Meenakshi Khati Aipan Girl

मीना कृति परियोजना ने न केवल देश को बल्कि विदेश के लोगों को भी अपनी तरफ आकर्षित किया। बताया जा रहा है कि कुछ ही समय पहले मीनाक्षी ने विभाग की मदद से ऐपण कला का प्रदर्शन किया और उसे लोगों के सामने प्रदर्शित किया। लोगों को उनकी यह कला काफी पसंद आई।

महिला मातृशक्ति से सम्मानित हुई मीनाक्षी

बताया जा रहा है कि इस परियोजना के चलते मीनाक्षी को महिला मातृ शक्ति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। इस पुरस्कार ने पूरे राजस्थान को गौरवान्वित किया है। मीनाक्षी का मानना है कि यदि वह आज मेहनत करके ऐपण कला को आज के समय में ले आएंगे तो आने वाली युवा पीढ़ी भी इस कला के बारे में जान सकेगी और उसे आगे बढ़ा सकेगी।

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