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Jabalpur: दालों में अरहर और मसाला फसलों में हल्दी का अपना एक अलग महत्वपूर्ण स्थान है। अरहर दाल और हल्दी अपने पीले रंग व गुणों के कारण भारतीय मसालों के रूप में भोजन बनाने में उपयोग में लाई जाती है। इसके अलावा कोई भी मांगलिक कार्य हो, उसमें हल्दी का इस्तेमाल करना बेहद शुभ माना जाता है।
हल्दी का उपयोग कहने के साथ भगवान के पूजन में किया जाता है। इसके अलावा हल्दी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं, जिससे इसका उपयोग घरेलू रोगोपचार में भी किया जाता है। आयुर्वेद में तो इसे औषधी के रूप में उपयोग में लाया जाता है। इस प्रकार हल्दी बहुपयोगी फसल है।
इसका यदि व्यावसायिक रूप से इसका उत्पादन किया जाए तो हल्दी की फसल से अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। जिस प्रकार देश की और दुनिया की आबादी बढ़ रही है। उसी प्रकार हमें कृषि में उत्पादन भी बढ़ाना पड़ेगा अगर उत्पादन ना बढ़ाया गया, तो एक समय भुखमरी का भी आ सकता है। उस दौर को ध्यान में रखते हुए हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने एक तोड़ निकाला है। वह है सहफसली प्रणाली या इंटर क्रॉपिंग खेती (Mixed Cropping)।
खेती एक ऐसा क्षेत्र जहां भारत की कुल आबादी का 60 प्रतिशत लोगों का आय का स्रोत है। वह किसी ना किसी तरीके से खेती से जुड़े हुए हैं, लेकिन आज के युवा खेती को छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। लेकिन हम एक ऐसी तकनीक लाए हैं, जिससे किसान अपनी आमदनी दोगुनी कर सकता है।
इंटरक्रॉपिंग फार्मिंग (Inter Cropping Farming) को जानें
इंटरक्रॉपिंग फार्मिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हम दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ ले सकते हैं, इंटरक्रॉपिंग को सहफसली कहते हैं, कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ इंटर कॉपिंग बताए हैं। जिन्हें आप फॉलो करके अपनी आमदनी को बढ़ा (Increase Income) सकते हैं।

जैसे अरहर (Tur) के साथ हल्दी (Turmeric), अरहर के साथ अदरक, सहजन (Seepage) के साथ हल्दी, सहजन के साथ अदरक, पपीते (Papayas) के साथ अदरक, पपीते के साथ हल्दी। ऐसे खेती करने से आपको अपनी आय दोगुनी (Income Double) करने में मदद मिलेगी।
Mixed cropping has quite a few advantages like better soil quality, incidence of disease is less, increased crop yield, chances of crop failure are reduced etc.#farmers #mixedcropping #india pic.twitter.com/f9BkfQaevP
— Anarde Foundation (@anardeindia) January 24, 2022
देश में कई जगह देखा गया है कि लोग अरहर के साथ ज्वार वो देते हैं, ज्वार की फसल पक जाने पर वह काट ली जाती है और अरहर (Arahar) की फसल को खड़ा रहने दिया जाता है। लेकिन हम उससे कमाई ज्यादा नहीं कर पाते। परंतु इसी फसल चक्र के जगह पर जो ऊपर फसल चक्र दिए हैं।
उन्हें अपना कर हम ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। उसमें अरहर के साथ हल्दी या अदरक, पपीते के साथ हल्दी अदरक, सहजन के साथ हल्दी या अदरक। इस आधुनिक तरीके से किसान का खेती में जोखिम कम भी हो जाता है और आमदनी दोगुनी हो जाती है।
छाया में ज्यादा उत्पादन देती है हल्दी
हल्दी का उत्पादन (Turmeric Production) हम छायादार माहौल में आसानी से ले सकते हैं हल्दी, हल्दी का प्रयोग हमारे जीवन में मसाले, एंटीबायोटिक, औषधि व फेस पैक में किया जाता है। अरहर की जड़ वायुमंडल से नाइट्रोजन को शोखकर जमीन में उर्वरा शक्ति बढ़ाती है। जिससे हल्दी का उत्पादन बढ़ जाता है। दोनों फसलों को एक साथ लेने से कमाई दोगुनी हो जाती है।
Success Story: Mixed-Cropping in Coconut Gardens leads to a successful Venture.https://t.co/d4tuS2Toe2#ICAR #aatmanirbharkrishi @PMOIndia @nstomar @KailashBaytu @ShobhaBJP @AgriGoI @Dept_of_AHD @PIB_India pic.twitter.com/qwA8DwPnMI
— Indian Council of Agricultural Research. (@icarindia) January 24, 2022
अरहर का उत्पादन (Tur Production) भारत में सबसे अधिक मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में होता है। वहां अरहर का उत्पादन 10 से 12 कुंटल प्रति हेक्टेयर हो जाता है। वही हम सहफसली प्रणाली अपनाएं, तो उत्पादन 16 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का प्राप्त कर सकते हैं। जिससे किसान की कमाई और कम जगह में ज्यादा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। जिससे आने वाले समय में सभी लोगों की अनाज की मांग को पूरा किया जा सकता है।




