ऑटो ड्राइवर पिता और मजदूर माँ का बेटा फीस भरने के लिए वेटर बना, अब मेहनत करके IAS अफसर बना

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IAS Ansar Shaikh success story
Ansar Shaikh Son of the auto driver becomes India's youngest IAS officer. Youngest IAS Officer Of India Ansar Shaikh success story in Hindi.

File Photo Credits: Twitter

Marathwada: अभी तक हमनें बहुत से आईएएस अफसर कि मॉटीवेशनल कहानियॉं सुनी है। लेकिन आज हम जिस व्‍यक्‍ति की बात कर रहें है, वह आज के युवाओं के लिये एक प्रेरणा बन चुके है। उनकी मेहनत और लगन आज के युवाओं के लिये एक ऐसा उदाहरण बन चुकी है। जो बहुत से युवाओं के लिए मार्गदर्शन कर रही है।

उन्‍होंने यह साबित कर दिया, कि इन्‍सान में अगर लगन और जज्‍बा हो तो वह अपनी मेहनत से क्‍या हासिल नहीं कर सकता। अपनी कड़ी मेहनत और परिश्रम से हम जो चाहे वह हासिल कर सकते है। चाहे हमारे घर में कितनी भी बड़ी परेशानी हो। अगर हम चाहे तो उन परेशानियों के बीच में भी अपने लक्ष्‍य को हासिल कर सकते है।

आज हम बात कर रहें है, अंसार शेख (IAS Ansar Shaikh) कि जिन्‍होंने वह मुकाम हासिल किया है, जिसे हासिल करना आज के हर युवा का सपना होता है। अंसार जो कि एक गरीब फेमिली से थे। उनके घर में बहुत सी चीजों का आभाव था। इतनी समस्‍यायें होने के बावजूद भी अंसार शेख आईएएस अफसर बने। अपनी जिंदगी के हालातों से लड़ते हुये उनका यह मुकाम हासिल करना बहुत ही सराहनीय है। आज हम उनके जीवन संघर्ष के बारे में जानेंगे।

अंसार कि शुरूआती जिंदगी

अंसार का जन्‍म महाराष्‍ट्र (Maharastra) के मराठवाड़ा (Marathwada) इलाके के शेलगांव में हुआ था। उनके पिता युनुस शेख ऑटो ड्राइवर (Auto Driver) थे और उनकी मॉं खेतों में मजदूरी किया करती थी। पिता कि शराब पीने की बुरी लत होने के कारण अंसार को बचपन से ही कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता था।

अंसार के पिता जी ने 4 शादियॉं कि जिसके कारण उनके परिवार में बहुत ज्‍यादा सदस्‍य थे। जिस वजह से घर में पैसों और राशन कि किल्‍लत होती थी। अंसार कि बहनों की शादी 15 साल की कम उम्र में ही शादी हो गई थी। भाई छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर चाचा के गैराज में काम करने लगा था। क्‍योंकि उनके घर कि हालात स्थिति सही नही थी।

घर में सहारा देने के लिये उनके भाई ने पढ़ाई छोड़ दी थी। अंसार का मानना है, कि उनके भाई कि कडी मेहनत और त्‍याग कि वजह से ही वह यह मुकाम हासिल कर सकें है। क्‍योंकि अगर उन्‍होंने सपोर्ट नहीं किया होता तो वह कॉलेज में भी एडमिशन नहीं ले पाते।

अंसार जब चौथी कक्षा में थे, तब रिश्‍तेदारों ने उनके पिता पर उनकी पढ़ाई छुड़वाने का दबाब डाला था। जिस वजह से उनके पिता जी उनकी पढ़ाई छुडवाने के लिये उनके शिक्षक के पास पहुँच गये थे। लेकिन अंसार जी के शिक्षक को उनकी काबिलियत के बारे में पहले से ही एहसास हो गया था। इसलिये उन्‍होंने अंसार के पिता जी से बात कि और अंसार कि काबिलियत के बारे में उन्‍हें बताया। तो उनके पिता जी ने शिक्षक की बात मानते हुये अंसार को कभी स्‍कूल से ना निकालने कि कसम खा ली।

अंसार ने 12वी कि परीक्षा में 91 फीसदी अंक हासिल किये थे। जिसे देख कर उनके पिता जी को एहसास हो गया था उनका बेटा एक दिन उनका नाम जरूर रोशन करेगा। लेकिन घर में पैसों का बहुत ही आभाव था। उनके पिता केवल 150 रूपये ही एक दिन में कमा पाते थे। ऐसे में अंसार कि पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिये संभव नहीं था।

कॉलेज की फीस जमा करने के लिए की वेटर की नौकरी

12 वी परीक्षा पास करने के बाद अंसार ने पुणे के फर्गुसन कॉलेज में एडमिशन ले लिया। लेकिन पढ़ाई को चालू रखने के लिए और कॉलेज की फीस भरने के लिये उनके पास पैसे नहीं थे। तब उनके भाई ने उनकी मदद की थी। उसके साथ ही उन्‍होंने वेटर का काम करना चालू कर दिया उस समय उन्‍हें तीन हजार रूपय सैलरी मिलती थी। लेकिन वह इस काम से खुश थे, क्‍योंकि वह अपनी पढ़ाई का खर्चा खुद से ही उठा पा रहे थे।

कॉलेज के पहले साल में ही एक प्रोफेसर ने उन्‍हें यूपीएससी की परीक्षा कि तैयारी करने कि सलाह दी थी। उनकी बात को मानते हुये अंसार ने यूपीएससी कि कोचिंग करने का फैसला किया। लेकिन अंसार के पास पैसों कि तंगी होने कि वजह से वह पूरी फीस भरने में असमर्थ थे। तब अंसार ने कोचिंग के हेड से इस बारे में बात की। हेड एक ही मुलाकात में अंसार कि काबिलियत के बारे में जाने गये थे। उन्‍होंने अंसार से कोचिंग की आधी फीस माफ कर दी।

अंसार बताते है, कि वह कोचिंग क्‍लास में सबसे छोटे थे। लेकिन वह सिर्फ अपने लक्ष्‍य पर ही ध्‍यान दिया करते थे। उनके सवाल पूछने पर बहुत से लोग उनका मजाक भी उड़ाते थे। लेकिन अंसार उनकी बातों पर ध्‍यान न देते हुये केवल अपने लक्ष्‍य के बारे में सोचा करते थे।

भेदभाव का करना पड़ा था सामना

अंसार बताते है, कि पुणे मे पढ़ाई करने के दौरान उन्‍हें पीजी कि पढ़ाई के समय उन्‍हें बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा था। वह बताते हे, कि उन्‍हें भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसकी वजह से उन्‍हें अपनी पहचान छुपानी पड़ी थी।

पुणे में पढ़ाई के दोरान उन्‍होंनें अपना नाम शुभम बताया था। तब जाकर उन्‍हें पीजी में एडमिशन मिला था। अब अंसार शेख कॉन्‍फिडेंस से कहते है, कि अब उन्‍हें अपनी पहचान नहीं छिपानी पड़ती है। अब उनका नाम ही उनकी पहचान बन चुका है।

कम उम्र में ही पास की यूपीएससी कि परीक्षा

अंसार का नाम उन चुनिंदा आईएएस अफसरों (IAS Officers) कि लिस्‍ट में नाम हो चुका है। जो कम उम्र में ही मुकाम हासिल कर लेते है। केवल 21 वर्ष कि उम्र में ही अंसार ने सिविल सेवा कि परीक्षा पास कर ली। अंसार ने यह मुकाम अपनी लगन और कड़ी मेहनत के दम पर हासिल किया।

वह बताते है कि उनके पास नोट्स और किताबें खरीदने के पैसे नहीं होने पर दोस्‍तों से नोट्स लेकर फोटोकॉपी कराके, उन्‍होंने पढ़ाई की। वह हर दिन 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे। अपने परिश्रम के दम पर उन्‍होंने 2015 में अपने पहले ही अटेम्‍पट में 361 वी रैंक (361 Rank in UPSC) हासिल कर ली और आईएएस ऑफीसर बन गये।

अंसार कि कड़ी मेहनत और कुछ हासिल करने के जज्‍बे को हम सलाम करते है। करोड़ो युवाओं के लिये वह एक रोल मॅाडल बन गये। आज युवा उनकी ही तरह मुकाम हासिल करने के लिए मेहनत कर रहे है। हमें विश्‍वास है कि उनके दिखाये रास्‍ते में चलकर युवा अपना लक्ष्‍य हासिल कर पायेंगे। उनकी इस उपलब्धि पर हम उन्‍हें बधाई देते है।

अंसार उन युवाओं के लिये प्रेरणा बन गये है, जो कि आर्थिक रूप से कमजोर रहते है और समाज में पिछड़े होने कि वजह से उन्‍हें कई तरह कि कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अंसार ने ना केवल मुश्‍किल परिस्‍थितियों का सामना किया, बल्‍कि अपनी मेहनत और लगन से अपने लक्ष्‍य को भी हासिल कर लिया।

उन्‍होंने यह साबित कर दिया कि अगर आप में लगन और जज्‍बा हो कुछ कर दिखाने कि तो आप हर परिस्थिति से लड़ कर अपना मुकाम हासिल कर सकते है। आईएएस अंसार शेख कहते है कि आपको खुद से सवाल करना चाहिए कि आप क्‍यों इस सिस्‍टम में जाना चाहते है आप खुद से कॉम्‍पीटिशन करें मेहनत और लगन से हर सफलता हसिल की जा सकती है।

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