चीन की भारत के खिलाफ शर्मनाक हरकत, WHO को पिट्टू बनाकर भारत के खिलाफ लगाया, देखें

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Photo Credits: WHO Chief Image From Reuters and Map From Twitter

Delhi: पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। इस विकत परिस्थिती में WHO चीन का साथ देने में लगा हुआ है। पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। इस विकत परिस्थिती में WHO चीन का साथ देने में लगा हुआ है। WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) ने भारत के नक़्शे के साथ हेराफेरी करते हुए लद्दाख को चीन का भाग दिखा दिया है।

WHO की ऑफिसियल वेबसाइट पर पूरे अक्साई चीन को ही चीन का हिस्सा बता दिया गया जबकि अक्साई चीन हैरत का हिस्सा है जो 1962 में चीन इ धोके से कब्ज़ा कर लिया था। परन्तु जम्मू कश्मीर और लदाख तो भी भी पूर्णतः भारत का हिस्सा है और हैरत कब्ज़े में है और ये दोनों धारा 370 हटने के बाद से अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश हैं। परन्तु लद्दाख को भी चीन का हिस्सा बता दिया गया है।

भारत के खिलाफ चीन और WHO का षड्यंत्र

यह भारत के खिलाफ चीन और WHO का षड्यंत्र बताया जा रहा है। इससे पहले भी UN के कई नक्शों में जम्मू कश्मीर को विवादित स्थान बताया था, जिस पर भारत ने आपत्ति जताई थी। लेकिन, ये पहली बार है, परन्तु अभी तो हद्द ही पार हो गई है WHO ने इस नक़्शे में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग रंग में दिखा दिया है, और बचे हुए भारत के नक़्शे को अलग रंग में बता दिया। आपको बता दे की 1932 तक चीन नीचे दिए गए नक़्शे जितना था और फिर अपनी हड़प निति के तहत तिब्बत पर कब्ज़ा करने के बाद अब चीन की टेढ़ी नज़र भारत के लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश पर है।

भारत, पाकिस्तान और भूटान में भारतीय राजदूत रह चुके गौतम बम्बावाले ने बताया कि WHO ने जो भारत का नक्शा दिखाया है, वो UN के ‘स्टैण्डर्ड नक़्शे’ से काफ़ी अलग है। इस फ़र्ज़ी नक़्शे में गलत दिखाया गया है, जिस भाग में चीन का अवैध कब्ज़ा नहीं है, उन्हें भी भारत का भाग नहीं दिखाया गया है।

चीन अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत बताया था

उन्होंने इस कृत्य को विचित्र, गलत और चौंका देने वाला करार दिया। इससे पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपने देश का हिस्सा बता दिया था। चीन अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत का एक भाग मानता है। उसने ‘स्काई मैप’ को अपडेट कर के ऐसा किया था। WHO अब चीन का पिट्टू बन गया है। यह अब चीन के इशारे पर किया जा रहा है।

उधर चीन और WHO के चलते अमरीका में भी भौकाल आये पड़ा है। अमेरिका में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की फंडिंग रोकने के मामले में सियासत शुरू हो गई है। अमेरिका की विदेश मामलों की समिति ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के उस फैसले की जांच शुरू कर दिया है, जिसके तहत डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने का ऐलान किया गया था।

WHO की फंडिंग रोकने पर अपने ही देश में घिरे डोनाल्ड ट्रम्प

इस समिति के अध्‍यक्ष एलियट एंगेल ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को लिख पत्र में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के वैश्विक महामारी के बीच में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लिए फंडिंग रोकने का निर्णय उल्टा है। यह फैसला दुनिया की जान को जोखिम में डालता है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने WHO की फंडिंग रोकी थी, इसे लेकर अमरीका में कहा जा रहा है की डब्ल्यूएचओ ने प्रसार को धीमा करने और महामारी के वक्र को कम करने में मदद करने के लिए अमूल्य प्रयास किए हैं। उन्‍होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ पर हमला करना उचित नहीं है इससे कोरोना महामारी की स्थिति और भी विकट हो जाएगी। डब्ल्यूएचओ कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एक प्रमुख उपकरण है। परन्तु कुछ लोग WHO को चीन पिट्टू भी बता रहे है।

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