
File Image
Delhi: ऊर्जा राज्य (Energy State) के नाम से पहचान रखने वाले हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में एक परिवार ऐसा भी है, जो 30 वर्षों से बिना बिजली के ही जिंदगी गुजार रहा है। इस परिवार के पास बिजली का कनेक्शन लेने के बदले जमा होने वाली सिक्योरिटी तक के लिए पैसे नहीं हैं। 30 वर्षों से जिस गरीब परिवार के घर पर अंधेरा छाया हुआ था, उसका घर सिर्फ तीन दिनों में रोशन हो गया।
जिला के द्रंग क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत टिहरी के तांदी गांव (Tandi Village Tehri) के किशन चंद के घर पर 30 वर्षों के बाद बिजली का मीटर (Electricity Meter) लग गया है। तीन दिन पहले यह मामला मीडिया के माध्यम से उजागर हुआ था। विद्युत विभाग को भी मीडिया के माध्यम से ही मामले की जानकारी मिली थी। उसके बाद विभाग ने तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करते हुए तीन दिनों के भीतर किशन चंद के घर तक बिजली पहुंचाने के लिए दो खंभे गाड़े और लाईन बिछाकर बिजली का कनेक्शन (Electricity Connection) मुहैया करवा दिया।
परिवार अंधेरे में ही जीने को मजबूर था
दरअसल किशन चंद का परिवार इतना गरीब है कि उनके पास बिजली कनेक्शन की सिक्योरिटी तक जमा करवाने के लिए पैसे नहीं थे और न ही इस परिवार की आय इतनी है कि हर महीने का बिजली बिल दे सकें। इसी डर से यह परिवार अंधेरे में अपना जीवन यापन कर रहा था। विद्युत विभाग और दानी सज्जनों के सहयोग से अब किशन चंद के घर तक बिजली का कनेक्शन पहुंचा दिया गया है।
पक्का घर मुहैया करवाने की सिफारिश
वहीं न्यू लाईफ लाईन संस्था के संस्थापक डा आनंद कागरा ने बताया कि उनकी संस्था ने हर महीने बिजली के बिल (Electricity Bill) की अदायगी करने का बीड़ा उठा लिया है। वहीं एक ठेकेदार ने किशन चंद को अपने पास नौकरी देने की पेशकश भी कर दी है। किशन चंद ने इन सभी का आभार जताते हुए सरकार से अब पक्का घर मुहैया करवाने की गुहार लगाई है।
सरकार का दावा हुआ फेल
हालांकि सरकार का दावा है कि प्रदेश में कोई भी घर बिना बिजली के नहीं है, लेकिन यहां कहानी कुछ और ही है। सरकार के दावे केवल कागजो तक ही सीमित रह जाते है। कागज बनकर ही सिमट जाते है। कोई इनको देखता भी नही जब बात गरीब परिवार की आई तो ये मुंह फेर लेते है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि ये सिक्योरिटी Security भी जमा नही करवा सकते।
परिवार की मुखिया 71 वर्षीय दोपाली देवी ने बताया कि उन्हें बताया गया कि सिक्योरिटी के लिए 3 से 4 हजार रूपए जमा करवाने होंगे, जिसके डर से उन्होंने कनेक्शन नहीं लिया। उनके बेटे किशन चंद ने बताया कि बिजली कनेक्शन (Electricity Connection) के लिए आज तक उनकी किसी ने कोई सहयता नहीं की यहां तक की पंचायत ने भी नहीं उनकी कोई बात नही सुनी। उनकी शिकायत केवल कागज में ही सिमट कर राह जाती थी।
गरीबी ने किया मजबूर
किशन चंद (Kishan Chand) के परिवार में चार लोग हैं। जिसमें 71 वर्षीय बूढ़ी मां, एक दिव्यांग बेटी और एक बेटा है। पत्नी का काफी समय पहले देहांत हो चुका है। बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ है और बेटा भी गरीबी के कारण आगे नहीं शिक्षा नही पा सका है। गरीबी ऐसी बीमारी है, जो किसी को सुख से जीने नही देती है। हर पल उसे गरीबी का अहसास कराती रहती है।
किशन चंद ने बताया कि 30 साल पहले उसके पिता को पंचायत (Panchayat) की तरफ से घर बनाने के लिए जो पैसे मिले थे, उससे उस समय कच्चा मकान बनाया था और उसी में यह परिवार जीवन गुजार रहे है। पंचायत की तरफ से कुछ समय पहले शौचालय निर्माण करके दिया गया है, लेकिन पक्के मकान के लिए पैसा नहीं मिल पाया है। परिवार बीपीएल श्रेणी में सम्मिलित है।
मुख्यमंत्री रोशनी योजना ने किया रोशन
वहीं क्षेत्र के बीडीसी सदस्य परमा नंद ने सरकार से गुहार लगाई है कि परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए बिजली का कनेक्शन निशुल्क मुहैया करवाया जाए और पक्के घर के लिए भी जल्द पैसा दिया जाए। 30 सालों से अंधेरे में जीवन गुजार रहे किशन के घर किसी भी सरकार ने ध्यान नही दिया। गरीबी के चलते वो अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर थे।
वहीं जब इस बारे में विद्युत विभाग (Electrical Department) के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता ई मनोज पूरी से वार्तालाप की गई, तो उन्होंने बताया कि Media के जरिये ये यह मामला उनके जहन में आया है। परिवार को जल्द ही बिजली की कनेक्शन दिलाया जाएगा और विभाग उक्त परिवार की हर संभव सहयता की जाएगी।
सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए मुख्यमंत्री रोशनी योजना चला रखी है और इस योजना के तहत इस परिवार को कनेक्शन मुहैया करवाया जाएगा। बिजली विभाग और दानी सज्जनों के सहयोग से गरीब परिवार के घर रोशनी पहुंची। घर पर बिजली पहुंचते ही नम हुई 71 वर्षीय बुजुर्ग की आंखें। बुजुर्ग ने सभी का जताया आभार।



