पशु चराने वाले का लड़का 12 सरकारी नौकरी छोड़ गोल्ड मेडल पाकर बना IPS अधिकारी, माँ बाप को किया सैलूट

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IPS Premsukh Delu Story
IPS Premsukh Delu Biography and Story in Hindi. Success story of IPS Officer Premsukh Delu from Rajasthan. Inspirational story of IPS officer Struggle: Ek Number News

File Photo Credits: Twitter

Bikaner, Rajasthan: अगर आप शांत मन से होकर मेहनत करते हैं, तो आपकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो आप आसानी से सफलता पा सकते हैं। कभी भी सफलता अमीरी गरीबी को नही देखती। आपके मजबूत इरादे आने वाली मुश्किलों से लड़ने की ताकत देती हैं। बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि आप कड़ी मेहनत करते रहें।

कहते है ना कि जब इरादा कुछ बड़ा करने का हो और उसके दृढ़ संकल्प भी गहरा, हो तो फिर कोई चीज आपको आपका मुकाम हासिल करने से नहीं रोक सकती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है IPS प्रेमसुख डेलू ने। राजस्थान के एक छोटे से गाँव में जन्में प्रेमसुख डेलू की कहानी (Story) आज लाखों युवाओं के सामने एक मिसाल है। मजबूत इरादें और लक्ष्य प्राप्त करने से पहले हार ना मानने का उनके जुनून ने अपनी मंजिल से मिलवाया है।

आपने गांवों में जंगली-जानवर चराने वाले गरीब बच्चों को देखा होगा। ये दिनभर मवेशियों को चराकर परिवार के लिए रोजी-रोटी जुटाने में मदद करते हैं। पर इन मासूमों के भी आंखों में सपने होते हैं। ऐसे ही राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के गांव रासीसर के एक गरीब लड़के का भी सरकारी नौकरी (Government Job) का सपना (Dream) था।

उसकी सरकारी नौकरी लगी भी। एक दो नहीं बल्कि 12 बार वो सरकारी नोकरी मिली लेखों सपना कुछ और ही था। देश की सेवा का जुनून ने उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आज हम आपको प्रेमसुख डेलू (IPS Premsukh Delu) के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने एक किसान के घर में पैदा होकर खेती किसानी से लेकर ऊंट गाड़ी चलाई। ऐसे हालातों पर ज्यादतर लोग सफल नहीं हो पाते हैं लेकिन अपनी मेहनत और जुनून से उन्होंने सफलता अपने नाम की।

कहा हुआ जन्म

IPS ऑफिसर प्रेमसुख डेलू का जन्म 3 अप्रेल 1988 को राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के रासीसर नामक गाँव में हुआ था। प्रेमसुख अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। प्रेमसुख के पिता एक किसान है, लेकिन उनके पास इतनी जमीन नहीं थी कि घर का गुजारा अच्छे से हो पाए। गरीबी ने उनको कमजोर बना दिया था। उतने पैसे में परिवार का पालन पोषण सम्भव नही था। इसलिए उनके पिता आय बढ़ाने के लिए ऊंटगाड़ी चलाते थे।

परिस्थिति ने बनाया मजबूत जन्म

छोटे से गांव का यह लड़का कामयाबी की सीढ़ियां दर सीढ़ियां चढ़ चुका है। हालांकि वह भी एक समय था जब स्कूल जाने के लिए उसके पास पेंट भी नहीं थी और आठवीं क्लास तक निक्कर पहन कर जाता था। लेकिन जिंदगी के इन्हीं अभावों ने उन्हें अंदर से मजबूत कर दिया। संसाधनों की कमी ने उनको बहुत मजबूत बना दिया था। इस परिस्थिति में हर कोई टूट जाता हार मान लेता है, लेकिन डेलू ने परिस्थिति से लड़ते हुए खुद को मजबूत बनाया।

डेलू (Premsukh Delu) ने बताया कि मैं गांव में रहता था, खेती करता था, मवेशियों को चराता था। लेकिन जब भी समय मिला चाहे खेती की रखवाली करते हुए या फिर मवेशियों की चराई के साथ, पढ़ाई करने बैठ जाता था। कभी भी समय को व्यर्थ नही जाने दिया। हर समय अपने अपको पढ़ाई (Study) की ओर अग्रसर किया।

मेरे लिए खोने के लिए कुछ भी नहीं था, लेकिन मुझे पता था कि यहां से आगे जाने की, बड़ा बनने का सपना सम्भव तो नही है, लेकिन कोशिश की जा सकती है। मेरी शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई मेरे माता-पिता, गरीबी के चलते मेरी बड़ी बहन ज्यादा शिक्षा प्राप्त नही कर पाये है। मेरे पिता ऊंट चराते थे। जब मैं छठी कक्षा में पहुंचा तब अंग्रेजी सीखना शुरू किया था।

लोग कहते थे कि सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) और हिंदी माध्यम के साथ सफलता प्राप्त करना इतना आसान नहीं है। तब मैंने सोचा मेरे पास संसाधनों की कमी है। लेकिन सपना देखने पर तो कोई प्रतिबंध नहीं है। सपना तो देख सकते है। उनको पूरा करने की कोशिश भी कर सकते है। सफलता मिले या ना मिले ये तो किस्मत की बात है। लेकिन कोशिश करने से कभी पीछे नही हटना चाहिए। असफलता ही आपकी सफलता की सीढ़ियां होती है। धैर्य रखकर उनपर चढ़कर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

बचपन का सपना साकार करने निकल पड़ा

मैंने बचपन से ही सिविल सेवा (Civil Service) में करियर बनाने के बारे में सोचा था। मैं अपने आपको हर समय पढ़ाई में बिजी रखता था। तब मेरे एक टीचर ने मुझे सलाह दी, मुझे अभी कई कठिन रास्तो चलना है, पढ़ाई के साथ हेल्थ का भी ध्यान रखना चाहिए।

एक बड़े संयुक्त परिवार के लिए हमारे पास छोटी सी खेती का टुकड़ा था। परिवार में केवल कमाने वाले सदस्य मेरे बड़े भाई जो कॉन्स्टेबल (राजस्थान पुलिस) में हैं। एक कॉन्स्टेबल की सैलरी इतनी नही होती है जिससे बड़े परिवार का अच्छे से गुजरा हो सके। उनकी जरूरतों को पूरा करने और सामाजिक दायित्वों को निभाते जीवन कितना मुश्किल भरा रहा होगा।

सफलता की सीढ़ी

प्रेमसुख डेलू की कामयाबी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 6 साल में यह 12 बार सरकारी नौकरी में सफल हुए। गुजरात कैडर के IPS प्रेमसुख डेलू ने पटवारी (Patwari) से लेकर IPS बनने का रास्ता तय किया। आर्थिक तंगी के चलते कठीन तो बहुत आई, लेकिन कभी हार नही मानी। अपने आपको हर समय मजबूत बनाये रखा। अपनी गरीबी से लड़ते हुए आगे बढ़ता चला गया।

इनकी सरकारी नौकरी लगने का सिलसिला साल 2016 में शुरू हुआ। सबसे पहले सरकारी नौकरी बीकानेर जिले में पटवारी के रूप में लगी। 2 साल तक बतौर पटवारी की पोस्ट पर काम किया। मगर दिल में कुछ बड़ा करने की चाह थी इसलिए पढ़ाई और मेहनत जारी रखी। प्रेमसुख डेलू ने पटवारी पद पर रहते हुए कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं दी। उनमें भी सफलता (Success) मिली, लेकिन मंजिल अभी भी अधूरी थी। सपना तो कुछ और ही था।

उन्होंने ग्रामसेवक परीक्षा में राजस्थान में दूसरी रैंक हासिल की। मगर ग्रामसेवक पोस्ट को Join नहीं किया, क्योंकि इसी दौरान राजस्थान असिस्टेंट जेल परीक्षा का रिजल्ट आ गया और इसमें प्रेमसुख डेलू ने पूरे राजस्थान में Top किया। असिस्टेंट जेलर के रूप में ज्वाइन करते उससे पहले राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर Post पर चयन हो गया।

प्रेमसुख डेलू ने राजस्थान पुलिस में SI के पद पर ज्वाइन नहीं किया, क्योंकि इसी दौरान उनका स्कूल व्याख्याता के रूप में चयन हो गया तो पुलिस महकमे के बजाय शिक्षा विभाग की नौकरी को चुना। इसके बाद कॉलेज व्याख्याता, तहसीलदार के रूप में भी सरकारी नौकरी लगी। जनकी सफलता की कहानी आगे चलती रही।

कई विभागों में 6 साल की मेहनत में अनेक बार सरकारी नौकरी लगने के बाद भी प्रेमसुख ने मेहनत जारी रखी और उनका सपना कुछ और ही था। मेहनत को जारी रखते हुए आगे बढ़ते चले गए। सिविल सेवा परीक्षा में 170 वां रैंक प्राप्त किया है और हिंदी माध्यम के साथ सफल उम्मीदवार में तीसरे स्थान पर रहे।

सफलता का मूलमंत्र

अलग-अलग स्तर की सरकारी नौकरी करने के दौरान प्रेमसुख को समाज को समझने में बहुत हेल्प मिली। गुजरात में आईपीएस प्रेमसुख डेलू का ख्वाब IAS बनने का भी रहा। उनकी जिंदगी न केवल राजस्थान बल्कि देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बनी है। प्रेमसुख डेलू का कहना है की पढ़ाई हमेशा जारी रखें और तब तक पीछे नहीं हटें जब तक कामयाबी हासिल नहीं हों। परिस्थिति से कभी भी डरना नही है। लोगो की बातों पर ध्यान नही देना है। अपने सपनो का पीछा करते चलो। परिस्थिति से लड़ाई खुद को ही लड़नी होगी। हिम्मत नही हारनी है। कड़ी मेहनत से अपने सपनो को पूरा कर दिखना है।

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