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Hyderabad: इस देश में भूख एक अभिशाप है। आज के दौर में भी कई लोग भूखे सोने को मजबूर है। संयुक्त राष्ट्र यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर दिन 20 करोड़ से ज्यादा लोग भूखे पेट ही सोते हैं। और इसी देश की पार्टियों और शादियों में खाना फेंका भी जाता है। शादी की पार्टी में लोग पेट भरने से ज्यादा खाना ले लेते है और पेट भर जाने पर उसे फेक देते है।
कुछ लोग हैं, जो इंसानियत को जिंदा रखे हैं। वह इन भूखे पेटों को भरने का काम कर रहे हैं। अजहर मकसूसी हैदराबाद की जानी-मानी हस्ती हैं। पिछले आठ साल से अजहर सुबह 6 बजे जाग रहे है। परिवार के साथ कुछ टाइम बिताने के बाद वह सुबह 10 बजे फतेह खान बाजार से किराने का सामान लेने अपने घर से बाहर निकलते हैं।
वह और उनकी टीम जल्द ही खाना बनाना शुरू कर देती है और दोपहर तक, सैकड़ों लोगों का भोजन बनकर तैयार हो जाता है हैदराबाद में जिन्होंने एक भी बार भोजन नहीं किया है, उनको भोजन करवाते। जब से देश में विकट परिस्थिति शुरू हुई है, विभिन्न राज्यों में स्वयंसेवकों और गैर सरकारी संगठनों सहित कई लोग प्रवासी मजदूरों, बेघर लोगों और दूसरे देश मे फंसे हुए अन्य लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं।
जरूरतमंदों को भोजन खिलाने का यह कार्य एक सम्मानजनक रहा है। शहर के दबीरपुरा फ्लाईओवर के नीचे लोगों को खाना खिलाना शुरू किए आठ साल हो चुके हैं। इन वर्षों में, काम का विस्तार हुआ है और अजहर और उनकी टीम शहर भर के कई क्षेत्रों में और यहां तक कि भारत के अन्य राज्यों में भी लगभग 1,500 लोगों को भोजन कराती है। वह रोजना 300 से 400 लोगों को खाना खिलाते हैं, वो भी मुफ्त में।
अजहर अपनी सोसायटी को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे है। उनकी संस्था सानी वेलफेयर फाउंडेशन अलग-अलग शहरों में लोगों को खाना खिलाने का काम कर रही है। यह संस्था पांच शहरों में करीबन 1500 लोगों को खाना खिलाते है। हैदराबाद में मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक 10 साल से अजहर की संस्था भूखे लोगों को खाना खिलाने का नेक काम कर रही है। ऐसे में उनको सम्मानित करके गर्व महसूस हो रहा है। यह अवार्ड समाज में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले वॉलेंटियर को दिया जाता है।
देश मे बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि लोगो के पास अपना पेट भरने के लिए भी पैसे नही है। तेजी से बढ़ते प्रतिस्पर्धा के युग में आज किसी के पास किसी के लिए वक्त नहीं है। सभी अपने कामों में बिजी है। कुछ लोग केवल अपनी कामयाबी के झंडे गाढ़ने में लगे हुए है। ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी है जो बिना भेदभाव के लोगों की सेवा करने में लगे हुए है। ऐसे लोगों में हैदराबाद के अजहर शामिल है। अजहर को अभी ब्रिटेन में कॉमनवेल्थ अवार्ड आफ लाइटिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
हैदराबाद के पुराने शहर के चंचलगुडा इलाके में जन्मे अजहर एक समय जिंदगी के कठिन पड़ाव से गुजर रहे थे। चार बरस की उम्र में पिता का साया उठ गया। पांच भाई बहनों के परिवार को पालने की जिम्मेदारी मां पर आ गई।तब परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। उन दिनों को याद करते हुए अजहर ने बताया कि नाना के यहां से सहयता मिलती थी, लेकिन उनकी और भी बहुत जिम्मेदारियां थी इसलिए कभी दिन में एक बार तो कभी दो दिन में एक बार खाने मिलता था लिहाजा भूख से उनका पुराना रिलेशन रहा।
परिवार की जिम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने 12 साल की उम्र में ग्लास फिटिंग का काम शुरू किया। उन्होंने हर परिस्थिति में अपने होसलो को मजबूत बनाये रखा। हार नही मानी आपने होसलो के दम पर आगे बढ़ते चले गए। उसके बाद कुछ साल टेलरिंग (दर्जी) का काम किया और वर्ष 2000 में तकरीबन 19 बरस की उम्र में प्लास्टर ऑफ पेरिस का काम शुरू किया, जो आज भी उनकी आजीविका का साधन है। इस दौरान उनकी विवाह हुआ और अब वह तीन बच्चों के पिता हैं।
अजहर अपनी सोसायटी को आगे बढ़ाने में अपना सहयोग दे रहे है। उनकी संस्था सानी वेलफेयर फाउंडेशन अलग-अलग शहरों में लोगों को खाना खिलाने का काम कर रही है। यह संस्था पांच शहरों में करीबन 1500 लोगों को खाना खिलाते है। अजहर कहते है कि वह परिवार के साथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकते थे। उनके परिवार वालों ने समाजसेवी कामों में उनका काफी हौसला बढ़ाया।
अजहर बताते है कि वह खुद बचपन में काफी विकट परिस्थितियों से गुजरे है। इसलिए वह लोगों की समस्या को अच्छे से समझते है। वह कहते है कि उनका लक्ष्य होता है कि किसी भी व्यक्ति को भूखा नहीं सोने दिया जाए। 10 अप्रैल को आठवां वर्ष है जब हमने गरीबों के लिए अपनी खाद्य सेवा शुरू की है। यह तब शुरू हुआ जब मैंने एक रेलवे स्टेशन पर लक्ष्मी नाम की एक बूढ़ी औरत को देखा। उसके पैर कटे हुए थे, उसके पास खाने को कुछ नहीं था, इसलिए मैंने उस दिन उसे खाना दिया।
अगले ही दिन से मैंने दबीरपुरा में ‘भूख का कोई धर्म नहीं’ के बैनर तले बेघर लोगों को खाना खिलाना शुरू कर दिया। तब से हमारा कार्यक्रम जारी है और हम सभी धर्मों के लोगों को खाना खिलाते हैं। हम इसे हैदराबाद, बेंगलुरु, रायचूर और दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों पर करते हैं। पहले, मुफ्त भोजन ज्यादातर धार्मिक स्थानों जैसे मंदिर, दरगाह या गुरुद्वारा में परोसा जाता था, लेकिन अब यह बदल गया है।
अज़हर कहते हैं, “भूख का कोई मज़हब नहीं होता।”
नई दिल्ली। हैदराबाद के अज़हर मक़सूसी ने जो अपने 'दो रोटी अभियान' के तहत रोज करीब 150 भूखे लोगों को खाना खिलाते है|
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अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों पर भोजन परोसा जा रहा है और कई बड़े लोग इस काम मे अपना सहयोग दे रहे है कई दानदाता इस काम मे आगे आए हैं। मैं इसे एक उपलब्धि मानता हूं। जब हमने शुरुआत की, तो कई वित्तीय चुनौतियां का सामना करना पड़ा था। अजहर का कहना है कि हमारा एक मध्यम वर्गीय परिवार है और हम जिप्सम प्लास्टर का बिजनेस चलाते हैं। हम विशेष रूप से दान के लिए किसी से जबर्दस्ती नहीं कर सकते हैं।
अगर लोग अपनी इक्छा से आगे आते हैं और किराने का सामान और चावल दान करते हैं, तो हम इसे स्वीकार करते हैं। ऐसे दिन थे जब मुझे लोगों को खिलाने के लिए पैसे उधार लेने पड़ते थे या कबाड़ का सामान बेचना पड़ता था लेकिन आखिरकार सोशल मीडिया के जरिए कई लोग आगे आए और हमारी मदद करने लगे।
हैदराबाद के अज़हर बिना कोई मदद पिछले 3 सालों से 100-150 लोगों मुफ्त में खाना खिला रहे हैं
उनके ज़ज़्बे को सलाम pic.twitter.com/BsieZdqdW1— राजीव अग्रवाल (@rjaggrawal) September 9, 2015
लॉकडाउन से पहले, हम अलग-अलग जगहों पर खाना बनाते और परोसते थे, और लोगों को एक साथ बैठकर खाना खिलाते थे। हालांकि, आपदा के चलते अब हम खाना पैक कर उसे खाने के पैकेट के रूप में बांट रहे हैं। हमने सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए बक्से तैयार किए हैं। जिसे भोजन की आवश्यकता होती है, वह भोजन के पैकेट लेने के लिए उन बक्सों के अंदर कतार में खड़ा हो जाता है।
आमतौर पर हम बेघर, बेसहारा और सड़कों पर भीख मांगने वालों की सेवा करते हैं। अब हम अपनी वैन में विभिन्न स्थानों पर जाकर प्रवासी मजदूरों की भी सेवा कर रहे हैं। पैकिंग में आसानी के लिए हम आपदा के दौरान चावल सब्जी दे रहे हैं। आमतौर पर, अलग-अलग जगहों पर रसोइए होते हैं जहां हम खाना परोसते हैं।
जब मेरी पहली डिश की बात आती है, तो मैंने दाल पकाना सीख लिया है और जब भी कोई रसोइया उपलब्ध नहीं होता है, मैं खाना बना लेता हूँ। मैं चिकन बिरयानी, वेजिटेबल पुलाव, टोमैटो राइस आदि बनाना जानती हूं जो मैंने धीरे-धीरे सीखी। मानव सेवा ही ईश्वर की सेवा है। मानवता सबसे महत्वपूर्ण डिग्री है जो सभी के पास अपनी अन्य डिग्री के अलावा होनी चाहिए।



