गरीबी को हराने के लिए महिला ने कैंची व उस्तरा थामा, पहले सबने किया विरोध, अब बनी सुपर हीरो

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Sukhchain Devi Barber
Sukhchain Devi is doing work as a barber in Bihar. This female Sukhchain Devi from Sitamarhi barber is breaking stereotypes after hubby loses job.

Sitamarhi: बड़े ब्यूटी पार्लर में महिला हेयर स्टाइलिश को पुरुषों के बाल काटते और शेव करते आपने कई बार देखा और सुना होगा। लेकिन इसी काम को जब गांव में कोई महिला घर-घर जाकर करने लगे फिर उसका काम कहीं मुश्किल होता है। सीतामढ़ी (Sitamarhi) जिला अंतर्गत बाजपट्टी प्रखंड की सुखचैन देवी (Sukhchain Devi) दो साल से कर रहीं नाई का काम। पति की कमाई से परिवार का खर्च नहीं चल पाने के बाद उठाया कदम। सामाजिक तानों को दरकिनार कर बिहार के सीतामढ़ी में एक महिला अपनी गरीबी को दूर करने के लिए पुरुषों के बाल और दाढ़ी बनाती है।

कौन है सीतामढ़ी

नाई परिवार में जन्मीं सुखचैन ने यह काम किसी से सीखा नहीं। मां-बाप की एकलौती संतान होने के चलते बचपन में उनके पिता जहां भी दाढ़ी-बाल बनाते जाते थे, साथ ले जाते थे। उन्हें देखते-देखते यह काम सीख लिया। बड़ी होने पर मायके में बच्चों के बाल काटने से शुरुआत की। शादी के बाद इससे नाता टूट गया। तीन बच्चों पढ़ाने और गरीबी में परिवार की मदद के लिए इसकी फिर से शुरुआत की।

पहले 15 साल की ज्योति कुमारी गुड़गांव से हजारों किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने बीमार पिता को लेकर बिहार पहुंचीं, तो उसके बाद पिता के न रहने पर बिहार की ही बेटियों ने अपनी गुल्लक तोड़कर न सिर्फ मां का अंतिम संस्कार किया, बल्कि सारे जिम्मेदारियां निभाते हुये बता दिया कि जरूरत पड़ने पर वह किसी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।

अब ऐसी ही एक महिला की साहस और हौसले की कहानी (Story) ने सबको चोंका दिया है, यह भी इन दोनों की तरह ही एक गरीब महिला है, जिसने रोजी—रोटी के संकट में एक ऐसे काम की तरफ रुख किया, जो सही मायने में मर्दों का काम माना जाता है। हम बात कर रहे हैं सीतामढ़ी की सुखचैन देवी की।

सुखचैन देवी सामाजिक तानों को दरकिनार कर पुरुषों के दाढ़ी-बाल बना रही हैं और इससे होने वाली कमाई से अपने घर का खर्च चलाने के साथ ही बुजुर्ग मां की देखभाल करती हैं। गिरीबी ऐसी चीज है जो किसी को आगे बढ़ने नही देती। इंसान हमेशा ही विकट परिस्थितियों के जाल में बिछा रहता है। जब समय की मार इंसान पर पड़ती है, तो उसमें आवाज किसी भी प्रकार की नहीं होती है, लेकिन मार झेलने वाले को पीडा अधिक होती है।

अधिकांश लोगों ने हर मोड़ पर समाज के मिथक और रूढ़िवादी बंदिशों की वेंडी को तोड़ा है। सीतामढ़ी की सुखचैन देवी (Sukhchain Devi) उनमें से एक हैं। सामाजिक तानों को दरकिनार कर वे पुरुषों के दाढ़ी-बाल बनाती हैं। इससे होने वाली कमाई से घर का खर्च चलाने के साथ बूढ़ी मां की परवरिश कर रहीं।

पिता के गुजर जाने के बाद बढ़ी जिम्मेदारी

आज के समाज में गरीबी एक अभिशाप बन चुकी है। मेहनत करके गरीबी की बेड़ियों को तोड़ा जा सकता है। 35 वर्षीय सुखचैन देवी की शादी 16 वर्ष पहले प्रखंड के पटदौरा गांव में हुई। पति रमेश चंडीगढ़ में बिजली मिस्त्री का काम करते हैं, जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल है। इस पर दो साल पहले उन्होंने पुश्तैनी काम करने की ठानी ससुराल में कोई जमीन नहीं होने और पिता के देहांत के बाद दो बेटों और एक बेटी के साथ मां की जिम्मेदारी भी उनके सिर आ गई।

बाजपट्टी प्रखंड की बररी फुलवरिया पंचायत के बसौल गांव निवासी 35 वर्षीय सुखचैन देवी (Sukhchain Devi Barber) की शादी 16 वर्ष पहले प्रखंड के पटदौरा गांव में हुई। ससुराल में कोई जमीन नहीं होने और पिता की मृत्यु हो जाने के बाद दो बेटों और एक बेटी के साथ मां की जिम्मेदारी भी उनके सिर आ गई।

प्रतिदिन करीब 200 रुपये कमा लेती

सुखचैन देवी के लिए नाई का कार्य आसान नहीं था। शुरुआत में लोग बाल-दाढ़ी बनवाने से हिचकते थे, लेकिन वह मायके में ही रहती हैं, इसलिए उन्हें बेटी और बहन कहने वाले उनसे काम करवाने लगे। अब ना ग्रामीणों और ना ही सुखचैन देवी में इस काम को लेकर कोई शर्मिंदगी नही है।

अब वो सुबह कंघा, कैंची, उस्तरा लेकर गांव में निकल पड़ती हैं। घूम-घूमकर लोगों की हजामत बनाती हैं। बुलावे पर घर भी जाती हैं। इससे प्रतिदिन करीब 200 रुपये कमा लेती हैं। इससे घर चलाने में काफी सहायता मिलती है। ऐसे में उनके अन्न खर्चे भी निकल जाते हैं और बचत भी कर पाती हैं।

शादी-ब्याह पर महिलाओं के बाल और नाखून काटने का काम किया

सुखचैन का कहना है कि पहले पास-पड़ोस में लोगों के यहां शादी-ब्याह के मौके पर महिलाओं के बाल और नाखून काटने से लेकर दूसरे काम करती थीं। धीरे-धीरे पुरुषों की हजामत करने लगी। ट्रेनिंग का मौका और साधन मिले तो ब्यूटी पार्लर खोल लूंगी। वह कहती हैं कि तीनों बच्चे अच्छी तरह से पढ़-लिख सकें, यही प्रयास है। बच्चों की अच्छी शिक्षा और परवरिश के लिए वो कोई भी काम करने से शर्माएंगी नही।

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