एक इंजीनियर सरकारी नौकरी छोड़कर तालाब में मोती उगा लाखों की कमाई कर रहे: Pearl Farming Earning

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Pearl Farming Amit Bamoriya
Manufacturer of Pearl Farming in Lake and Moti business by Amit Bamoriya from Hoshangabad Madhya Pradesh. Amit Bamoriya Moti Ki Kheti Tips.

Hoshangabad: एक कहावत है की एक इंजीनियर कुछ भी कर सकता है (An Engineer Can Do Anything)। इस कहावत को इस शख्स ने साबित भी कर दिखाया है। यह इंजीनियर पहले सरकारी नौकरी (Government Job) करते है और फिर विदेशी स्टाइल में किसानी (Farming) करके कमाल कर देते हैं। यह किसानी किसी अनाज या फसल की नहीं, बल्कि मोती की है। इस इंजीनियर ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर पत्नी के साथ मोती उगाकर कम रुपये लगाकर अधिक मुनाफा कमाने में कमाल का काम करके दिखाया है।

एक नंबर न्यूज़ (Ek Number News) की टीम ने अमित बमोरिया (Amit Bamoriya) से मुलाक़ात करके जाना की उन्होंने यह कमाल कैसे किया और इसके क्या फायदे है। अमित बमोरिया जी ने दावा किया की वे ही मध्यप्रदेश में डिजाइन मोती उगाने वाले पहले किसान है। उन्होंने केवल दो एकड़ में मोती की खेती करके यह उपलब्धि कैंसिल की है।

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के होशंगाबाद (Hoshangabad) जिले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) से सटे सोहागपुर के कामती रंगपुर गांव (Kamti Rangpur Village) में यह पूर्व सरकारी कर्मचारी और इंजीनियर अमित बमोरिया अपनी पत्नी के साथ सीपों से मोती उगाने का काम कर रहे हैै। उन्होंने खेती करने के मन के चलते पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट (PWD Department) की सरकारी नौकरी छोड़ दी और मोती की खेती (Pearl Farming) करने लगे।

उनका मोती की पैदावार करने वाला यह खेत कामती रंगपुर (Kamti Rangpur MP) के आगे घने जंगल से लगभग 4.5 किमी की सच्ची सड़क चलकर है। दो एकड़ के खेत में 6 फीट गहराई का साधारण तालाब है, जिस पर मोती खेती हो रही है।

अमित जी ने हमें बताया की वे मोती की खेती 2016 से कर रहे हैं और इस काम का आईडिया उन्हें सोशल मीडिया पर चीन के लोगो की मोती फार्मिंग (Pearls Farming) देखकर मिला था। सबसे पहले 30 हजार की लागत से शुरू किये गए काम में उन्हें एक लाख का मुनाफा हुआ।

सामान्य से तालाब में मोती (Pearl Farming In Lake) ऊगा दिए

अमित बमोरिया (Amit Bamoriya) ने सामान्य से तालाब में मोती (Talab Main Moti) ऊगा दिए। अमित को मध्य प्रदेश में पहली मोती की खेती करने वाला किसान माना गया। सबसे पहले 30 हजार की की राशि लगाकर लगभग डेढ़ साल में एक लाख के मोती की खेरी हो गई और अब वे 1 लाख की लागत लगाकर 4 लाख का मुनाफा निकाल रहे हैं। अमित जी ने बताया की मोती की खेती में 4 गुना का फ़ायदा हो रहा है।

अमित के मुताबिक उनके पिता ने सालों पहले एक तालाब बनवाया। उस समय उसमें केवल मछली और बत्तख का पालन होता था। फिर उन्होंने तालाब में मोती की खेती (Moti Ki Kheti) करना शुरू किया। अब बे मोती की खेती के अलावा वही साइड में कड़कनाथ मुर्गे (kadaknath Chicken) की भी पैदावार कर रहे है और एक तीर से 2 निशाने लगा रहे है। मतलब एक ही स्थान पर 2 फार्मिंग काम। यह दोनों फार्मिंग कैसे होती हैं यह हमें अमित जी समझाया।

छोटे तालाब में मोती की खेती करने का तरीका

अमित जी एक नंबर न्यूज़ के एडिटर नितिन चौरसिया को बताया की तालाब में 4 से 5 सीप एक जाली में बांधकर 3 फीट तक प्लास्टिक की बोतलें या बॉल के सहारे लटकाई जाती हैं। पानी की लहरें सीपों को हिलाकर एक्टिव करती हैं। हफ्ते में दो बार सीपाें की देखरेख करके उन पर जमने वाली काई हटानी जरूरी रहती है। डेढ़ साल में मोती पैदा हो जाते हैं।

फिर सीप की परत से निकले बुरादे, कैल्शियम कार्बोनेट समेत 6 प्रकार के पाउडर से न्यूक्लियर (मोती का बीज) तैयार किया जाता है। जिंदा सीप को आधा इंच तक खोलकर उसमें न्यूक्लियर प्लांट रेडी किया जाता है। जिस आकार की फॉरेन बॉडी सीप में डाली जाती है, उसी आकार का मोती तैयार होता है। यह सिलसिला दोहराया जाता है।

अमित बमोरिया हमें ने बताया यह मोती आम मोती से बढिया और ओरिजिनल होते हैं। इन दिनों डिजाइनर मोतियों (Designer Pearl) की डिमांड काफी अधिक है। सीप के अंदर गणेश, ईसा, क्रॉस, फूल, हार्ट सहित कई डिजाइन की डाई (फ्रेम) डाल देते हैं। 15 से 20 महीने बाद सीप में डिजाइन के आकार में मोती तैयार हो जाता है। इसके बाद सीप का कवच तोड़कर मोती निकाल लेते हैं।

How To Do Pearl Farming in Low Cost(मोती की खेती कैसे शुरू करें)

अमित जी ने बताया की अगर किसी को यह पर्ल फार्मिंग करनी है, तो केवल 30 हजार रुपए की लागत (Cost Of Pearl Farming) से यह काम शुरू हो सकता है और 500 वर्गफीट के तालाब से पर्ल फार्मिंग शुरू की जा सकती है। तालाब में 100 सीप पालकर मोती उत्‍पादन कर सकते हैं। एक सीप बाजार में 15 से 25 रुपए में मिलती है। वाटर ट्रीटमेंट, इंस्‍ट्रयूमेंट्स सहित इंफ्रास्ट्रक्चर पर 15-20 हजार का खर्चा होता है।

एक मोती की उत्पादन लागत 25-30 रुपये आती है और मार्किट में 300 से 1500 रुपए तक एक मोती बिकता है। एक अच्छी क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में 10 हजार रुपए तक है। Pearl Market के अलावा आप अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ड पर सेल अकाउंट बनाकर वहां भी मोती बेच सकते है।

अमित जी ने बताया की इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च भुवनेश्वर के तहत एक नए विंग सीफा (सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर) पर्ल फार्मिंग की निशुल्‍क ट्रेनिंग कराती है। इसमें सीपों की सर्जरी सहित न्यूक्लियर बनाने सिखाया जाता है। मोती की खेती के लिए नाबार्ड और अन्‍य कमर्शियल बैंक से 15 सालों के लिए सिंपल इंटरेस्‍ट पर लोन भी मिलता है।

मोती की खेती के साथ कड़कनाथ मुर्गों की भी फार्मिंग कर रहे

अमित जी अपने तालाब में पर्ल फार्मिंग (Pearl Farming) के अलावा कड़कनाथ मुर्गे की भी फार्मिंग कर रहे है और दोगुना मुनाफा कमा रहे है। उन्होंने बताया की उन्होंने इस साइकिल बना दी है इसे आप Eco System या चक्र कह सकते हैं।

मोती की खेती और कड़कनाथ मुर्गे को पालने पोसने में लागत एक ही साथ कवर हो जाती है, क्योंकि मोती उगाने में जो माल लगता है और बचता है वह मुर्गों के खाने के काम आ जाता है। मुर्गों के लिए लग से खाने का इंतज़ाम नहीं करना पड़ता है। वे कड़कनाथ मुर्गे (kadaknath Murga) की फार्मिंग और व्यवसाय से भी अच्छा मुनाफा बना लेते हैं।

अगर आप भी मोती पालन सीखने और करने का मन बना चुके हैं, तो नीचे दिए गए ट्वीट पर क्लिक करके उनकी वेबसाइट पर फार्म भर दीजिये। आपकी दी गई जानकारी पर आपको कॉल आ जायेगा।

https://twitter.com/sanatanpath/status/1454503960241340420

आपको बता दे की भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी आज के समय में कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग (kadaknath Chicken Farming) व्यवसाय कर रहे हैं और मध्यप्रदेश के झाबुआ से उन्हें कड़कनाथ की सप्लाई होती है। कड़कनाथ मुर्गे काले लांग के होते है और सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते है। अमित जी ने एक ही स्थान पर कम लागत से 2-2 अलग किस्म की फार्मिंग करके एक मिसाल पेश की है, जो योजगार के अवसर को भी बढ़ावा दे रही है।

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