महाराष्ट्रा के साधुओं का केस खुद हैंडल करेंगे सुब्रमण्यम स्वामी, उद्धव-कांग्रेस की चिंता जाने

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Image Credits: Social Media

महाराष्ट्रा के पालघर में मिशनरी प्रभाव वाले इलाके में 2 हिन्दू साधुओं पर स घटना को नज़ाम दिया गया और यज्य की उद्धव सरकार द्वारा इस मामले पर किये गए काम और बयान पर जनता को भरोसा नहीं हो रहा है। मीडिया में ऐसी खबरें भी आई की जिस वक़्त यह घटना हुई, तब उसी स्थान पर महाराष्ट्र की पुलिस, सत्ता में बैठी एनसीपी के नेता और सीपीएम के कार्यकर्त्ता मौजूद थे।

इस मामले में महाराष्ट्र की सरकार पर लीपापोती और मामले को गम्भीरता से नहीं लेने के आरोप लगते रहे है। अब बहुत से लोग यह आरोप लगा रहे है की इस मामले में असल में घटना को अंजाम देने वालों और षड्यंत्र को छिपाया जा रहा है। मामले को लेकर जब पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने सोनिया गाँधी से सवाल पुछा, तो उनके खिलाफ 200 केस दर्ज कर दिए गए और उनसे मुंबई से पुलिस थाने में 12 घंटे से भी ज्यादा समय तब पूछताछ की गई थी। इससे यह साफ़ हो गया की महाराष्ट्रा के इस मामले में बहुत कुछ ऐसा है जो सामने नहीं आ सका है।

जाने माने वकील सुब्रमण्यम स्वामी करेंगे इन्साफ

अब पालघर के केस में बड़ी खबर ये आई है की देश में कई बड़े केस लड़ चुके और कांग्रेस को कई कठघरे में खड़ा कर चुके सुब्रमण्यम स्वामी साधुओं के लिए केस को खुद हैंडल करेंगे। इस बात की जानकारी सुब्रमण्यम स्वामी के साथ काम करने वाले वकील इश्करण सिंह भंडारी ने दी है। भाजपा नेता स्वामी ने कांग्रेस और खासकर सोनिया गाँधी के भ्रष्टाचार के खिलाफ कई केस लड़े है, जिसमे कोयला घोटाला, 2G घोटाला, हेलीकाप्टर घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला जैसे अनेक केस शामिल है। स्वामी के ही एक केस नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता सोनिया और राहुल गाँधी जमानत पर बाहर चल रहे है।

स्वामी के करीबी वकील इश्करण सिंह भंडारी ने कहा की डॉ स्वामी अब पालघर के संतों का केस लड़ेंगे, वो इस केस को उठाएंगे और अदालत के सामने रखेंगे, अब वो इस केस में शामिल हो रहे है, तो पालघर के संतों को न्याय मिल सकेगा इसकी उम्मीद की जा सकती है। ऐसे में अब इस केस य न्याय की मांग कर रहे लोगो में एक आस जागी है। सुब्रमण्यम स्वामी ने स मामले में खुद भी 2 ट्वीट करके इशारा कर दिया था।

अब इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी उतर जाने से महाराष्ट्रा की उद्धव ठाकरे सरकार की चिंता बढ़ गई है। उद्धव ने इस घटना को एक सामान्य घटना बताया था और लोगो द्वारा साधुओं को गलती से चोर समझ लेने के चलते इस घटना का घटित होना बताया था। जानकारों और मौके पर उपस्थित महिला सरपंच के बयान की माने तो ऐसा कुछ नहीं हुआ था बल्कि इसे जानबूझकर अंजाम दिया गया।

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