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Delhi: महिलाएं किसी से कम नहीं। पुरुष प्रधान क्षेत्रों में भी महिलाओं का दमखम देखा जा सकता है। आपने आज तक ट्रक मैकेनिक के रूप में केवल पुरुषों को ही देखा होगा और कभी भी इस रूप में महिला के बारे में सोचा भी नही होगा। लेकिन आपको जानकर खुशी होगी कि एक महिला भी यह काम करने से पीछे नही हटी।
आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ अपने घर की जिम्मेदारी सम्भल रही है, बल्कि अपने घर और बाहर की भी जिम्मेदारी को संभालते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। शहर में रहने वाली या फिर पढ़ने वाली महिलाओं या लड़कियों के बारे में कहा जाता है कि शहरो की लड़कियां मॉर्डन रहती है, वो गांव की जिंदगी नही जीना जानती उनसे बहुत दूर रहती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही है। चाहे गांव हो या शहर आज की महिलाए हर क्षेत्र में पुरुषों के समान अपना योगदान दे रही है।
हमारे देश मे इसके बहुत सारे उदाहरण भी देखे जाते है। 55 साल की शांति देवी भारत की पहली महिला मैकेनिक (India’s First Female Mechanic) है, जो ट्रकों को पल भर में सही कर देती हैं। ट्रक के बड़े-बड़े टायरों को बदलना तो उनके लिए बाएं हाथ का खेल है। दिल्ली के बाहरी इलाके में नेशनल हाइवे 4 पर संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर डिपो है, जहां आपको शांति देवी (Shanti Devi) इन ट्रकों के बीच काम करती नजर आ जायेगी।
जानकारी के अनुसार, यहां रोज तकरीबन 4000 ट्रक बनने के लिए आते हैं। जिसकी वजह से यहां पर करीब 80 हजार से भी अधिक व्यक्ति को रोजगार का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। इन्हीं में से एक हैं शांति देवी। इन्हें देश की पहली ट्रक मैकेनिक कहा जाता है। शांति ट्रक रिपेयर (Truck Repair) की अपनी दुकान में वो सारे काम करती हैं, जो कोई भी दूसरा ट्रक मैकेनिक (Truck Mechanic) करता है।
Meet Shanti Devi, she is 60+ years old. A ‘truck’ mechanic by profession who changes tyres, fixes punctures and repairs engines. Please Stop Gender Stereotyping. Read her story –> https://t.co/45GaslONDq pic.twitter.com/pq8I1QqaJJ
— SIR .. (@SirJohnRoe) April 9, 2018
ये मिनटों में भारी-भरकम ट्रक के टायर बदलकर उसे चमका देती है। शांति की टपरीनुमा रिपेयर शॉप के बाहर ट्रकों की कतार लगी रहती है। हर ट्रक मालिक चाहता है कि, शांति या फिर उनका पति राम बहादुर ही उनकी ट्रकों की सर्विसिंग करें। हाल ही में भी केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौन ने ट्वीट किया था हम सब सुनते हैं कि महिलाओं को कौन-कौन से काम करने चाहिए लेकिन 55 साल की शांति देवी ने उन सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और वह ट्रक मैकेनिक के रूप में काम कर रही है। मत भेद को खत्म करने के लिए हमें शांति देवी जैसी और साहसी महिलाओं की आवश्यकता है।
कौन है शांति देवी (Who is Shanti Devi)
शांति की माने, तो वो पिछले 20 सालों से ट्रकों की सर्विसिंग कर रही हैं। शांति के 8 बच्चे हैं। शांति का कहना है कि, वो जिन ट्रकों को ठीक करती है वो भी उनके बच्चे जैसे ही है। मूल रूप से शांति देवी ग्वालियर से हैं। पिछले 30 सीलों से वो यहां पर अपने पति के साथ रह रही है। जिसके बाद शांति ने पेट पालने के लिए बीड़ी बनाने से काम शुरु किया।
We often hear norms about what jobs women should do, but 55 year old Shanti Devi has defied all norms & is working as a truck mechanic. /1 pic.twitter.com/K78mS15oHt
— Harsimrat Kaur Badal (@HarsimratBadal_) November 3, 2016
इसी दौरन उनकी मुलाकात उनके दूसरे पति राम बहादुर से हुई। जिसके बाद दोनों ने शादी कर ली। शांति देवी का कहना है कि, शादी से पहले उनके और उनके दूसरे पति के बच्चों को मिलाकर कुल 8 बच्चे है। बीड़ी बनाने से उनका घर नहीं चल रहा था। जिसके बाद दोनों ने हाइवे पर चाय की टपरी खोली। चाय पीने ट्रक ड्राइवर आते, जिनकी गाड़ियां हमेशा खराब होती रहतीं।
शांति अपने पति के साथ काम करती है, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रक टायर की मरम्मत करती है। दिल्ली की उत्तरी सीमा से लगभग 16 किमी दूर मैकेनिकों से भरा एक विशाल ट्रक गैरिज है। गैरिज में काम करने के लिए मेकेनिक की आवश्यकता थी। जिसे देखते हुए उन्होंने एक मिस्त्री रख लिया। उससे ही दोनों ने टायर बदलना, पंक्चर बनाना, ट्रक रिपेयरिंग करना सीखा।
India's only female truck mechanic, Shanti Devi. At 60 she works 12 hours a day. pic.twitter.com/Rf6HBim8dS
— AR🥊 (@ARfrom1947) August 5, 2018
शांति ने पति के साथ काम करने का फैसला लिया, लेकिन ये काम मेहनत मांगता है, ये सोच वो पीछे नही हटी, उन्होंने हिम्मत के साथ इस काम को किया। उसे दुनिया भर के पाठकों की प्रशंसा मिली, लेकिन जब उसने चुनाव किया तो शायद उनके मन मे बहुत सवाल उठे लेकिन उन्होनें सब को दरकिनारे कर काम शुरू कर दिया। काम के शुरू-शुरू में ट्रक ड्राइवर उनसे कह देते थे कि, कोई महिला उनकी ट्रक को हाथ नही लगाएगी, लोकिन वो उनकी बात खत्म होने से पहले ही उनका ट्रक ठीक कर उनका मुंह बंद करा देती।
माँ ने बढ़ाया हौसला
शांति देवी ((India’s First Woman Truck Mechanic)) के लिए यह सफर बहुत मुश्किलों से भरा था। शान्ति ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से थी जिसकी मां पेट पालने के लिए बहुत मेहनत किया करती थी। मां को काम करते देख मेरी हिम्मत भी बढ़ी। शान्ति ने सबसे पहले सिलाई और बीड़ी बनाने का काम किया। जिसके जरिए वो 45 सौ रुपए जमा करने में सफल हुईं और अपनी शादी कर ली। शान्ति देवी का पहला पति कोई नोकरी नहीं करता था। जो भी कमाती थी, उनका पति शराब पीने में उड़ा देता था।
Shanti Devi India’s only womn truck mechanic.Salute 2 her Passion & hard work 2 accomplish any task #InspiringWomen pic.twitter.com/CCy1esNhgO
— 🇮🇳Sapna Mishra (@ISapnaMishra) May 20, 2016
परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी। ऐसे हालात में वह काम की तलाश में परिवार सहित 45 साल पहले दिल्ली आईं। पहले वह इसी डिपो में चाय की दुकान चलाती थीं। शराब पीने की वजह से शान्ति देवी के पहले पति का देहांत हो गया। राम बहादुर के साथ उन्होंने दूसरी शादी की। डिपो में शान्ति देवी को चाय की दुकान से कम आमदनी (Earning) होती थी। बाद में ज्यादा कमाई करने के लिए उन्होंने ट्रक ठीक करने का काम सीखा। इस काम में पति से उनको भरपूर मदद मिली।
टीम की तरह करती है काम
वह कहती हैं कि पति के साथ वह टीम की तरह काम करती हैं। आज शान्ति देवी पति के साथ डिपो में पिछले 20 साल से भी अधिक समय से ट्रक ठीक करने का काम कर रही हैं। पति राम बहादुर को शान्ति देवी पर गर्व होता है। वह कहते हैं कि आज पत्नी की कमाई की वजह से उनके पास घर है। बच्चे पढ़-लिख गए और उनकी शादी हो सकी।
महिला कभी कमजोर नही होती, कमजोर तो उसे हालात बना देते है। महिला को हर परिस्थिति से लड़ना आता है। एक नयी सीख दी की अगर आपके हाथ में कोई अच्छा हुनर हो जो आपको और लोगो से अलग बनाये तो आप कही भी रहते हुए भी किसी भी परिस्थिति में पैसे कमा सकते है।



