तीर-धनुष बेचने वाले मजदूर की वो बेटी केरल की पहली आदिवासी IAS अधिकारी बनी, रचा इतिहास

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Sreedhanya Suresh IAS
Sreedhanya Suresh IAS who has been appointed as Calicut Assistant Collector. She becomes first person from Kerala’s Kurichiya tribal community to crack civil services exam.

File Photo Credits: Twitter

Kerala: आदिवासी इलाके से बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न एक बेटी के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसने अपने माता-पिता का नाम ऊंचा कर दिया है। यहां के इलाके में रहने वाले आदिवासियों के बच्चे जंगलों में रहकर अपने मां बाप के साथ उनके व्यवसाय में मदद करते हैं या मजदूरी करते हैं।

पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी 22 साल की श्रीधन्या सुरेश (Sreedhanya Suresh IAS) बनी। केरल (Kerala) में एक जिला है, जिसका नाम वायनाड है कांग्रेसी नेता राहुल गांधी भी इस जिले से सांसद भी हैं, इस जिले में कई सुंदर-सुंदर मस्जिदें हैं और एक आदिवासी इलाका (Tribe Area Kerala) भी है, जो कि अपनी खूबसूरती के लिए काफी मशहूर है।

इस इलाके में कई आदिवासी मजदूर काम करते हैं और छोटे मोटे व्यवसाय करके अपने परिवारों का पालन पोषण करते हैं। भारत के केरल राज्य की रहने वाली श्रीधन्या सुरेश, जिन्होंने UPSC की परीक्षा में अपनी जगह ही नही बल्कि 410वां रैंक भी हासिल किया है। वह अपनी समुदाय की पहली लड़की है जिन्होंने यह मुकाम पाया है। श्रीधन्या आदिवासी समुदाय (Kerala’s Kurichiya tribal community) से है।

पिता बेचते हैं तीर धनुष

पहली आदिवासी महिला आईएएस ऑफिसर श्रीधन्या (Sreedhanya Suresh IAS) के पिता का नाम सुरेश है और वह भी आदिवासी है। मगर श्रीधन्या सुरेश के पिता ने कभी अपने बच्चों से मजदूरी नहीं करवाई, बल्कि उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया और श्रीधन्या सुरेश ने सभी मुश्किल हालातों को पार करते हुए अपना तथा अपने पूरे समुदाय का नाम रोशन कर दिया है।

जी हां श्रीधन्या सुरेश केरल (Kerala) जिले की पहली महिला आदिवासी आईएएस अधिकारी (First Tribal Woman IAS Officer)) होने का गौरव हासिल हुआ है। श्रीधन्या के पिता मजदूरी करते हैं और तीर धनुष बेचने का काम भी किया करते हैं।

मनरेगा के उपर टिका था परिवार

श्रीधन्या सुरेश का बचपन बड़ी कठिनाइयों से गुजरा यहां तक की उनके परिवार का खर्चा भी मनरेगा स्कीम पर टीका था। मगर सारी कठिनाइयों से जूझने के बाद भी श्रीधन्या ने जूलॉजी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद इन्होंने कोझिकोड जिले के एसटी जोसेफ कॉलेज में एडमिशन लिया। इसके बाद उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

कलेक्टर से मिलने पर यूपीपीएससी बनने कि इच्छा जागी

श्री धन्य ने परिवार को आर्थिक तंगी से जूझता हुआ देखकर पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद अपने जिले वायनाड के एक आदिवासी हॉस्टल में बतौर वर्डन भी काम किया। मगर इस सभी के बावजूद उन्होंने अपने पढ़ाई के जज्बे को कायम रखा। इसी दौरान श्री धनिया को एक बार आईएएस अधिकारी श्री राम शिवा से बातचीत करने का मौका मिला और कलेक्टर ने श्रीधन्या को यूपीएससी की परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया।

‌घर मे आर्थिक तंगी के बाद भी श्रीधन्या के माता-पिता ने पढ़ाई में कोई बाधा नही आने दी। उन्होने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद “कोझीकोड” के “सेंट जोसफ कॉलेज” से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री ली और फिर उसी कॉलेज से जूलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने “विकास विभाग” में क्लर्क के पद पर काम करना शुरू किया और फिर बाद में वायनाड के ही एक होस्टल में बतौर वार्डन काम किया। इसी दौरान UPSC परीक्षा में शामिल होने का ख्याल आया।

तिरुवंतपुरम से की कोचिंग

श्री धनिया ने जिले के आईएएस अधिकारी-श्रीराम शिवा से बातचीत हो जाने के बाद यह फैसला लिया कि वह यूपीएससी की परीक्षा में ना केवल बैठेंगी बल्कि उत्तीण भी होंगी। इसके बाद वह सिविल सर्विस परीक्षा के लिए कोचिंग में पढ़ने तिरुवंतपुरम गई।

जिसके बाद इनका UPSC मे चयन भी हो गया है और वह अपने राज्य तथा जिले की पहली महिला आदिवासी आईएएस ऑफिसर बन गई है। उनके पिता का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। आज बेटी की वजह से गरीबी से भी मुक्ति मिल गई है।

तीसरी एटेम्पट में मिली सफलता

‌श्रीधन्या ने करीब तीन बार UPSC की परीक्षा दी तब उनको सफलता मिली। उनके पास इंटरव्यू देने जाने के लिए पैसे नही थे, फिर घरवालों ने जैसे-तैसे पैसा इकठा किया, तब वह इंटरव्यू के लिए दिल्ली जा सकी।

‌अपनी सफलता पर क्या कहती हैं, श्रीधन्या

‌श्रीधन्या ने एक न्यूज चैनल को दिये इंटरव्यू में बताया कि, वह आदिवासी समुदाय से है और अपने समुदाय की वह पहली लड़की है,जो UPSC जैसी परीक्षा में सफलता (Success) हासिल की है। वो आगे कहती है कि जिस मेहनत और लगन से मैंने यह मुकाम पाया आगे चल के मेरे समुदाय के आने वाले पीढ़ियों को इससे प्रेरणा मिलेंगी। उन्होंने दुनिया को अपने संघर्ष और सफलता की कहानी (Success Story) इसी निर्माणाधीन घर में बैठ कर सुनाई थी।

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