भारत का पहला 7 मंजिला बर्ड हाउस तैयार हुआ, 8 लाख के इस आशियाने में 3000 पक्षी अच्छे से रहेंगे

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Seven story bird house Nagaur
Seven story tower for birds comes up in Rajathan's Nagaur. Jain Samaj developed 7 story Bird house tower at Nagaur village Rajasthan.

Photo Credits: Social Media

Nagaur: हम सब रिहायशी क्षेत्रों में निवास करते हैं और अच्छे घरों और बहुमंजिला इमारतें में अपना जीवन यापन करते हैं बढे-बड़े शहरों और मेट्रो सिटीज में बड़ी इमारतों में बने फ्लैट्स में कई इंसान पूरी सुविधाओं के साथ रहते हैं। अभी तक आपने पक्षियों के लिए कोई बिल्डिंग या फ्लैट्स बनते नहीं देखा होगा। परन्तु अब अब बेजुवान पक्षियों के लिए भी आशियाना बना गया है। नागौर में आपको पक्षियों का यह घर देखने को मिल जायेगा।

देश की पहली बहुमंजिला कबूतरशाला

देश के एक मात्र रेतीले प्रदेश राजस्थान (Rajasthan) के नागौर (Nagaur) में देश की पहली बहुमंजिला कबूतरशाला बनाई गई है। इस इमारत में पक्षियों के लिए 7 फ्लोर की बिल्डिंग को तैयार किया गया है। इस इमारत में अलग अलग फ्लोर और फ्लैट्स बनाए गए हैं। ये 7 मंजिला बिल्डिंग अब लगभग 3 हजार पक्षियों का ऐसा आशियाना होगा, जहां इन जीवों के लिए 24 घंटे दाने और पानी की व्यवस्था रहेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है की इस 65 फीट के 7 मंजिला बर्ड हाउस (Seven story tower bird house) को बनवाया है। अजमेर के चंचलदेवी बालचंद लुणावत ट्रस्ट ने इस बर्ड हाउस को तैयार करने में करीब 8 लाख रुपए का खर्च आया है। हाल ही में 26 जनवरी को जैन समाज के संत द्वारा इसका उद्घाटन किए जाने के बाद ये कबूतरशाला (Kabutarshala) कहे जाने वाली ईमारत पक्षियों का घर बन जायेगा। इस कबूतरशाला का उद्घाटन 14 जनवरी 2014 को जैन संत रूप मुनि और विनय मुनि द्वारा किया गया था।

जैन संत की प्रेरणा से बनवाई गई कबूतरशाला

यहाँ नागौर में पीह गांव (Peeh Village Nagaur) में पहले से एक कबूतरशाला चलाई जा रही थी। अब इसी कबूतरशाला (Pigeon House) में पक्षियों के लिए एक दूसरी 7 मंजिला इमारत बना दी गई है। इस कबूतरशाला को बनाने में श्री वर्धमान गुरु कमल कन्हैया विनय सेवा समिति पीह के लोगो और 20 के आस पास युवाओं ने पहल की है। इस टीम का कहना है कि ये सब जैन संत रूप मुनि की प्रेरणा से ही संभव हो सका।

इस पक्षी सेवा कार्य में दो बीघा जमीन पर एक कबूतरशाला बिल्डिंग (Bird House Tower) को तैयार करने के लिए दानियों कुछ जैन समाज के लोगो द्वारा दान किये गए एक करोड़ लगे हैं। इस जमीन पर बनी कबूतरशाला में एक पार्क भी बनाया गया है, यहाँ बच्चे खेलते आते हैं।

आपको बता दें की यहां एक प्रार्थना रूम भी बनाया गया है। यहां पर कई लोग खासकर के बूढ़े बुजुर्ग सुबह-शाम कबूतरों को दाना डालने और पूजा या भजन करने आते हैं। यहाँ कबूतरशाला में 400 पेड़-पौधे भी रोप गए हैं। इस पेड़ों में करीब 100 अशोक के पेड़ हैं।

इस पक्षी आशियानें में इसके खाने पीने का विशेष ध्यान रखा जाता है। कबूतरों के लिए हर दिन 5 से 6 बोरी धान मुहैया कराया जाता है। सिर्फ धान में हर महीने लगभग 3 लाख रुपये का खर्च आता है। अब इस इमारतनुमा बर्ड हाउस के बनने के बाद पक्षियों के लिए दाने-पानी की खेप भी लगेगी।

कबूतरशाला में ट्रस्ट के माध्यम से खर्चे का पैसा आता है, जिसे बैंक एकाउंट में एफडी के तौर पर जमा किया जाता है। अभी तक इस एकाउंट में 50 लाख रुपये जमा हो गए हैं। अभी तक की सबसे खास बात यह है की इस FD की मूल राशि उपयोग में नहीं आई जाती है। बल्कि एफडी पर बैंक से मिलने वाले ब्याज से भी कबूतरशाला का खर्चा निकल जाता है।

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