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Ayodhya/Uttar Pradesh: राम जन्मभूमि कार्यशाला में राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशे जा रहे है। खबर है की आने वाले 2 वर्षों में राम मंदिर के पहले तल का निर्माण कार्य पूरा कराने की पूरी कोशिश की जाएगी, ताकि रामलला को समय रहते स्थापित करवा दिया जाए। इस बात पर भी रज़ामंडी बनती दिखाई दी कि 1111 फुट पर तजब्बो न देते हुए राम मंदिर का शिखर ऊंचा किया जाए और इसकी विशालता बढ़ाई जाए। मीडिया में बात करते हुये रामविलास दास वेदांती और नृत्य गोपाल दास की ओर से कमल नयन दास ने ऐसी मांग की है।
मीडिया की कहबर के अनुसार कमल नयन ने बताया कि संतों का तर्क है कि यह राम मंदिर निर्माण कार्य उत्तर प्रेदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की इसी सरकार के कार्यकाल के रहते पूरा कर लिया जाना चाहिए। राम भक्तों और साधुओं को आशंका है कि योगी सरकार के इसी कार्यकाल में यदि राम मंदिर निर्माण ना हो सका, तो इस कार्य में आगे दिक्कत खड़ी होने की संभावना है।
खबर आई है की रामविलास वेदांती ने बताया की है उन्होंने जो पत्र लिखा है, उसका नृत्य गोपाल दास जी ने समर्थन किया है। रामविलास वेदांती ने बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा कि संगमरमर का पत्थर बनाने में बहुत समय लगेगा और हम चाहते हैं कि लगभग 2 साल के भीतर ही मंदिर बन कर रामलला विराजमान हो सके।
खबर आई है की रामविलास वेदांती ने बताया की है उन्होंने जो पत्र लिखा है, उसका नृत्य गोपाल दास जी ने समर्थन किया है। रामविलास वेदांती ने बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा कि संगमरमर का पत्थर बनाने में बहुत समय लगेगा और हम चाहते हैं कि लगभग 2 साल के भीतर ही मंदिर बन कर रामलला विराजमान हो सके।
संत महाराज ने बताया की आगे भविष्य में कौन सी सरकार आए और राम मंदिर बनने में कोई दिक्कत पैदा कर दे। अतः यह योगी सरकार के होते हुए मंदिर बन जाना चाहिए। 2024 तक मंदिर बनकर रामलला विराजमान हो जाने चाहिए। इसके बाद ऊपर के अन्न तल बनने का काम चलता रहेगा, इसमें कोई दिक्कत नहीं।
Construction of Ram Mandir begins today in Ayodhya, Uttar Pradesh in presence of Trust Chairman Mahant Nritya Gopal Das. #Rammandir pic.twitter.com/PPIIMdaNTQ
— The Representative (@RMedia_1) May 26, 2020
असल में राम जन्मभूमि परिसर में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए जमीन को समतल किया जा रहा है। इसमें मंदिर के प्रस्तावित मॉडल को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य एवं दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास, डॉ. रामविलास वेदांती ने पुराने नक्शे व पत्थरों से नहीं बल्कि विशेष पत्थरों से विश्व का सर्वोत्तम मंदिर बनाने की मांग को लेकर बैठक की और प्रस्ताव पारित किया। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संतों की उपेक्षा का भी आरोप लगाया गया।
फिर इसके बाद रविवार को इस प्रस्ताव के खिलाफ मंदिर आंदोलन से जुड़े संत सामने आए। संतों ने कहा की कुछ लोग नहीं चाहते कि मंदिर दो-तीन साल में बन जाए। ये लोग ऐसी मांग कर निर्माण कार्य को 30 साल तक रोकना चाहते हैं। जो मॉडल करोड़ों लोगों के दिल में बसा है, मंदिर उसी मॉडल पर बनेगा। जो इसे बदलने की मांग कर रहे हैं, वे खुद भव्य राम मंदिर को अपने पूरे जीवनकाल में भी नहीं देख सकेंगे।
संतों ने मांग उठाते हुये कहा की नया नक्शा बनाकर मंदिर का निर्माण कराया जाए, क्योंकि अब संसाधन की कमी नहीं है। अयोध्या संत समित के अध्यक्ष संत कन्हैया दास ने बताया की राम मंदिर का 60 फीसदी काम हो चुका है। अब श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आगे के तकनीकी निर्माण को जल्द शुरू करने के लिए वचनबध्द है। संतो को उसमें कोई भी अड़चन न पहुंचाते हुये सहयोग करना चाहिए। इससे जल्द भव्य राम मंदिर बन जाए। अब लोग राम लला के दर्शन के लिए उत्सुकः है।







