अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कार्यवाही बदले की भावना से ओतप्रोत, कपिल सिब्बल ने खुद ही जताया

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Image Credits: Twitter

Delhi: रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी पर कांग्रेस पार्टी हावी होना छह रही है। कांग्रेस पार्टी ने अपनी अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर पत्रकार अर्नब द्वारा सवाल को किये जाने के चलते उन पर ‘साम्प्रदायिक घृणा’ फैलाने का आरोप लगवा दिया और अब कोर्ट में कपिल सिब्बल ने इस बात को डायरेक्ट तो नहीं अपितु सांकेतिक रूप से स्वीकार भी कर लिया कि अर्नब गोस्वामी पर दायर किया गया पूरा मामला जाँच संबंधी नहीं, बदले की भावना से ओतप्रोत है।

जानकारों और मीडिया में आई खबर के मुताबिक़ अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ दायर मुकदमों की सूची में एक मामला रजा अकादमी की तरफ से भी दर्ज करवाया गया है। इस रज़ा अकादमी से खुद कपिल सिबल जुड़ें हुए बताये जा आ रहे है। इस रजा अकादमी ने अपनी शिकायत में अर्नब गोस्वामी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने साम्प्रदायिकता फैलाने का प्रयास किया है। इस पर अर्नब के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में कहा कि उन्हें इस केस में जाँच से कोई आपत्ति नहीं है। अगर, यह केस CBI को ट्रांसफर कर दिया जाए।

सीबीआई भारत की एक सम्मानीय जाँच एजेंसी है। सीबीआई पर देश के यकीन को नाकारा नहीं जा सकता। फिर भी रजा अकादमी की तरफ से केस हैंडल कर रहे कपिल सिब्बल ने हरीश साल्वे की माँग पर एक हैरान करने वाली बात कही। कांग्रेस नेता और इस केस के वकील कपिल सिब्बल ने रनव के वकील हरीश साल्वे की बात सुनते ही इस पर आपत्ति जताई और कहा, “सीबीआई को केस देने का मतलब है कि केस तुम्हारे हाथ में दे देना।” यह बात तो ऐसी थी मानो सीबीआई खुद अर्नब के हांथो में हो। देश में अनेक केस की जाँच CBI ही निष्पक्ष रूप से करती है।


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कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल की दलील को सुनकर हरीश साल्वे ने कोर्ट की सुनवाई के समय कहा कि कपिल सिब्बल का ये बयान प्रूफ करता है कि अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ जाँच राजनीति एयर बदले की भावना से प्रेरित है। इसी के चलते वो लोग चाहते है कि उनके लोग ही गोस्वामी से पूछताछ करें, ताकि सवाल उठाने का बदला लिया जा सके।

इससे पहले कल सुप्रीम कोर्ट में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) के केस पर सुनवाई चली थी। उन्होंने अपने ऊपर 2 मई को मुंबई में दर्ज हुई एक अन्न FIR को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे अर्नब गोस्वामी की तरफ से अदालत में पेश हुए थे।

आपको बता दें की मुंबई पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दर्ज इस नई FIR को खारिज कराने के लिए अर्नब गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया था। उन्होंने सर्वोच्च कोर्ट से अपने परिवार व न्यूज़ चैनल के कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने के अलावा पुलिस को कोई नई FIR Case दर्ज न करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

Arnav Goswami Case
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इससे पहले 24 अप्रैल को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में याचिकाकर्ता पत्रकार अर्नब गोस्वामी को तीन सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा और उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। ऐसे में अब अर्नब गोस्वामी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है और सुरक्षा भी प्रदान की गई है।

आपको बता दे की यह सब तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित सवाल करने के मामले में मुंबई पुलिस ने आज भारत के आने माने टीवी चैनल रिपब्लिक के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी से 12 घंटों पूछताछ की। मुंबई पुलिस के इस कार्रवाई को लेकर राजनीति में उबाल आ गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस अर्णव गोस्वामी को बेमतलब परेशान कर रही है।

कुछ लोग सोशल मीडिया में इस याचिका को कांग्रेस के बदले ही भावना करार दे रहे है। उनके अनुसार कांग्रेस और उनके समर्थक दल अर्नव गोस्वामी के पीछे पढ़ गए है। लोगो का कहना है की पालघर मामले सोनिया गाँधी से सवाल पूछना कांग्रेस की नज़र में सबसे बड़ा अपराध है। पता हो की अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से अधिक FIR कांग्रेस नेताओं के द्वारा दर्ज कराई गईं थी।

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