65000 रुपये का स्कूटर शोरूम से बाहर ही निकला था की पुलिस ने 1 लाख का चालान काट दिया।

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chalan 1 lakh
Honda Activa Rider Asked To Pay Rs 1 Lakh In Fines. Scooter In Odisha Fined Rs 1 Lakh By Transport Authorities. 65000 ru Scooty fined 1 Lakh ru by traffic police.

नए मोटर व्हीकल एक्ट को लागू हुए 20 दिन हो समाप्त हो चुके हैं और अभी तक कई हजारों और लाखों रुपये के ट्रैफिक चालान की बात सामने आ चुकी हैं। लेकिन इन्ही जुर्माना के बीच एक रोचक जुर्माना सामने आया है, जिसमें एक नए स्कूटर की खरीदी कीमत से डबल जुर्माना लगाया गया है।

यह घटना ओडिशा की है, जहां ब्रांड-न्यू होंडा एक्टिवा को पुलिस द्वारा सीज कर दिया और एक्टिवा के मालिक से जानकारी लेने के बाद Dealership पर सीधा 1 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया। होंडा एक्टिवा को भुवनेश्वर से 28 अगस्त को एक व्यक्ति ने खरीदा था। 12 सितंबर को इस नया स्कूटर को कटक में एक्ट नियमित चेक पोस्ट पर सड़क परिवहन अफसरों द्वारा रोका दिया गया।

इसके बाद पाया गया कि स्कूटर पर किसी भी प्रकार का रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा नहीं है। ऐसे में RTO ने Dealer पर रजिस्ट्रेशन नम्बर के साथ प्लेट न लगाने पर लगभग 1 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया। जुर्माना नए मोटर व्हीकल अधिनियम के मुताविक लगाया गया था।

इसके अतिरिक्त RTO ने भुवनेश्वर के अफसरों को Dealership का Trade Licence रद्द करने की बात करते हुए कहा कि बिना किसी डॉक्यूमेंट्स के स्कूटर कैसे Deliver किया। भारत में, सभी नए मोटर स्कूटर को रजिस्ट्रेशन नंबर, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और इन्श्योरेंस की जरूरत होती है, जिसे कस्ट्मर को वाहन सौंपने से पहले Dealership द्वारा प्रदान किया जाना होता है।

यह कोई नियम सभी के लिए लागू है कोई अलग से नया नियम नहीं है ये लंबे समय से है। नए संशोधित मोटर व्हीकल Act के साथ जुर्माने की दरों में बटोत्तरी हो गई हैं। अब ऐसे में सही इन्फॉर्मेशन नहीं है कि कॉस्टमेर को स्कूटर कैसे मिलेगा या वाहन मालिक द्वारा कितना जुर्माना भरना होगा।

सारे देश में कई Dealership नए वाहन पर Trade Certificate का इस्तेमाल करते हैं। इन Certificate का अर्थ होता है कि इन्हें सिर्फ Dealership के इंटरनल कार्य के लिए उपयोग किया जाए। इन Trade Certificate के माध्यम से वाहन को स्टॉकयार्ड से शोरूम और Showroom से Showroom ले जा सकते हैं।

निजी काम के लिए इनका उपयोग नहीं कर सकते। एक बार जब मोटर वाहन खरीद लिया जाता है, तो इसे परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर या फिर एक टेम्परेरी रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ कहीं भी चला सकते हैं। देशभर में कई राज्यों में Dealership के माध्यम से रजिस्ट्रेशन नंबर कुछ ही दिनों में प्राप्त हो जाता है। दिल्ली में Dealership ऑनलाइन ही पर्मानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर दिलवा देते हैं।

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