
ये बात सच कर दिखाई है बेटा ही नहीं बेटी भी परिवार का पालन-पोषण कर सकती है। मथुरा के राधाकुंड में ऐसी ही एक बेटी है जो गरीबी के चलते ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही है। वो एक ऐसी बेटी है जो रियल में अपराजित है, जिसे बुरे हालत भी झुका नहीं सके। वो आज सभी समाज के लिए एक मिसाल बन गई है ये उन लोगों के लिए सबक है, जो बेटियां के पैदा होते ही उन्हें बोझ समझते हैं।
मथुरा की रहने वाली बेटी प्रीति जिसके कंधों पर 18 वर्ष की उम्र में ही परिवार की सारी जिम्मेदारी आ गई है। गरीबी के कारण शिक्षा ना प्राप्त कर पाने के कारण इस जिम्मेदारी को वो शिक्षा के अभाव में ई-रिक्शा चला कर बखूबी निभा रही है। राधाकुंड के जाटवान मोहल्ले की बेटी प्रीति ई-रिक्शा चला कर अपने परिवार में माता-पिता, दो छोटी बहनों और दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी संभाल रही है उनकी परवरिश कर रही है।
प्रीति ने कहा की उसके पिता मानसिक रोगी हैं। गरीबी के चलते पिता का इलाज एवं परिवार के पालन पोषण के लिए उसे ई-रिक्शा चलाने का सहारा लेना पड़ा। सरकार व प्रशासन से उसके परिवार को किसी प्रकार की सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
प्रीति अपने परिवार में भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। वो दिन में वह रोजाना आठ घंटे रिक्शा चला कर अपने परिवार व पिता के इलाज के लिए पैसा इकठा कर रही है। छोटे भाई, बहनों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी ही है। प्रीति अपने ई-रिक्शे से बाहर से आने वाले यात्रियों को गिरिराज परिक्रमा तथा धार्मिक स्थलों के दर्शन करके पैसा कमाती है। यह उसकी दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है।
प्रीति की लग्न, इच्छाशक्ति और मेहनत देख लोग भी उसकी प्रशंसा करते हुए नही थकते हैं। शिक्षा को लेकर सवाल पर प्रीति कहती है कि वो पढ़कर आगे बढ़ना तो चाहती है, लेकिन घर में उससे बड़ा कोई ना होने के कारण उसे परिवार की जिम्मेदारी सम्भलनी होगी।
वह अपने फर्ज से दूर नही हटेगी। प्रीति के परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। इसलिए वो ई रिक्शा चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रही है। इसे वो अपना कर्तव्य समझती है। आज हर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गई है प्रीति। प्रीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि बेटी भी परिवार का पालन पोषण कर सकती है। परिवार की जिम्मेदारी संभल सकती है।



