कारगिल शहीद की बेटी ने इस चैंपियनशिप में दो सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया

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Pooja Sangwan
Martyr's daughter Pooja Sangwan pursued her dream with determination and won two silver medals at the National Rowing Championships.

Delhi: कहते हैं अगर मेहनत और लगन हो और मन में उस काम के प्रति जस्बा हो, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी इंसान के कदमो को डिगा नहीं सकते और फिर सामने कितने बड़े से बड़े तूफान आ जाएं, उन तुफानो को पार कर ही लेता है।

इसी विश्वास और मेहनत के आगे तो पूरी सृष्टि भी सर झुका लेती है और इंसान वो पा कर ही रहता है, जो उसका लक्ष्य होता है। ऐसे ही एक उदाहरण की बात हम कर रहे हैं, जिसने लाइफ में हर कठनाइयों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को डगमगाने नहीं दिया और उसे पूरा किया।

सबकी मिली सराहना

हरियाणा (Haryana) राज्य की एक बेटी पूजा सांगवान (Pooja Sangwan) जिसने अपनी ज़िद्द में अपने सपने को पूरा करते हुए राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप (National Rowing Championships) में दो Silver Medals जीते हैं।

वहीँ उसके गाँव के लोगो ने बहुत खुशियां मनाई हैं और मिठाइयां भी बांटी है। क्योंकि यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि इस पुरे गांव या शहर के लिए गर्व की बात हो जाती है, जिसकी सराहना हर कोई व्यक्ति करता है।

फिर अपने देश के लिए करना तो और भी सम्मान जनक हो जाता है और आपकी मेहनत और कामयाबी को देखते हुए न जाने कितने ही लोग आपसे प्रेरणा लेते हैं और आगे बढ़ने का फैसला लेते हैं।

पिता का साया उठने के बाद अपने सपने को किया पूरा

आगे आपको बताते हैं की गांव मंदोला की रहने वाली पूजा सांगवान के पिता अमरचंद सांगवान बीएसएफ में नौकरी करते थे, लेकिन देश सेवा में साल 2002 में कारगिल युद्ध के दौरान वे शहीद हो गए थे। अमरचंद सांगवान भी अपने समय के अच्छे एथलीट माने जाते थे, पूजा के सर से पिता का साया उठ गया।

दुनिया में न जाने कितने परिवार ऐसे होंगे, जहाँ परिवार के मुखिया या पिता का साया उठने के बाद, परिवार के भरण पोषण में कमी के चलते परिवार टूट गए कितने बच्चे लावारिस भी हो गए बच्चो की शिक्षा छूट जाये तो वे जल्दी काम करना सीखते हैं।

उनका बचपन तो ख़त्म हो ही जाता है, बल्कि वे अपने सपनो को भी मार चुके होते हैं, इतना बड़ा दुःख का पहाड़ टूट ने के बाद भी मां अंजूबाला और उसके परिवार के सदस्यों ने बेटी पूजा को देश का नाम ऊंचा करने के लिए प्रेरणा दी और फिर पूजा सांगवान ने साल 2014 से खेलना शुरू किया था।

पूजा का हर प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन

2014 से अब तक वो लगातार कई मेडल जीतती आ रही हैं, वर्ष 2015 में चीन में आयोजित प्रतियोगिता में पूजा 8th Position पर रही थीं, उसके बाद वर्ष 2018 में इंडोनेशिया में आयोजित Asian Games में देश की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए पूजा ने 6th rank हासिल किया था।

इसके बाद पूजा ने नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीता था, और अब अहमदाबाद में संपन्न हुई नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में दो Silver Medals जीतकर अपने गांव और राज्य का नाम रोशन किया है, साथ ही अपना सर और परिवार का नाम गर्व से ऊपर उठा लिया है।

पूजा सांगवान की कामयाबी का सफर

पूजा की दादी शांति देवी कहती है की उनकी पोती ने पदक जीतकर भारत का नाम ऊंचा उठाया है। पिता का हाँथ सर से उठने के बाद भी पूजा ने हिम्मत नहीं हारी और खेलों में नाम कमाती चली गई। लोगो का कहना है, यहाँ प्रतिभाओं की कमी नहीं है।

सरकार अगर सही समय पर इन प्रतिभाओं के लिए ठोस कदम उठाये, तो कई बच्चे अपनी प्रतिभाओ के चलते देश का नाम रोशन कर सकते हैं। पूजा सांगवान ने किसी भी सहायता के बिना ही राष्ट्रीय स्तर पर दो सिल्वर जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

पूजा का कहना है कि उसका सपना नेशनल लेवल पर गोल्ड मैडल जीतना था, अपने परिवार से प्रेरणा लेकर शहीद अमरचंद की बेटी पूजा सांगवान के जस्बे ने अपना सपना पूरा किया। पूजा दो बार एशियन गेम्स में भारतीय टीम का बतौर कप्तान नेतृत्व कर कमाल कर चुकी हैं।

उसने अब तक National Level पर दो Gold के साथ दस Silver व दो कांस्य पदक जीते हैं। अपनी इस उपलब्धि पर पूजा ने अपने शहीद पिता को सभी मेडल समर्पित कर दिए और उनसे प्रेरणा ली की देश के तिरंगे को एक दिन विदेश में भी लहरायेंगे।

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