शख्स ने हाइड्रोजन कार बना दी, मात्र 150 रुपए के खर्चे पर 250 KM का सफर करवाती है, जाने डिटेल्स

0
960
hydrogen power car
Farmer son Made Hydrogen powered Car runs 250 KM in single tank. Mechanical Engineer Harshal builds hydrogen power car.

Nagpur: भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़े हुए हैं, जिसकी कारण ट्रांस्पोर्टेशन महंगा हो गया है और वाहनों की बिक्री भी बढ़ती जा रही है। आज घर ने जितने सदस्य होते हैं, लोग उतने वाहन खरीदते हैं, इसलिए पेट्रोल-डीजल के अलावा दूसरे विकल्प पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

ऐसे में एक विकल्प है हाइड्रोजन ईंधन (Hydrogen Fuel), जिस से वाहन चलाया जा सकता हैं। इसी विकल्प के बारे में सोचते हुए देश के ही एक किसान के बेटे हर्षल नक्शाने (Harshal) ने हाइड्रोजन से चलने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नियंत्रित कार बनायीं, जो हाइड्रोजन से चलने वाली है।

यवतमाल के तहसील वानी में रहने वाले हर्षल, मैकेनिकल इंजीनियर (Mechanical Engineer) हैं और ये कार उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बनाई है, जो उनके बचपन के साथी हैं। इसके लिए उन्होंने एक वर्कशॉप भी बनायीं है और कार को वर्कशॉप में तैयार किया गया है। इस कार का नाम ‘सोनिक वन’ (Sonic One) है। इस इलेक्ट्रिक कार का निर्माण पूरी तरह से भारत में किया गया है।

पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों से बेहतर है

इस कार पर वो कहते हैं, इस कार को एक लीटर लिक्विड हाइड्रोजन से 250 किमी तक चला सकते हैं। अभी 150 रूपए एक लीटर लिक्विड हाइड्रोजन की कीमत है। सोनिक वन कार पिकअप के मामले में पेट्रोल-डीजल ईंधन वाले वाहनों से बेहतर है और 200 किमी प्रति घंटे इसकी टॉप स्पीड है।

उनका कहना है कि उन्होंने कार निर्माता के रूप में मार्केट में उतरने के लिए अपना ‘एआईकार्स’ (AI Cars) नाम पंजीकृत किया है और हर्षल नक्शाने जिसके संस्थापक और सीईओ हैं। उनका टारगेट इन कारों की डिलीवरी 2024 तक शुरू करना है।

भारत का खुद का ब्रांड होगा और साथ ही साथ देश का होगा नाम

हर्षल कहते है कि उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी इस कार का प्रदर्शन दिखाया हैं। जिसके लिए उन्होंने वानी से नागपुर तक कार चलायी है, जिसके बाद अब वो अपनी कार व्यावसायिक रूप से लॉन्च करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें हर प्रकार के सपोर्ट का भरोसा भी मिल चुका है।

अपने इस कार के सफर के बारे में हर्षल बताते हुए कहते है कि, हमने शुरू से ही कार बनाने का उद्देश्य बना रखा था। हम अपनी पढ़ाई के बाद कहीं भी जॉब नहीं करेंगे। ये पहले ही सोच लिया था और वह किसी बड़ी कंपनी को इसकी पेटेंट टेक्नोलॉजी नहीं बेचेंगे और आगे यवतमाल में खुद का प्लांट शुरू करेंगे।

जो सपना देखा वो पूरा किया

हर्षल कहते हैं कि स्कूल में जब पढ़ते थे, उस समय से ही हमारे अंदर कारों के प्रति दीवानगी थी और तभी से हम भारत में सपना देखते थे एक दिन सुपरकार बनायेंगे। अपने इसी सपने को ध्यान में रखते हुए हमने नागपुर के रायसोनी कॉलेज से इंजीनियरिंग की।

मैंने अपने बचपन के दोस्त दानिश शेख, कुणाल असुतकर, प्रज्वल जामदाले को एआईकार्स कंपनी का सीएफओ, सीओओ और सीआईओ बनाया है। इन लोगों ने कार बनाने से रिलेटेड पढ़ाई और सीखने के सारे स्किल्स प्राप्त किए हैं और साथ ही साथ में वानी में वर्कशॉप शुरू करने में पिछले साल मदद भी की है।

माता पिता की मदद और मेहनत से सफलता मिली

दोस्तों ऐसा अक्सर कहते हैं जब बच्चे सपने देखते हैं कुछ करने का कुछ बन ने का तब यदि उनके माता पिता उन पर विश्वास कर उनके सपने पूरे करने में हर तरह से मदद करते हैं, तो एक दिन उनके बच्चे का सपना ज़रूर पूरा होता है।

हर्षल के माता-पिता ने भी शुरू से ही उनकी आर्थिक रूप से हर संभव बहुत मदद की, उन्होंने 25 लाख रुपये सोनिक वन के लिए दिए। टीम का कहना है कि उन्होंने अपने शुरुआती निवेशकों को बेंगलुरू से अपनी कंपनी में 5 प्रतिशत इक्विटी दे दी है। उनका टारगेट 2023 में अपना दूसरा वर्जन बीटा बिल्ड लॉन्च करने का है, जिसका प्रोडक्शन और वेरिफिकेशन को पूरा करने के बाद इसकी डिलीवर 2024 तक शुरू करने का है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here