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अयोध्या विवाद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय कभी भी आ सकता है। हालांकि इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने ऐलान किया है कि अयोध्या में किसी भी हिंदू मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का Structure नहीं खड़ा किया गया था। जमीयत उलेमा-ए-हिंद का यह भी कहना है कि उसका यह दावा एतिहासिक सबूतों पर आधारित है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बुधवार को कहा कि एतिहासिक सबूतों के आधार पर मुस्लिम समुदाय यह दावा करता है कि अयोध्या में बनाई गई मस्जिद किसी हिंदू मंदिर को तोड़े बिना किया गया था। हालांकि हम अपने रुख को दोहराते हैं कि कोर्ट जो भी निर्णय सुनाएगा, हम उसे मंजूर करेंगे। इसके साथ ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुसलमानों और अन्य समुदाय के लोगो से कोर्ट के निर्णय का सम्मान करने की गुजारिश भी की है।
अयोध्या विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले मंगलवार को केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के आवास पर एक मीटिंग सम्पन्न हो चुकी है। इसमें मुस्लिम धर्मगुरु और RSS राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता उपस्थित थे। मीटिंग में बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन और फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली भी अपनी उपस्थिति दर्ज करने पहुंचे थे।
Jamiat Ulema-e-Hind on Ayodhya case: Muslim claim is based on historical fact that Masjid was constructed without demolishing any Hindu temple.We reiterate our stand, whatever judgment is delivered we will accept it & appeal to Muslims and fellow citizens to respect the judgment
— ANI (@ANI) November 6, 2019
केंद्रीय मंत्री नकवी के आवास पर हुई मीटिंग के बाद शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जावेद ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्णय सुनाएगा, हमें उसका ताहे दिल से स्वीकार करेंगे। सभी को उसका सम्मान करना चाहिए। हम सभी से स्नेह और शांति बनाए रखने की गुजारिश करेंगे।
वहीं अखिल भारतीय सूफी सज्जादनशीं परिषद अध्यक्ष सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने बताया था कि मीटिंग के दौरान हर कोई इस बात पर एक तरफा था कि सभी धर्मों के लोगों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। हम सभी दरगाहों को आगाह करते हुए दिशा-निर्देश देंगे कि वो लोगों से गुजारिश करें कि गलत अफवाहों और गलत इन्फॉर्मेशन पर भरोसा न करें।
Appeal for peace before verdict on Ayodhya; Jamiat Ulema e Hind says it will respect Supreme Court verdict; many other organizations also urge communities to maintain social harmony and unity; Security tightened in Ayodhya #AyodhyaVerdict
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— DD News (@DDNewslive) November 6, 2019
अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय जल्द आने के पीछे मुख्य वजह यह है कि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। न्यायाधीश गोगोई पहले ही कह चुके हैं कि वह रिटायर होने से पहले इस विवादित मामले में आखिरी निर्णय देना चाहते हैं।
ऐसे में उनके कार्यकाल के बस कुछ ही कार्यदिवस शेष रह गए हैं। इससे साफ है कि मामले की सुनवाई करने वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ इन्हीं बचे हुए दिनों में अपना फैसला सुना सकती है। यही वजह है कि 17 नवंबर से पहले इसे लेकर हलचल बढ़ गई।



