
Jaisalmer: भारत एक ऐसा देश है, जहाँ भावना और प्रेम से बढ़ कर कुछ नहीं होता कुछ अपवाद भी है, जिन्हें मोह नहीं होता परंतु हमारे भारत देश की संस्कृति और सभ्यता में भाईचारा और प्रेम व्यवहार सबसे अहम होता है।
इस देश में पशुपालन व्यवसाय के लिए किया जाता है, जैसे गाय को घर में पाला जाता, क्योंकि हिंदुओं की मान्यताओं के अनुसार गाय में 36 कोटि के देवी देवता का वास होता है और गाय के दूध से लोग व्यापार भी करते है घर में पले जानवरो को भी लोग नाम देते है।
उस नाम से ही बुलाते है, लोग जानवरो को अपने फायदे के लिए ही नहीं पालते बल्कि उनकी देख रेख और उनसे प्रेम होने के कारण भी पालते है भारत देश में बहुत सारे पशु प्रेमी है, जो रास्ते में घायल होकर पड़े जानवरो को या बेसहारा जानवरो को रेस्क्यू करके उनका ट्रीटमेंट करा कर उनका भरण पोषण करते है।
उन लोगो से बात करने पर और उनसे पूछने पर की आपको ये सब करने से क्या मिलता है, तो वो लोग कहते है धन दौलत तो नहीं पर सुकून मिलता है, जो मन को खजाने से ज्यादा अच्छा लगता है आज हम राजस्थान की ऐसी ही कहानी के बारे में बात करेंगे।
शिव सुभाग राजस्थान (Rajasthan) राज्य के जैसलमेर (Jaisalmer) जिले के धोलिया गांव के निवासी है। वह अपने परिवार के साथ सालों से रह रहे है। आज शिव सुभाग और उनके परिवार ने एक नेकी की मिसाल पेश की है।
उन्होंने अपने काम से बताया कि इंसानियत और परोपकार से बढ़ कर इस दुनिया में कुछ नहीं है। लगभग नौ माह पूर्व सनावडा गांव (Sanavada village) के पास एक हिरण ने एक बच्चे को जन्म दिया था और जन्म के 15 दिन के भीतर उस माता हिरण की मृत्यु हो गई, इससे वह बच्चा अनाथ और बेसहारा हो गया।
शिव और उनके परिवार ने किया भरण पोषण
शिव सुभाग को जब इस वाक्यांश के बारे में पता लगा, तो वे तुरंत उस जगह पहंचे जहाँ हिरण और उसका बच्चा था। उसके बाद उस माँ हिरण को उन्होंने ज़मीन में दफन किया और उस हिरण के बच्चे को अपने साथ घर ले आए।
इसके बाद संपूण परिवार (Jaisalmer Bishnoi Family) मिलकर उस हिरण के बच्चे की देख रेख करते रहे जब बच्चा बड़ा हुआ और खुद से अपना जीवन चलाने लायक हुआ, तो उन्होंने हिरण के बच्चा का भविष्य देखते हुए और अपने अनुकूल वातावरण में रहने के लिए शिवसुभाग और उनके परिवार ने उस बच्चे को रेस्क्यू सेंटर भेजने का फैसला लिया जिससे उसे एक जंगल और उसके अनुसार एक परिवेश मिलेगा।
ढेर सारी खुशियों के साथ बिदाई दी
जब उन्होंने हिरण के बच्चे (Hiran Child) को रेस्क्यू सेंटर भेजने का फैसला लिया, तो उन्होंने बच्चे को ढेरों खुशीयों और उसके जीवन को बेहतर बनने की प्रार्थना करते हुए उसे घर से विदा किया। विदाई के पहले शिव और उनके परिवार ने अपने घर में ही रात्रि जागरण का प्रोग्राम बनाया और लोगों को भोजन भी कराया।
Jaisalmer Bishnoi Famiy Raise Deer As Own Child And Gave Her Farewell Like Daughter. They Raised a deer child for nine months, farewell like a daughter by having a mass feast. pic.twitter.com/C3Irj9SWap
— sanatanpath (@sanatanpath) May 26, 2022
जानकारी के अनुसार वह हिरण के बच्चे जोधपुर के लोहावट स्थित रेस्क्यू सेंटर में है और अच्छे से अपना जीवन यापन कर रहा गया। शिव और उनके परिवार से उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो पशुओं को पसंद नहीं करते और और उनको नुकसान पहुचते है।



