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Jaipur: कहते है भगवान हर जगह नहीं रह सकते, इसलिए उसने सब के लिए माँ बनाई है एक माँ के लिए उसका बच्चा जैसा भी हो उसका बच्चा उसका ही होता है। अपने बच्चे को नो महीने पेट में और 2 साल सीने से लगा के रखती है, तब जाकर उसका बच्चा चल पाता है और बोल पाता है सच में माँ के लिए तो शब्द कम पड़ जाएंगे।
एक माँ अपने बच्चे को अपना मुह का निवाला दे देती है, खुद की परवाह किये बिना दुनिया से लड़ लेती है, भले खुद के लिए कुछ न हो पर अपने बच्चे के लिए वो सब कुछ करती है, जो वो कर सकती है दुनिया में माँ पिता का होना उस बच्चे के लिए खजाने से कम नहीं होता है।
हर माँ चाहती है कि उसका बच्चा खूब तरक्की करे और खुश रहे एक ऐसी ही कहानी है, राजस्थान राज्य की शांति देवी की, जिसने कभी स्कूल देखा तक नहीं परंतु अपने बच्चों को पढ़ने और कुछ बनने के लिए काफी ज्यादा मोटिवेट किया।
उस माँ के पास बच्चों के फीस के लिए पैसे तक नहीं हुआ करते थे। उन्होंने मजदूरी की खूब संघर्ष किया पर अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए कोई कमी नहीं रहने दी। अपने बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए कोई कसर बाकि नहीं रहने दी।
मेहनत और माँ की ममता रंग लाई और आज उनका बेटा राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस यानि एक RAS ऑफिसर है और वो गरीब माँ आज एक SDM की माता हैं। कर्म करो फल की चिंता न करो यह कहाबत एक दम सत्य है।
मजदूरी की पर बच्चों की पढ़ाई में रोक नहीं लगने दी
पढ़ाई हर किसी के लिए बहुत जरुरी है, शिक्षा के आभाव से लोग अपने आप से ही हिचकिचाते है और कभी आगे नहीं बढ़ पाते इस लिये राजस्थान राज्य के सीकर जिला की खंडेला इलाके के दुल्हेपुरा की निवासी शांति देवी पांच बच्चों की माँ हैं।
शुरुआत से ही उस माँ ने अपने बच्चों को ज्यादा से ज़्यादा शिक्षा प्राप्त कराने का निश्चय किया। उन्होंने अपने आप को उदाहरण बनाया, क्योंकि वो पढ़ी लिखी नहीं थी और शिक्षा के अभाव से उन्हें कोई अच्छा काम नहीं मिला और अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिये मज़बूरी करनी पड़ी, इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को हाई एजुकेशन दिलाने की ठानी।
उन्होंने कभी भी आर्थिक तंगी को अपने सपनो के आड़े नहीं आने दिया। हमेशा हिम्मत से काम लिया। उन्हें अपने बच्चों पर पूरा भरोसा था कि वो एक न एक दिन वे कुछ बनकर उनकी माँ का नाम रोशन कर दिखाएंगे। इसी लिए शांति देवी ने कड़ी धूप, बरसा, ठण्ड में बच्चों के लिए मजदूरी करती रही।
एक समय माँ के पास बच्चे की फीस भरने के पैसे भी नहीं थे
शांति देवी हमेशा अपने बच्चों को समझाती और कहती की यदि तुम लोग अच्छे से पढ़ लिखकर कुछ बन जाओगे, तो मुझे मजदूरी करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। उनके बच्चे अपनी माँ का दर्द अच्छी तरह महसूस कर सकते थे इस लिए वे भी खूब लगन से पढ़ते थे।
जानकारी के अनुसार शांति देवी खूब मजदूरी करती और अपने बच्चों को पढ़ाती, लेकिन एक समय उनका ऐसा भी आता था कि उनके पास बच्चों के फीस भरने के पैसे भी नहीं रहते थे। ऐसे स्थिति में उन्होंने अपने पालतू पशुओं को भी बेच दिए थे। कभी कभी तो उन्होंने पेड़ों की लकड़ी को काट कर उन्हें बेचकर बच्चों की फीस भरती थी। खूब संघर्ष से उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया है।
वो दिन भी आया जब उनके बच्चों ने उनका नाम रोशन किया
शांति देवी (Mother Shanti Devi) के बच्चों ने कभी अपनी माँ को निराश नहीं होने दिया उनके हर बच्चे खूब होशेयार है और मेहनती भी। एक दिन उनकी मेहनत सफल हुई और शांति देवी के एक बेटे धर्मराज रुलानियां स्वास्थ विभाग में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर काम कर रहे हैं और एसएमएस अस्पताल जयपुर में पदस्थ हैं।
उनका दूसरा छोटा बेटा हुक्मीचंद (Hukmichand Rohlaniya) ने भी अपनी मां की मेहनत को जाया नहीं जाने दिया और उनके सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम किया। हुक्मीचंद ब्रिलिएंट छात्र रहे। कक्षा 8 से 12 तक उन्होने लगातार टॉप किया इसके बाद उन्होंने सीकर के नवजीवन साइंस कालेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और उस परीक्षा में पूरे प्रदेश में 7वीं रैंक प्राप्त की और अपनी माँ परिवार और जिले में अपना रोशन किया। अब आगे की पढ़ाई में उन्होंने ने बीटेक किया।
बुलंद हौसलों के साथ बड़े सपने है हुक्मीचंद रुमनियां के
हुक्मीचंद रुमनियां के सपने बहुत बड़े है और वे कुछ बड़ा करने की सोच रखते है। वे कहते है कि असली सफर तो अब शुरू हुआ है। उनका सपना एक RAS बनना है, इसलिए वे प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी में पूरी लगन से जुटे हुए है। उन्होंने दिन रात एक कर दी और काफी कठिन परिश्रम किया।
👨🏫RAS 2018 Topper, Hukmichand Rohlaniya
मॉक इंटरव्यू के क्रम में मिलिये हुकमीचंद रोहलानिया से: https://t.co/iVx4roK2mo
उन्होंने दृष्टि संस्थान में जो मॉक इंटरव्यू दिया था उसे दृष्टि आई.ए.एस यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है ताकि RAS के सभी अभ्यर्थियों को लाभ मिल सके। pic.twitter.com/YL6ItlTz8F
— Drishti IAS Videos (@DrishtiVideos) July 21, 2021
तब जाकर साल 2018 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में 18वीं रैंक प्राप्त कर उस लिस्ट में अपना नाम दर्ज किया और आज वे राजस्थान के RAS (Rajasthan Administrative Services) अधिकारी बने। हुक्मीचंद ने अपनी मां के सपनों को पूरा किया और उनके विश्वास को जीत दिलाई। आज पुरे गांव में उनको लोग SDM Officer की मां से जानते है और उनकी माँ को उनके बेटे के नाम से जानने पर शांति देवी को गर्व होता है।



