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Delhi: जैसा की हम अपनी पिछली पोस्ट में इसरो के गगनयान मिशन के बारे में काफी जानकारी दे चुके है। आने वाला समय और साल इसरो के लिए बहुत खास होने जा रहा है। अभी तक तो इसरो अंतरिक्ष कार्यक्रमों (ISRO Space Program) पर काम कर रहा था, परन्तु अब ऐसा काम करने जा रहा है, जिसको जानकार आपको हैरानी और उत्सुकता दोनों हो जाएगी।
इसरो ने गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के अलावा समुद्र में भी खोज करनी शुरू कर दी है और अगले कुछ सालों में भारत की टेक्नोलॉजी अंतरिक्ष के अलावा समुद्र में भी दबदबा बना लेगी। हाल ही में भारत सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए कहा कि इसरो एक डीप ओशन मिशन (ISRO Deep Ocean Mission) पर काम कर रहा।
उह्नोने कहा की इसमें इसरो द्वारा एक मानवयुक्त पनडुब्बी (Manned Samudrayaan) विकसित की जाएगी। इस प्रोजेक्ट का नाम ‘समुद्रयान’ (Samudrayaan Mission) है। उन्होंने आगे बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टेक्नोलॉजी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान ने इससे पहले 500 मीटर पानी की गहराई रेटिंग के लिए एक मानवयुक्त पनडुब्बी को विकसित किया और उसको टेस्ट भी किया था। इस टेस्ट के रिजल्ट्स काफी अच्छे थे।
जितेंद्र सिंह के बताया की अक्टूबर 2021 में हल्के स्टील की बनाई गई खास टेक्नोलॉजी की पनडुब्बी (Submarine) को 600 मीटर गहराई तक भेजा था। यह मानवयुक्त पनडुप्पी है। इसका व्यास 2.1 मीटर था। अब इसके सफल हो जाने के बाद इसे 6000 मीटर गहराई के लिए विकसित करने पर काम किया जा रहा है, जिसमें टाइटेनियम का इस्तेमाल होगा।
ISRO To Send Humans 6,000 Metres Deep Into Ocean,The project has been dubbed "Samudrayaan"; The initiative would be part of the government's "Deep Ocean Mission.",India 🇮🇳 is gearing up for a manned mission to space as well as to the ocean in 2024.@isro @DrJitendraSingh
— Kushal Jasani 🇮🇳 (@kushal_jasani) December 21, 2021
बताया जा रहा है की इसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, इसरो, तिरुवनंतपुरम का सहयोग मिल रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 4100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए 2024 तक का समय निर्धारित किया गया है। इस मिशन में सफल होने के अपने मायने है। यह खोज अगले मिशन के काम आएगी।
Samudrayaan is no less than a gagnyaan. #ISRO also involved in the project.#DRDO pic.twitter.com/9FwgQ8h7qF
— Indian Defence (@defence_in) March 21, 2021
इसके अलावा इसरो आदित्य मिशन (ISRO Aditya Mission) की शुरूआत भी करने जा रहा है। इसरो का ये एक सोलर मिशन होने वाला है, जिसका पूरा नाम आदित्य सोलर मिशन (Solar Mission) है। आपदा और संकट काल की वजह से इसरो के इस मिशन में काफी देरी आ चुकी है, लेकिन अब इस मिशन के लॉन्च होने की संभावना है।
बता दें की इस मिशन के लिए इसरो अपने रॉकेट को सूर्य के वायूमंडल में भेजने का प्रयास करेगा। मीडिया की खबरों में बताया गया है की इसरो रॉकेट के माध्यम से अपने सैटेलाइट को पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर सूर्य के वायुमंडल में भेजेगा।
#AdityaL1 mission
•ISRO is scheduled to launch the AdityaL1 mission in Q3 2022
•Mass of Aditya L1 will be 1475 kg
•It will be launched by the #PSLV rocket
•AdityaL1 mission will be sent 1.5 million km away from the Earth to L1 Lagrangian, a point between the Earth and Sun pic.twitter.com/cidbMKKDVl
— Vishesh Verma (@Vishesh03625993) September 17, 2021
ऐसी योजना है की इसरो का ये उपग्रह पृथ्वी और सूर्य के बीच L-1 नामक प्वाइंट पर भेजा जाने वाला है। ये पॉइंट अंतराष्ट्रीय नज़रिये से अंतरिक्ष जगत में एक पार्किंग स्पाउट बताया जाता है और अभी तक केवल अमेरिका का नासा ही अपने सैटेलाइट को यहां तक भेजने में सफल हुआ है। अब अगर भारत का इसरो इस मिशन में सफल हो जाता है, तो भारत का इस क्षेत्र में वर्चस्व हो जायेगा।



