भारत की इन सबसे लंबी ट्रेनों को खींचने में 4-5 इंजन लग जाते हैं, एक ट्रेन तो आपको हैरान कर देगी

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Longest train in India
Indian Railway Train in India File Photo.

Delhi: भारत का बच्चा बच्चा रेल का दीवाना रहा है, अगर कहीं जाना हो और उसमें रेल का सफर शामिल हो जाए तो फिर बात ही क्या और सबसे ज्यादा मजा आता था, विंडो सीट की लड़ाई में दोस्तों भारत में रेल का सफर ना केवल एक जर्नी है, बल्कि कई लोगों के लिए एक रोमांचक एहसास भी हुआ करता था।

समय के साथ भारत में रेलवे का डेवलपमेंट भी बहुत तेजी से हुआ आज भारत का रेलवे नेटवर्क (Indian Rail Network) दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में शामिल है। पूरब से पश्चिम उत्तर से दक्षिण तक आप ट्रेन से कोने कोने में सफर कर सकते हैं।

ऐसे में जहां एक ओर रेलवे फास्ट से फास्ट ट्रेन चला रही समय की बचत के लिए, वहीं दूसरी ओर भारत भौगोलिक दृष्टि से इतना बड़ा देश है इसमें कई ऐसी ट्रेन है, जो चार से पांच हजार किलोमीटर का सफर तय करती है।

इनमे डब्बों की संख्या भी अत्यधिक होती है, जिस वजह से कई ट्रेनों को खींचने के लिए एक इंजन पर्याप्त नहीं होता किसी में दो इंजन तो किसी में 4 इंजन (4 Engine) का प्रयोग करना पड़ जाता है। हम आज आपसे भारत की सबसे लंबी ट्रेनों का जिक्र करने वाले हैं वह कहां से चलती है कहां तक जाती हैं।

सबसे लंबी सुपर वासुकी एक्सप्रेस (Vasuki Train)

जैसा कि नाम में ही लिखा है सुपर वासुकी यह वास्तविकता में भी इतनी सुपर है। इस ट्रेन के रूट की बात करें तो कोरबा जो कि छत्तीसगढ़ में स्थित है, वहां से ट्रेन शुरू होती है और महाराष्ट्र में नागपुर के करीब राजनांदगांव तक की ट्रेन चलाई जाती है।

आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि इस ट्रेन में इतने डब्बे हैं कि इसे खींचने के लिए एक दो या तीन नहीं बल्कि पूरे 6 इंजन लगाने पड़ते हैं। इसकी लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर होती है और डब्बो की कुल संख्या 295 के करीब है।

इस ट्रेन की शुरुआत हाल ही में अमृत महोत्सव के चलते की गई जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत अपनी आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है जिसे अमृत वर्ष के रूप में सेलिब्रेट किया जा रहा है। इसी दौरान सुपर वासुकी नाम की इस ट्रेन को शुरू किया गया।

4000 KM से भी लंबा रूट है विवेक एक्सप्रेस (Vivek Express) का

दोस्तों विवेक एक्सप्रेस आसाम की डिब्रूगढ़ से शुरू होती है और इसकी जर्नी खत्म होती है साउथ के सबसे आखरी शहर कन्याकुमारी पर अंग्रेज की कुल किलोमीटर की दूरी देखी जाए, तो लगभग 4300 किलोमीटर का सफर करती है, यह इसलिए यह भारत की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन है।

इसे यह सफर तय करने में 5 दिन का समय लगता है, क्योंकि यह भारत के पूर्वी क्षेत्र को दक्षिणी क्षेत्र से जोड़ रही है इसलिए एक महत्वपूर्ण ट्रेन है। यह बहुत सारे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ती हुई आगे बढ़ती है, जलपाईगुड़ी, कटक, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, विजयवाड़ा, तिरुअनंतपुरम, विशाखापट्टनम।

वीआईपी रूट है प्रयाग राज एक्सप्रेस (Prayagraj Express) का

प्रयागराज एक्सप्रेस अगर पुराने नाम से जाना जाए, तो आज से कुछ साल पहले प्रयागराज को इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था। यह ट्रेन पुराने इलाहाबाद और वर्तमान प्रयागराज स्टेशन से शुरू होती है और दिल्ली देश की राजधानी पर जाकर अपना सफर खत्म करती है।

इसमें 24 डब्बे होते हैं और क्योंकि यह देश का एक बहुत महत्वपूर्ण रूट है, इसलिए इतने डब्बे होने के बावजूद इसमें आसानी से रिजर्वेशन मिल पाना बहुत मुश्किल होता है। राजनीतिक दृष्टि से भी प्रयागराज और दिल्ली का रूट वीआईपी के तौर पर माना जाता है।

2.8 किलोमीटर लंबी शेषनाग एक्सप्रेस (Sheshnaag Express)

जानकारी के अनुसार शेषनाथ ट्रेन को चार ट्रेनों को एक साथ जोड़ कर तैयार किया गया। इसलिए इसकी कुल लंबाई 2.8 किलोमीटर के करीब होती है, इसे ट्रायल के रूप में सबसे पहले बिलासपुर के कोरबा से शुरू करके महाराष्ट्र के नागपुर तक चलाया गया।

इसका मुख्य उद्देश्य है, कोयले का ट्रांसपोर्टेशन तो यह एक मालगाड़ी है। हमने अभी सुपर वासुकी नामक ट्रेन की बात की थी दोस्तों वो भी एक मालगाड़ी है। इनको बनाने का एक ही उद्देश्य था कि एक ही बार में अधिक से अधिक गुड्स को ट्रांसपोर्ट किया जा सके।

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