इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि घरेलू जमीन पर भारतीय टीम की सीरीज जीत में हमेशा स्पिनरों ने बड़ा सहयोग दिया है, लेकिन साउथ अफ्रीका के विरुद्ध तेज गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन ने इस आंकड़े को परिवर्तित करके रख दिया। भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने टेस्ट इतिहास का प्रथम मुकाबला वर्ष 1932 में खेला था।
1932 में सीके नायडू की कप्तानी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड का दौरा किया था। केवल इस टेस्ट में टीम इंडिया को 158 रन से पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद घरेलू जमीन पर India Team ने वर्ष 1933 में प्रथम बार टेस्ट सीरीज की मेजबानी की। दो टेस्ट की सीरीज का मुकाबले के लिए तब इंग्लैंड ने ही भारत का दौरा किया था।
इस सीरीज में भी मेजबान Team को 0-2 से पराजय मिली, हालांकि इसके बाद टेस्ट सीरीज में India Team का प्रदर्शन शानदार होता गया और इसमें सबसे बड़ा सहयोग स्पिनरों का रहा। भौगोलिक परिस्थितियों और मजबूत स्पिनरों चलते भारतीय पिचों को स्पिनरों की मजबूती को सहारा मिल गया और मुख्य कारण यह है कि देश में होने वाले टेस्ट मैचों में दो से लेकर चार स्पिनरों तक को प्लेइंग इलेवन में स्थान दिया जाता है।
तेज़ गेंदबाजों की अहम् भूमिका रही
इस दौरान तेज गेंदबाजों की भूमिका नई गेंद के Starting 8-10 ओवरों तक ही थम कर रह गई। मगर अब विराट कोहली की India Team ने भारतीय क्रिकेट के इस 86 साल के इतिहास को परिवर्तित करके रख दिया है। जब भारत में खेली गई तीन मुकाबलो की सीरीज में विरोधी टीम के गिरे 60 में से 26 विकेट भारतीय तेज गेंदबाजों की झोली में गए हैं।
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— Wriddhiman Saha (@Wriddhipops) October 22, 2019
इनमें से 24 उमेश और शमी के नाम ही रहे हैं। आखिर मजबूत गेंदबाजों के दम पर इंडिया Team ने जीत की पटकथा किस प्रकार लिखी। साल 2018 के बाद से मोहम्मद शमी ने 18 टेस्ट मुकाबले खेले हैं, जिनमें उन्होंने 24.62 की औसत से 67 विकेट अपने नाम किये हैं। मगर अहम बात है कि उनका दूसरी पारी में प्रदर्शन है, जिसमें उन्होंने 22.58 की औसत निकाली है। घरेलू मैदान पर ये औसत और शानदार होकर 17.34 की हो जाती है।
इस प्रकार वह लगातार स्टंप पर निशाना लगाकर गेंदबाजी करते रहे, जिससे उन्होंने बोल्ड और एलबीडब्ल्यू के माध्यम से अधिकतर विकेट झटके। शमी की 164 टेस्ट विकेट में से 30 प्रतिशत बोल्ड के माध्यम से आई हैं। शमी के टेस्ट डेब्यू करने के बाद से सौ विकेट लेने वाले 18 तेज गेंदबाजों में से केवल वेस्टइंडीज के शैनन गैब्रियल ही ऐसे एक सिंगल गेंदबाज हैं, जिन्होंने शमी से ज्यादा 32 प्रतिशत शिकार बोल्ड आउट कर बनाए हैं।
शमी ने तीन मैचों में 13 विकेट लिये
शमी ने अपने टेस्ट करियर में 49 Bold और 23 LBW आउट किए हैं। उन्होंने विकेट के पीछे 45 शिकार किए, जबकि Extra खिलाड़ियों से 47 बार कैच कराया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में उन्होंने मै तीन मैचों में 13 विकेट अपने नाम किये।
Congratulations team india and good show with bat -bowl guy’s 😍😍#TeamIndia pic.twitter.com/5RSZhZiZLz
— Mohammad Shami (@MdShami11) October 22, 2019
इस सीरीज की सबसे अहम बात ये भी रही कि तेज गेंदबाजी के लिए बेहतरीन दक्षिण अफ्रीका की ओर से उसके पेसरों ने तीन मुकाबलो में केवल दस विकेट की चटकाये, वहीं भारतीय तेज गेंदबाजों ने 26 विकेट चटकाकर अपना शानदार प्रदर्शन दिखाया। इस दौरान भारतीय तेज गेंदबाजों ने महज 17.50 की औसत से ये विकेट प्राप्त किए तो दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों का औसत बहुत निराशजनक 70.20 रहा।
सीरीज़ में भारतीय टीम एक बार भी आल आउट नहीं हुई
सीरीज में जहां भारतीय टीम ने हर बार दक्षिण अफ्रीका के दस विकेट हासिल किए तो मेहमान टीम एक बार भी विराट की सेना को ऑलआउट नहीं कर पाई। भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका के 60 खिलाड़ियों को पवेलियन पहुचा दिया, वहीं दक्षिण अफ्रीकी टीम तीन टेस्ट में India टीम के 25 विकेट ही चटका पाई।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची टेस्ट में विजयी के बाद India Team ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में 240 अंक प्राप्त कर लिए हैं। भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को एक पारी और 202 रन से हराकर कर मैच के साथ साथ श्रृंखला को जीत लिया। भारतीय टीम को इस शानदार जीत के लिए हार्दिक बधाई एवं भविष्य के मैचों हेतु शुभकामनायें।



