पिता का सपना सच करने आंगनवाड़ी को गोद लेकर IAS ने अपने खर्चे से बनाया बच्‍चों का भविष्‍य

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IAS Garima Singh
IAS Garima Singh Transforms Hazaribagh Anganwadi Center By Own Saving Money. IAS Officer Spends Her Own Savings to Renovate Anganwadi School.

Hazaribagh: ऐसे बहुत सारे वीडियो हाल के बीते दिनों में आये थे, जिनमे कोई IAS अफसर या सरकारी अधिकारी लोगो पर अपनी धौस जमाते देखे गए और कुछ तोह रिश्वत लेते पकडे गए। कुछ अफसर तो अपने पद को बने रहने के लिए ही काम करते हैं। लेकिन आज हम एक ऐसी महिला की बात करेंगे, जो महिला आईएएस ऑफिसर होते हुए एक मिसाल भी हैं।

जिन्होने अपनी सफलता के बाद आंगनवाड़ी को गोद लेकर अपने स्वयं के खर्चे से बच्‍चों का भविष्‍य बनाने का सफल काम किया है। आज यह काम एक मिसाल बन गया है। आज इन बच्चो की ख़ुशी देखते ही बनती है और इस बच्चों में से ही कुछ बड़े होकर IAS-IPS अफसर बनेंगे।

IAS महिला गरिमा सिंह के बारे में

महिला IAS अधिकारी गरिमा सिंह (IAS Garima Singh) आज एक काम्यं महिला है, जो उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बालियाँ जिला (Baliyan District) के कथौली गांव (kathauli Village) से आती है। इनके पिता का नाम ओमकार सिंह (Omkar Singh) है। जो एक इंजीनियर रहे है।

उनके पिता का सपना था कि, उनकी बेटी एक IAS अफसर बने। गरिमा सिंह के पति का नाम राहुल राय (Rahul Rai) है। जो की एक इंजीनियर हैं। गरिमा ने अपने मेहनत और लगन से IAS ऑफिसर बनकर अपने पापा का सपना भी साकार किया। अब वे अपने एक अध्भुत कार्य की वजह से सुर्खियों में है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है की गरिमा ने अपने कॉलेज और फिर पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के सेंट स्टीफन कॉलेज (St Stephen’s College) से पूरी की थी। जिसमे उन्होंने हिस्ट्री विषय चुना था।

इनके पिता का सपना था कि, उनकी बेटी एक IAS अधिकारी बने। ऐसे में कॉलेज पूरा करने के बाद गरिमा ने UPSC की तैयारी में लग गई। साल 2012 में इन्होंने पहली बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी। वे पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर गई। रैंक के हिसाब से इनको IPS का पद दिया गया।

IPS अफसर बनने के बाद 2 साल तक वह लखनऊ में अंडर ट्रेनी एएसपी के रूप में कार्यरत रहीं। उसके बाद इनकी दूसरी पोस्टिंग झांसी में SP के रूप में हुई थी। परन्तु पिता का सपने IAS का था, तो वे साथ में अपनी पढाई भी करती रही। फिर साल 2015 में UPSC के परीक्षा में बैठी। जिसमे उन्होंने 55वां रैंक हसिल किया और एक IAS अफसर बन गई। फिर 2016 में उनकी पोस्टिंग झारखंड के हजारीबाग में IAS ऑफिसर के रूप में हुई।

आंगनबाड़ी गोद लेकर मिसाल पेश की

झारखंड के हजारीबाग में अपनी तैनाती के दौरान उनको समाज सेवक के रूप में समाज सेवा क्षेत्र में काम करने का मौका प्राप्त हुआ, जहां उन्होंने आंगनवाड़ी की खराब हालत देखी। उसके बाद उन्होंने उस आंगनवाड़ी को गोद लेने का निर्णय लिया। आपको बता दें कि, गरिमा ने मटवारी मस्जिद हजारीबाग की आंगनवाड़ी (Hazaribagh Anganwadi School) को गोद लिया।

IAS गरिमा सिंह ने जब आंगनवाड़ी (Anganwadi School) की खराब स्थिति देखी, तो उन्होंने एक अधिकारी के रूप में नही बल्कि एक समाज सेवक के रूप में अपने खुद के खरे से उस आंगनवाड़ी की हालत को दुरुस्त किया। सबसे पहले उन्होंने आंगनवाड़ी की बिल्डिंग को ठीक किया। फिर स्पोर्ट्स सामान, कुर्सी-टेबल, ब्लॉक, खिलौनो की व्यवस्था की, जिससे बच्चे पढ़ाई के अलावा खेल कूद कर सके।

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