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खुंटी, झारखंड: जाने कितने आतंकी आये और चले गए पर भारतीय सनातन हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति को नष्ट नहीं कर पाए। मुस्लिम आतंकियो के बाद जब अंग्रेजों ने भारत पर अपना कब्जा कर लिया था, भारत को अपना उपनिवेश घोषित कर दिया था। तब अंग्रेज ना केवल भारत का सम्पति, धन वैभव लूट कर ले जाते थे, बल्कि धर्मान्तरण का भी गंदा गेम खेलते थे।
ये धर्मान्तरण सामान्य रूप से इसाई मिशनरियों द्वारा कभी रोगी बताकर इलाज के बहाने से, तो कभी बहुत सारा धन का लालच देकर उनको बहला फुसलाकर करवाया जाता था। इसकी Starting झारखंड के जिस इलाके से हुई थी वहीँ से कुछ समय पहले सनातन धर्म के अवशेष जमीन के अन्दर से बाहर आये।
खुंटी क्षेत्र से ही धर्मांतरण का सबसे प्रथम Case सामने आया
इस घटना पर एक लेख वेबसाइट theanalyst.co.in पर भी देखने को मिलता है। सूत्रों की खबरों के मुताबिक कहा जाता है की झारखंड में स्थित खुंटी क्षेत्र से ही धर्मांतरण का सबसे प्रथम Case सामने आया था और यही से धर्मान्तरण गंदा का खेल Start हुआ था। अब सदियों बाद भगवान की करिश्मा देखिये की इसी खूंटी क्षेत्र से इसी वर्ष के जनवरी महीने में हिन्दू देवी देवताओं की प्रतिमा जमीन के अन्दर खुदाई दे दौरान निकली जा रही है।

Photo source Credits: theanalyst.co.in
जनवरी महीने में खूंटी क्षेत्र में कोई स्थानीय जतरा मेला नाम से कोई मेला आयोजित होने वाला था, जिसकी तैयारियों के लिए वहां के नागरिक अपने मिट्टी से बने घरों की साफ सफाई और घर की लिपाई करने के लिए एक स्थान से जमीन की खुदाई कर के मिट्टी निकाल रहे थे।
राम सीता की मूर्तियों के अलावा अन्न चीज़ें भू मिली
इसी जमीन की खुदाई के दौरान कुदाल किसी कठोर वस्तु से टकराई। इसके बाद जब ध्यान से खुदाई की गई तो वहां से भगवान श्री राम, माता जानकी और भाई लक्षमण की प्रतिमा निकली। इन प्रतिमाओं के अतिरिक्त यहाँ से शंख, दो बड़े गोल पत्थर, एक धूपदानी, भगवान नन्दी की प्रतिमा भी निकाले गए थे।
खूंटी, झारखण्ड में खुदाई में मिली राम और सीता की प्राचीन मूर्ति। साथ ही गांववालों को एक बड़ा और एक छोटे आकार का शंख, एक धूपदानी, एक किसी धातु का बना बैल, दो छोटे गोलाकार पत्थर मिले हैं जो शालिग्राम जैसे प्रतीत होते हैं |
Source: https://t.co/R6DsO8QSEk pic.twitter.com/ifL4ishLHU— sanatanpath (@sanatanpath) October 10, 2019
पौराणिक की जानकारी के मुताबिक माने तो ये प्रतिमा अठारवीं सदी की हो सकती हैं। वहीं गाँव के प्रधान झिरगा मुंडा के मुताबिक इन मूर्तियों को पाँच पीढ़ी पहले किसी महेंद्र नाथ ठाकुर जी ने बिठाया होगा, ऐसा वे अनुमानित रूप पर बताते हैं पर इसके पीछे क्या बात रही होगी, इसके लिए वे कोई तर्क नहीं दे पाते हैं।
भगवान का भी क्या करिश्मा है, की जिस क्षेत्र से धर्मान्तरण के खेल की Starting हुई थी वहीँ से सनातन धर्म ने अपने सनातन हिन्दू धर्म होने के पुख्ता सबूत फिर से दे दिए हैं। जानकारों की मानें तो एक समय यह क्षेत्र एक बड़ा हिन्दू धर्म मानने वालो का क्षेत्र रहा होगा, किन्तु आज परिस्थितियां कुछ और ही हैं।



