देश के इस गांव में बेटी के जन्म पर 10 पौधे लगाए जाते हैं, धरहरा गांव सभी को प्रोत्साहित कर रहा है

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Dharhara Village in Bihar
Bihar village shows the green way to celebrate birth of a girl. Dharhara Village in Bihar Celebrates Birth of Girls by Planting Trees.

Photo Credits: Social Media

Dharhara, Bhagalpur: जैसे जैसे आधुनिकता का दौर अपने चरम पर पहुँच रहा है, वैसे वैसे हम देख रहे है कि पर्यावरण को नुकसान व्‍यक्‍ति ज्‍यादा पहुँचाने लगा है। हम जानते है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने से सबसे ज्‍यादा नुकसान हमारा ही है।

अगर हमें अपना और आने वाली पीढी का भविष्‍य सुरक्षित रखना है, तो पर्यावरण को हेल्‍दी और सुरक्षित रखना बहुत ही जरूरी है। विश्‍व स्‍तर पर भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि लोगो द्वारा अपने आसपास के क्षेत्र में प्‍लांटेशन जोरो शोरो से किया जाये। इसके लिये बहुत से अभियान भी चलाये जा रहे है। प्‍लांटेशन करना जलवायु परिवर्तन से निपटने का बहुत ही सरल तथा प्रभावी ऑप्‍शन है।

बिहार के गॉंव में है एक अनूठी परंपरा, वृक्षारोपण से लोगो के बीच फैला रहे सामाजिक संदेश

इस क्षेत्र में ही ध्‍यान देते हुये बिहार के एक गॉंव के लोगो ने एक ऐसा काम किया है कि हर जगह इसकी बाते होने लगी है। दरअसल इस गॉंव के लोगो ने वृक्षारोपण को सामाजिक संदेश से कनेक्‍ट करके समाज को ऐसा संदेश दिया है कि हर कोई इससे प्रभावित हो रहा है।

इस गाव में बेटी के जन्‍म मे दस पौधे आवश्‍यक रूप से लगाए जाते है। ऐसा इस गॉंव द्वारा इसलिए किया जाता है जिससे कि महिला का शोषण तथा भ्रुण हत्‍या के खिलाफ एक संदेश पहुँच सके। साथ ही समाज मे भी सुधार हो।

बिहार के धरहरा में बेटियो के पैदा होने पर लगाये जाते है 10 पेड़

हम जिस बिहार (Bihar) के गांव के विषय में आपको बताने वाले है वह भागलपुर जिले में पड़ता है। इस गॉव का नाम घरहरा (Dharhara Village) है। इस गॉंव में बेटी के पैदा होने पर दस पौधे लगाने की परंपरा चलाई जाती है। इस परंपरा के कारण यह गॉंव सबसे हरा भरा गॉव कहलाता है।

इस जगह बेटियो को लक्ष्‍मी माता का रूप माना जाता है। जब बेटी जन्‍म लेती है, तो यहां एक उत्‍सव के रूप में मनाया जाता है। वह पेड़ जो बेटी के जन्‍म पर लगाये जाते है उन पेड़ो को बेटियो को विरासत मे दे दिया जाता है।

भ्रुण हत्‍या तथा महिला के शोषण के विरूद्ध लोगो को दिया जाता है संदेश

इस गॉव में आज 20000 से भी ज्‍यादा पेड़ हो चुके है। इस गॉंव को लोग उदाहरण देकर अपने गॉंव को भी इसी प्रकार हरा भरा बना रहे है। इस गॉंव की प्रधान बेटी इस विषय पर कहती है कि जहॉं यह दुनिया ग्‍लोबल वार्मिंग तथ भ्रुण हत्‍या से परेशान है।

वही गॉंव कि यह छोटी सी कोशिश सारी समस्‍या को दूर करने में सहायक हो रही है। इस बात पर मुझे अपने गांव के हर व्‍यकति पर गर्व है। इस गॉंव में पेड लगाकर इसे बेटियो को दहेज के रूप में विरासत में दे दिया जाता है।

पेड़ो से होने वाली कमाई को बेटी की जरूरत में ही किया जाता है खर्च

यह पेड़ उनकी आमदानी का भी एक साधन बन जाते है, क्‍योंकि जैसे जेसे बेटी बड़ी होती है, यह पोधे भी पेड़ का रूप लेने लग जाते है। फिर इनसे मिलने वाले फल तथा आवश्‍यक चीजें बेटियो की पढ़ाई तथा शादी में काम आते है। इसे एक उदाहरण से आप इस प्रकार समझ सकते है।

इस गांव में प्रमोद नाम का एक निवासी रहता है। उसकी एक बेटी है जिसके पैदा होने पर प्रमोद ने 10 आम के पौधे लगाए थे। आज यह पोधे वृक्ष बन गये है और इससे जो भी फल प्राप्‍त हो रहे है उनको बेचकर प्रमोद की बेटी की शिक्षा पूरी हो रही है।

पोधे जब बच्चियो के जन्‍म में लगाये जाते है, तो 5 साल बाद यह वृक्ष के रूप में परिवर्तित हो जाते है। जब इनमें फल होते है तो एक बड़ा हिस्‍सा बाजार में बेच दिया जाता है जिससे आमदानी होती है और इसका उपयोग बेटी की परिवरिश में खर्च किया जाता है।

वही थोड़ा बहुत भाग बच्‍चो के खाने के लिये बचा दिया जाता है। जब पेड़ फल देने लायक नही रहते बूढे हो जाते है, तो फर्नीचर बनाकर बेटी की शादी मे उपहार के तौर पर दे दिया जाता है।

गॉंव में परंपरागत खेती को छोड़ फलो के बागान लगाने में किसान ले रहे है इंटरेस्‍ट

इस मुहिम से गॉंव के सभी लोग प्रेरित हो रहे है और परंपरागत खेती के अलावा भी फलो के बागान से आमदानी कमा पा रहे है। ज्‍यादातर किसान तो परंपरागत खेती छोड फलो के बागान ही लगाने लगे है। इसमें लोगो को मेहनत परंपरागत खेती से कम करनी पड़ती है।

इस गांव में आम के अलावा पपीता, अमरूद, लीची इत्‍यादि के पेड़ भी लगाये जाते है। इस गॉंव की इस मुहिम से आकर्षित होकर मुख्‍यमंत्री नीतिश कुमार भी यहा आ चुके है। इस गांव द्वारा किया जाने वाला यह कार्य मॉटिवेट करने वाला है। इससे देश का हर नागरिक प्रेरित होकर इसी प्रकार का कदम उठाने की और अग्रसर हो रहा है।

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