IAS बनने HR मैनेजर की Job छोड़ी, असफल होने पर डिप्रेशन में गई, कूड़ा बीनने वाली बन गई

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Rajni Topa Depression Story
Left a HR manager's post to become an IAS, instead, this is what happened. Rajni Topa quits HR Manager Job for IAS but she failed and became poor: Depression Story

Demo File Photo

Hyderabad: ये तो हम सब जानते हैं कि ज़िंदगी इम्तिहान लेती है, लेकिन कई लोगों को तो ये ज़िंदगी ऐसा बना देती है कि वे इस इम्तिहान में बैठने लायक भी नहीं रहते। इंसान किसी रेस में तभी हिस्सा लेगा ना, जब मानसिक रूप से सलामत होंगी। हम अपने आसपास देखते हैं और पाते हैं कि यहां ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें ज़िंदगी ने इस लायक बनाया ही नहीं कि वे कुछ कर सकें। सही मायने में देखा जाए तो असली इम्तिहान तो इन्हीं का है।

कुछ इसी तरह IAS बनने का सपना संजोइ थी, हैदराबाद की रजनी टोपा (Rajni Topa)। इसके लिए उन्होंने दो बार प्रयास भी किया। शायद कुछ कमी रह जाने के कारण वह अपने इस प्रयास में सफल नहीं हो पाई और अपने इस असफलता (Failure) से वह इस क़दर अवसाद में गई जहाँ से निकलना उनके लिए असंभव हो गया। आज उनकी स्थिति ऐसी है कि वह सड़क पर कचरा बिनते हुए नज़र आई हैं।

कौन है रजनी टोपा (Who is Rajni Topa)

मूल रूप से हैदराबाद वारंगल (Hyderabad Warangal) की रहने वाली महिला रजनी टोपा (Rajni Topa) का सपना था कि वह IAS अधिकारी (IAS Officer) बने। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर मैनेजर (HR Manager) की नौकरी (Job) तक छोड़ दी और यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) की तैयारी में जुट गई।

इसके लिए उन्होंने दो बार प्रयास भी किया। शायद कुछ कमी रह जाने के कारण वह अपने इस प्रयास में सफल नहीं हो पाई और अपने इस असफलता से वह इस क़दर निराश हो गई यंहा से निकलना उनके लिए असंभव हो गया। आज उनकी स्थिति ऐसी है कि वह सड़क पर कचरा बिनते हुए नज़र आई हैं।

बनना चाहती थी आईएएस

जब वह अपने दूसरे प्रयास में भी सफल नहीं हो पाई तब वह धीरे-धीरे डिप्रेशन में जाने लगी। उनकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्होंने 8 महीने पहले अपना घर तक छोड़ दिया और सड़क पर आ गई। अपने शहर हैदराबाद से हजारों किलोमीटर दूर यूपी के एक शहर गोरखपुर में वह सड़क पर कचरा चुनती हुए दिखाई पड़ी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 23 जुलाई को वारंगल की रजनी टोपा बहुत बुरी स्थिति में गोरखपुर के तिवारीपुर थाने के पास पाई गई। जहाँ वह कूड़ेदान के पास फेंके हुए सूखे चावल को चुन कर खा रही थी। लोगों ने देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब मौके पर वहाँ पहुँची, तो वह फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोल रही थी। तब पुलिस ने उसे मातृछाया चैरिटेबल फाउंडेशन भेज दिया, जहाँ उनका इलाज़ चल रहा है और अब उनकी स्थिति पहले से ठीक है।

असफलता ने बनाया मानसिक रोगी

एक बातचीत के दौरान रजनी के पिता ने मातृछाया चैरिटेबल फाउंडेशन के अधिकारियों को बताया कि उनकी बेटी ने साल 2000 में एमबीए की पढ़ाई फ़र्स्ट क्लास से पास की थी। उसका सपना एक IAS बनने का था, लेकिन दो बार सिविल सर्विसेज़ की परीक्षा में असफलता (Fail in Civil Service Exam) के बाद वह मानसिक स्थिति खो बैठी थी, (Depression) में चली गई। उसके बाद भी उन्होंने डिप्रेशन (Depression) से बचने के लिए HR की जॉब की, लेकिन वह नौकरी भी चली गई।

स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही

उनकी स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। जब पूरी तरह से उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई तब नवंबर में वह घर छोड़कर चली गई। इलाज़ के बाद हालत में कुछ सुधार होने पर रजनी ने अपने परिवार के बारे में भी बताया और इस तरह उन्हे वहाँ ले जाया गया। उम्मीद है कि रजनी जल्द से जल्द इस मानसिक रूप से बाहर निकलेंगे और फिर से एक नए तरीके से अपने करियर की शुरुआत करेंगी।

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