लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत से जीत के बाद कांग्रेस की अप्लमत में चल रही सरकारों के सिर पर खतरे की घंटी मंडरा लगी थी। लेकिन अभी सूत्रों की खवरो के मुताविक कांग्रेस की अप्लमत वाली सरकार चेन की सांस ले सकती है, साल के आखिरी तक। भाजपा के अंदरुनी सुत्रों की खवरो के मुताविक बीजेपी पार्टी फिलहाल इस साल के आखिरी तक बीजेपी पार्टी ने कुछ और लक्ष्य तय किये हैं। बीजेपी इस साल अपने नये तरीके से कदम रख रही है।
कर्नाटक में कांग्रेस समर्थित JDS की सरकार हो या राजस्थान और मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकारें तीनों के सिर पर खतरे का साया मंडरा रहा है, कही सरकार पलट न जाये इसी ख़ौफ़ में जिए जा रहे है कांग्रेस सरकार के नेता। उनको अपनी सरकार के घिर जाने की आशंका शता रही है, लेकिन भाजपा सूत्रों से मिली खबरों को सही माने तो अभी भाजपा मध्यप्रदेश ,राजस्थान और कर्नाटक की सरकारों के गिराने की जल्दबाजी में नहीं है।
लेकिन भाजपा पार्टी की राज्य इकाइयां जल्दी से जल्दी सत्ता में अपना सत्ता जमना चाहती हैं। भाजपा के सुत्रों की खवरो के अनुसार भाजपा पार्टी प्राथमिकता अभी इस साल के आखिरी में होने वाले राज्य विधानसभाओं के चुनाव में पूरा फोकस कर रही हैं। भाजपा पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी केबल विधानसभा चुनाव पर नजर लगाए बैठा है।
सारा ध्यान अभी चुनाव प्रकिया में है। उस पर ही फोकस करना लक्ष्य है। भाजपा पार्टी पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों में मिली अपनी विजयी के बाद कार्यकर्ताओं के उत्साह भरे समर्थक को विधानसभा चुनाव तक बनाये रखना चाहती है। इसलिए भाजपा पार्टी वहां अपने राजनीतिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाए रखना कायम रखेगी।
भाजपा के कुछ नेता अब अकेले चुनाव लड़ने की बात भी करने लगे हैं। लेकिन मीडिया में इस मुद्दे पर कोई नेता अपनी प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं है। झारखंड और हरियाणा का चुनाव भाजपा के लिए जितना कोई बड़ी बात नहीं है। 5 साल सरकार में रहने के बाद चुनाव आते ही सभी पार्टी को सावधानी रखने की जरूरत होती है।
फिलहाल भाजपा पार्टी नेतृत्व कांग्रेस शासित राज्यों पर अपना ध्यान आकर्षित करने से पहले उन राज्यों पर अपना ध्यान आकर्षित करना चाहती है जहां सत्ता में पुनः आने की लहर है। इन सबके बीच भाजपा को सबसे पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का उत्तराधिकारी ढूढने का सफल प्रयास करना है। भाजपा में एक व्यक्ति एक पद का ही दावेदार होता है। इसलिए अमित शाह लम्बे समय से पार्टी अध्यक्ष और गृह मंत्री दोनों जिम्मेदारियां नहीं उठा सकते है।



